कर्नाटक हाईकोर्ट ने बाइक टैक्सी से बैन हटाया:कहा- सरकार परमिट जारी करे, पीली नंबर प्लेट वाली बाइक भी कमर्शियल व्हीकल
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में अब बाइक टैक्सी चल सकेंगी। शुक्रवार को कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को परमिट जारी करने का निर्देश दिया। चीफ जस्टिस विभु बखरू और जस्टिस सी एम जोशी की बेंच ने सुनवाई की। बेंच ने कहा- ओला, उबर समेत एप बेस्ड एग्रीगेटर कंपनियों की अर्जी स्वीकारी गई है। मौजूदा कानूनों के तहत जरूरी परमिशन पर बाइक को ट्रांसपोर्ट व्हीकल के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। बेंच ने कहा है कि बाइक टैक्सी चलाने वाले वाहन मालिकों या एग्रीगेटर कंपनियों को जरूरी लाइसेंस के लिए आवेदन करना होगा। राज्य सरकार बाइक टैक्सी रेगुलेशन में शर्तें लगा सकती है, लेकिन सिर्फ इसलिए रजिस्ट्रेशन की अर्जी खारिज नहीं कर सकती कि वाहन बाइक है। अप्रैल 2025 में हाईकोर्ट ने बेंगलुरु में बाइक टैक्सी पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि जब तक राज्य सरकार मोटर व्हीकल्स एक्ट के तहत नियम नहीं बनाती, तब तक इनपर बैन रहेगा। नम्मा बाइक टैक्सी एसोसिएशन बैन हटाने की मांग कर रहा था कोर्ट के फैसले से हजारों बाइक टैक्सी चालकों को राहत मिली है, जिनकी सेवाएं जून 2025 में बंद हो गई थीं। हाईकोर्ट ने सरकार के प्रतिबंध पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद राज्य में बाइक टैक्सी संचालन पूरी तरह ठप हो गया था। सभी वर्कर्स बैन लगने की वजह से कमाने और अपने परिवार का पेट पालने का हक खो रहे हैं। कृपया इस मामले में दखल दीजिए। कर्नाटक में बाइक टैक्सी चालकों का प्रतिनिधित्व करने वाली नम्मा बाइक टैक्सी एसोसिएशन लगातार सरकार से प्रतिबंध हटाने की मांग कर रही थी। एसोसिएशन ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की थी। लेटर में कहा था कि पूरे कर्नाटक में एक लाख से ज्यादा गिग वर्कर्स बाइक टैक्सी सर्विस पर निर्भर हैं। ...................................... ये खबर भी पढ़ें... स्विगी-जेप्टो ने भी '10 मिनट में डिलीवरी' का दावा हटाया:सरकार के आदेश के बाद विज्ञापन बदला; एक दिन पहले ब्लिंकिट ने हटाया था केंद्र सरकार के निर्देश के बाद स्विगी और जेप्टो ने बुधवार को अपने प्लेटफॉर्म से '10 मिनट में डिलीवरी' के दावे को हटा दिया। सरकार ने इन कंपनियों को सख्त हिदायत दी है कि वे डिलीवरी टाइम को लेकर ऐसे दावे न करें जिससे डिलीवरी पार्टनर्स पर दबाव बने। पूरी खबर पढ़ें...
बांका में 'वियतनाम मॉडल'! मर्चेंट नेवी छोड़ मछली पालन से कमा रहे ₹12 लाख सालाना, जानें पूरा बिजनेस प्लान
Success Story: विदेशों में मछली पालन की आधुनिक तकनीक देखने के बाद शाहनवाज ने 2021 में मर्चेंट नेवी की नौकरी को अलविदा कह दिया और अपने गांव में कमर्शियल फिश फार्मिंग की शुरुआत की. पिंजरे की नौकरी से तालाब की आजादी तक शाहनवाज ने बताया कि नौकरी उनके लिए एक 'पिंजरे' की तरह थी. उन्होंने वियतनाम और बांग्लादेश की तर्ज पर 5 एकड़ में 11 तालाबों का निर्माण किया. शाहनवाज सालाना 12 लाख रुपये से अधिक का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं. उनकी यह कहानी साबित करती है कि आधुनिक तकनीक और संकल्प से खेती-किसानी भी एक शानदार करियर बन सकती है.
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