सामने आ गया नाम! जानिए कौन बनेगा लखनऊ सुपर जायंट्स का नया कप्तान? इन 3 दावेदारों में किसे मिलेगी कमान
Lucknow Super Giants New Captain : इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में साल 2022 में लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) की एंट्री हुई थी. भारत के उद्योगपति संजीव गोयनका के स्वामित्व वाली लखनऊ ने पहली बार आईपीएल 2022 में भाग लिया. टीम की कप्तानी करने का मौका केएल राहुल को मिला. राहुल ने 2022, 2023 और 2024 में लगातार तीन साल लखनऊ सुपर जायंट्स की कप्तानी की लेकिन वो टीम को ट्रॉफी नहीं दिला पाए. ऐसे में केएल राहुल ने आईपीएल 2025 से पहले ही टीम से किनारा कर दिया और कप्तानी छोड़ दी.
इसके बाद लखनऊ सुपर जायंट्स ने दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान ऋषभ पंत को आईपीएल 2025 के लिए 27 करोड़ रुपए में खरादी और उनको अपना कप्तान बना दिया. ऋषभ पंत ने 2025 और 2026 में लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए कप्तानी की लेकिन उनकी कप्तानी में टीम का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा और टीम को लगातार हार का सामना करना पड़ा. पंत की कप्तानी में भी लखनऊ सुपर जायंट्स को ट्रॉफी नसीब नहीं हुई.
आईपीएल 2026 के समापन के कुछ समय बाद लखनऊ सुपर जायंट्स ने ऋषभ पंत को कप्तानी से हटा दिया. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर पंत को हटा दिया. इसके कुछ हमस के बाद ही लखनऊ सुपर जायंट्स ने दिल्ली कैपिट्ल्स के साथ ऋषभ पंत का ट्रेड कर दिया. दिल्ली ने कुलदीप यादव को लखनऊ सुपर जायंट्स को दे दिया और उनसे ऋषभ पंत को वापस ले लिया.
Thank you Rishabh for all the memories ????❤️ pic.twitter.com/c8NxWjl1KN
— Lucknow Super Giants (@LucknowIPL) June 23, 2026
अब एक बार फिर से सवाल खड़ा हो गया है कि, आईपीएल 2027 में लखनऊ सुपर जायंट्स का कप्तान कौन होगा? अब केएल राहुल और ऋषभ पंत को बाद कौन टीम की कमान संभालेंगे. ये सवाल लखनऊ के क्रिकेट फैंस के बीच बना हुआ है. अब इस रेस में 3 नाम सामने आ रहे हैं, जिसमें से किसी एक को लखनऊ का अगला कप्तान बनाया जा सकता है. इन 3 नामों में से एक नाम रेस में सबसे आगे चल रहा है.
1 - ऐडन मार्कराम
साउथ अफ्रीका के कप्तान और दाएं हाथ के स्टार बल्लेबाज ऐडन मार्कराम लखऊ सुपर जायंट्स के नए कप्तान बन सकते हैं. एलएसजी के कप्तान बनने की रेस में सबसे आगे मार्कराम का नाम सामने आ रहा है. उन्होंने टीम के लिए अब तक कमाल का प्रदर्शन किया है और बल्ले से रंनों का अंबार लगाया है. वो लखनऊ के बल्लेबाजी क्रम की रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं. अब ऋषभ पंत का स्थान खाली है. ऐसे में उनको कप्तानी सौंपी जा सकती है. वो साउथ अफ्रीका की कप्तानी के साथ-साथ आईपीएल में हैदराबाद की कप्तानी भी कर चुके हैं. इसके साथ ही उन्हें साउथ अफ्रीका टी20 लीग में भी कप्तानी का अनुभवी है. वो RPSG ग्रुप की अन्य फ्रेंचाइजी में भी कप्तानी की भूमिका निभा रहे हैं. मार्कराम ने 69 आईपीएल मैचों की 66 पारियों में 10 अर्धशतकों के साथ 1671 रन बनाए हैं.
Say hello to humare dil ka chain and SA’s Men’s Cricketer of the Year ???????? pic.twitter.com/tvNg4DSEZ1
— Lucknow Super Giants (@LucknowIPL) July 17, 2026
2 - मिशेल मार्श
लखनऊ सुपर जायंट्स के कप्तान बनने की रेस में मिशेल मार्श का नाम भी शामिल है. अगर एलएसजी ऐडन मार्कराम को कप्तान नहीं बनाती है तो, मिशेल मार्श कप्तान बनने के सबसे प्रबल दावेदार रहेंगे. मिशेल मार्श ऑस्ट्रेलिया की वनडे और टी20 फॉर्मेट में कप्तानी कर चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने कई अन्य क्रिकेट लीग्स में भी कप्तानी की है. उन्होंने लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए बल्ले के साथ भी कई अहम पारियां खेली हैं. मार्श ने 68 मैचों की 62 पारियों में 2 शतक और 12 अर्धशतकों के साथ 1855 रन बनाए हैं.
