पाकिस्तान: सरकारी अस्पताल में डायलिसिस करा रहे चार मरीज एचआईवी पॉजिटिव
लाहौर, 27 सितंबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान के पंजाब स्थित टीएचक्यू (तहसील हेडक्वार्टर हॉस्पिटल) टाउनसा अस्पताल ने 2024 से 2025 के बीच 331 बच्चों को संक्रमण बांटा। तो अब मियां चन्नू के टीएचक्यू में डायलिसिस करवा रहे चार मरीज एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं, जिससे दक्षिण पंजाब के हेल्थकेयर सेंटर्स में इन्फेक्शन-कंट्रोल के तरीकों को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।
पाकिस्तानी दैनिक डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती जांच के बाद अस्पताल में डायलिसिस करवा रहे मरीजों (जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं) में इस जानलेवा वायरस की पुष्टि हुई।
अस्पताल प्रशासन ने उन्हें आगे की मेडिकल जांच और इलाज के लिए निश्तर हॉस्पिटल मुल्तान भेज दिया है और वे अभी वहां इलाज करवा रहे हैं।
मियां चन्नू अस्पताल के अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि इस सेंटर में 60 से ज्यादा मरीज डायलिसिस करवा रहे थे और डायलिसिस की प्रक्रिया से एचआईवी नहीं फैल सकता। उन्होंने कहा कि वे स्थिति का जायजा ले रहे हैं।
हालांकि, सूत्रों का कहना है कि डायलिसिस करवाने वाले कुछ और मरीज भी एचआईवी पॉजिटिव हो सकते हैं, लेकिन अधिकारियों ने और मामलों की पुष्टि नहीं की।
हाल के वर्षों में, पंजाब के हेल्थकेयर सेंटर्स में एचआईवी के कई मामले सामने आए हैं।
नवंबर 2024 में, निश्तर हॉस्पिटल में किडनी के लगभग 30 मरीजों को डायलिसिस के दौरान एचआईवी होने की बात सामने आई थी, जबकि एक मरीज की जटिलताओं के कारण मौत हो गई थी। बाद में पंजाब सरकार की एक जांच समिति ने अस्पताल के नेफ्रोलॉजी यूनिट में एचआईवी/एड्स के फैलने की पुष्टि की और डायलिसिस गाइडलाइंस व स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के उल्लंघन की पहचान की।
2026 में प्रकाशित एक वैज्ञानिक अध्ययन में, जिसमें आगा खान यूनिवर्सिटी और पंजाब एड्स कंट्रोल प्रोग्राम के शोधकर्ता शामिल थे, पाया गया कि मुल्तान में डायलिसिस से जुड़े मामले आपस में जुड़े हुए थे और इस बात के सबूत मिले कि इन्फेक्शन हेल्थकेयर सेंटर के अंदर ही फैला था। पंजाब सरकार ने जनवरी 2025 में निश्तर हॉस्पिटल मुल्तान में इन्फेक्शन फैलने से जुड़ी कथित लापरवाही और कुप्रबंधन के लिए वरिष्ठ अधिकारियों और मेडिकल स्टाफ के खिलाफ पीईईडीए एक्ट के तहत कार्रवाई का आदेश दिया।
एचआईवी से जुड़ा एक और बड़ा संकट टौंसा में सामने आया था, जहां 106 बच्चे एचआईवी पॉजिटिव पाए गए थे और उन्हें मार्च 2025 में एड्स कंट्रोल प्रोग्राम के तहत रजिस्टर किया गया था। सरकार ने टीएचक्यू अस्पताल में एक स्क्रीनिंग और ट्रीटमेंट सेंटर स्थापित किया था और वरिष्ठ स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के ख़िलाफ कार्रवाई का आदेश दिया था।
बाद में, डब्ल्यूएचओ, यूनिसेफ, यूएनएड्स और दूसरे सहयोगियों के एक जॉइंट मिशन ने प्रभावित इलाके में लगभग 50,000 लोगों की घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की। इसमें यह भी बताया गया कि सरकारी अस्पतालों को ऑटो-डिसेबल सिरिंज सप्लाई की गईं और कथित तौर पर नीम-हकीमों द्वारा चलाई जा रही सैकड़ों क्लीनिकों को सील कर दिया गया।
फेडरल लेवल पर, नेशनल एड्स कंट्रोल प्रोग्राम का कहना है कि दिसंबर 2025 तक पाकिस्तान में 84,421 एचआईवी मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 60,785 लोग 98 केंद्रों पर एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी ले रहे थे।
--आईएएनएस
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टैक्स ऑडिट रिपोर्ट की डेडलाइन 30 सितंबर, सरकार ने नहीं किया विस्तार; जानें 5 जरूरी काम
वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 तेजी से नजदीक आ रही है. हालांकि, देशभर के कर पेशेवर और विभिन्न उद्योग संगठनों द्वारा इस समयसीमा को आगे बढ़ाने की मांग की जा रही है, लेकिन अभी तक केंद्र सरकार या केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की ओर से कोई आधिकारिक विस्तार घोषित नहीं किया गया है. ऐसे में टैक्स ऑडिट के दायरे में आने वाले करदाताओं को मौजूदा समयसीमा को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारियां पूरी करने की सलाह दी जा रही है. आयकर विभाग के अनुसार, आयकर अधिनियम की धारा 44एबी के तहत आने वाले करदाताओं को 30 सितंबर तक अपना ऑडिट पूरा कराकर ऑडिट रिपोर्ट प्राप्त करनी होती है.
विभिन्न पेशेवर संगठनों का कहना है कि इस बार ऑडिट, मिलान, खुलासों और अन्य अनुपालन कार्यों में अधिक समय लग रहा है. इसी वजह से कई संगठनों ने समयसीमा बढ़ाने की मांग की है. मध्य प्रदेश टैक्स कंसल्टेंट्स एसोसिएशन (एमपीटीसीए) ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर से बढ़ाकर 30 नवंबर 2026 करने की मांग की है. हालांकि, जब तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक 30 सितंबर की समयसीमा ही लागू मानी जाएगी. ऐसे में टैक्सपेयर्स को ये 5 जरूरी काम तुरंत कर लेने चाहिए. पहला, करदाताओं को अपने लेखा-जोखा, बिक्री और खरीद रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट, बिल, चालान और अन्य आवश्यक दस्तावेज व्यवस्थित रखने चाहिए. अधूरी जानकारी या रिकॉर्ड में विसंगतियां ऑडिट प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं.
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दूसरा, कारोबारियों को जीएसटी टर्नओवर, कर विवरण और अन्य वित्तीय आंकड़ों का पुस्तकों से मिलान करना चाहिए. साथ ही फॉर्म 26एएस, एआईएस (एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट) और टीआईएस (टैक्सपेयर इन्फॉर्मेशन समरी) में उपलब्ध सूचनाओं की भी जांच करनी चाहिए, ताकि किसी प्रकार की त्रुटि या असंगति समय रहते दूर की जा सके. तीसरा, ऋण, स्थायी परिसंपत्तियों (फिक्स्ड एसेट्स), संबंधित पक्षों, वैधानिक देनदारियों और बड़े खर्चों जैसे मामलों की विशेष जांच करनी चाहिए. ऑडिट रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले इन सभी लेनदेन की टैक्स ट्रीटमेंट को लेकर ऑडिटर से चर्चा करना जरूरी है. चौथा, टैक्स ऑडिट रिपोर्ट और आयकर रिटर्न (आईटीआर) में दर्ज आंकड़ों का एक-दूसरे से मेल खाना आवश्यक है. टर्नओवर, खर्च, कटौतियां, कर संबंधी खुलासे और आगे ले जाए गए घाटे जैसे आंकड़ों में अंतर होने पर बाद में परेशानी हो सकती है और पांचवां, केवल चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा टैक्स ऑडिट रिपोर्ट अपलोड कर देना पर्याप्त नहीं है. रिपोर्ट अपलोड होने के बाद करदाता को अपने आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग-इन कर उसे स्वीकृत भी करना होता है. इसलिए इस प्रक्रिया के लिए पर्याप्त समय पहले से निकालना जरूरी है.
कई करदाता टैक्स ऑडिट रिपोर्ट और आयकर रिटर्न की अंतिम तिथियों को लेकर भ्रमित हो जाते हैं. वर्तमान नियमों के अनुसार, टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 है, जबकि ऑडिट के दायरे में आने वाले करदाताओं के लिए आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 है. इसलिए दोनों समयसीमाओं को अलग-अलग समझना और उनके अनुसार तैयारी करना आवश्यक है.
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