Challenging call, isn't it? ???????? pic.twitter.com/dPeqOIJFXK
— Lucknow Super Giants (@LucknowIPL) July 8, 2026
3 - निकोलस पूरन
लखनऊ के कप्तान बनने के तीसरे और अंतिम दावेदार निकोलस पूरन हैं. वो लखनऊ सुपर जायंट्स की टीम की पहली भी कप्तानी कर चुके हैं. केएल राहुल की गैरमौजूदगी में उन्होंने आईपीएल में टीम की कमान संभाली है. इसके साथ ही उन्होंने टीम में उपकप्तान की भी भूमिका निभाई है. पूरने के पास भी दुनिया भर की तमाम टी20 लीग में कप्तानी करने का अनुभव है. पूरन ने 104 मैचों की 101 पारियों में 15 अर्धशतकों के साथ 2527 रन बनाए हैं.
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लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, 498A के दायरे पर कही बड़ी बात
लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं के कानूनी अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम बात कही है. अदालत ने साफ किया कि किसी महिला को केवल इसलिए कानून की सुरक्षा से बाहर नहीं किया जा सकता क्योंकि उसका रिश्ता पारंपरिक शादी के रूप में नहीं है. कुछ खास परिस्थितियों में लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामलों में भी भारतीय दंड संहिता की धारा 498A के प्रावधान लागू हो सकते हैं.
'लिव-इन में रहने वाली महिलाओं को भी कानूनी सुरक्षा का अधिकार'
सुप्रीम कोर्ट के इस रुख का सीधा मतलब यह है कि अगर कोई महिला लंबे समय तक किसी पुरुष के साथ पति-पत्नी की तरह रह रही है और उसे रिश्ते में प्रताड़ना या क्रूरता का सामना करना पड़ता है, तो मामले की परिस्थितियों के आधार पर उसे कानूनी राहत मिल सकती है. अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि सिर्फ रिश्ते को ‘लिव-इन’ कह देने से महिला के साथ होने वाली कथित क्रूरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
क्या है धारा 498A?
धारा 498A का इस्तेमाल आम तौर पर शादीशुदा महिला को पति या उसके रिश्तेदारों की ओर से होने वाली क्रूरता और उत्पीड़न से बचाने के लिए किया जाता है. हालांकि, लिव-इन रिलेशनशिप में इस धारा के इस्तेमाल का सवाल कई बार कानूनी बहस का विषय रहा है. ऐसे मामलों में अदालत को रिश्ते की प्रकृति, दोनों लोगों के साथ रहने की स्थिति और सामने आए आरोपों समेत कई पहलुओं को देखना होता है.
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब देश में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर सामाजिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा बढ़ी है. आज कई लोग शादी के बजाय साथ रहने का विकल्प चुनते हैं. ऐसे रिश्तों में अगर किसी महिला को हिंसा, मानसिक प्रताड़ना या गंभीर दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है, तो उसके अधिकारों और कानूनी सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं.
शादी न होने की वजह से सुरक्षा से नहीं किया जा सकता वंचित
अदालत की टिप्पणी का एक अहम पहलू यह भी है कि किसी मामले में कानून लागू करने का फैसला केवल रिश्ते के नाम के आधार पर नहीं किया जा सकता. हर मामले की परिस्थितियों को अलग-अलग देखना जरूरी होगा. यानी हर लिव-इन रिलेशनशिप में धारा 498A अपने आप लागू नहीं होगी, लेकिन अगर मामले में कानून के तहत जरूरी परिस्थितियां मौजूद हैं तो महिला को सिर्फ शादी नहीं होने की वजह से सुरक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता.
कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी से यह संदेश जाता है कि रिश्ते की कानूनी स्थिति के साथ-साथ उसमें शामिल महिला की सुरक्षा और उसके साथ होने वाले व्यवहार को भी गंभीरता से देखा जाना चाहिए. हालांकि, किसी भी मामले में धारा 498A लागू होगी या नहीं, इसका फैसला संबंधित मामले के तथ्यों और कानूनी परिस्थितियों के आधार पर ही किया जाएगा.
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