टैक्स ऑडिट रिपोर्ट की डेडलाइन 30 सितंबर, सरकार ने नहीं किया विस्तार; जानें 5 जरूरी काम
वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 तेजी से नजदीक आ रही है. हालांकि, देशभर के कर पेशेवर और विभिन्न उद्योग संगठनों द्वारा इस समयसीमा को आगे बढ़ाने की मांग की जा रही है, लेकिन अभी तक केंद्र सरकार या केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की ओर से कोई आधिकारिक विस्तार घोषित नहीं किया गया है. ऐसे में टैक्स ऑडिट के दायरे में आने वाले करदाताओं को मौजूदा समयसीमा को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारियां पूरी करने की सलाह दी जा रही है. आयकर विभाग के अनुसार, आयकर अधिनियम की धारा 44एबी के तहत आने वाले करदाताओं को 30 सितंबर तक अपना ऑडिट पूरा कराकर ऑडिट रिपोर्ट प्राप्त करनी होती है.
विभिन्न पेशेवर संगठनों का कहना है कि इस बार ऑडिट, मिलान, खुलासों और अन्य अनुपालन कार्यों में अधिक समय लग रहा है. इसी वजह से कई संगठनों ने समयसीमा बढ़ाने की मांग की है. मध्य प्रदेश टैक्स कंसल्टेंट्स एसोसिएशन (एमपीटीसीए) ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर से बढ़ाकर 30 नवंबर 2026 करने की मांग की है. हालांकि, जब तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक 30 सितंबर की समयसीमा ही लागू मानी जाएगी. ऐसे में टैक्सपेयर्स को ये 5 जरूरी काम तुरंत कर लेने चाहिए. पहला, करदाताओं को अपने लेखा-जोखा, बिक्री और खरीद रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट, बिल, चालान और अन्य आवश्यक दस्तावेज व्यवस्थित रखने चाहिए. अधूरी जानकारी या रिकॉर्ड में विसंगतियां ऑडिट प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं.
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दूसरा, कारोबारियों को जीएसटी टर्नओवर, कर विवरण और अन्य वित्तीय आंकड़ों का पुस्तकों से मिलान करना चाहिए. साथ ही फॉर्म 26एएस, एआईएस (एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट) और टीआईएस (टैक्सपेयर इन्फॉर्मेशन समरी) में उपलब्ध सूचनाओं की भी जांच करनी चाहिए, ताकि किसी प्रकार की त्रुटि या असंगति समय रहते दूर की जा सके. तीसरा, ऋण, स्थायी परिसंपत्तियों (फिक्स्ड एसेट्स), संबंधित पक्षों, वैधानिक देनदारियों और बड़े खर्चों जैसे मामलों की विशेष जांच करनी चाहिए. ऑडिट रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले इन सभी लेनदेन की टैक्स ट्रीटमेंट को लेकर ऑडिटर से चर्चा करना जरूरी है. चौथा, टैक्स ऑडिट रिपोर्ट और आयकर रिटर्न (आईटीआर) में दर्ज आंकड़ों का एक-दूसरे से मेल खाना आवश्यक है. टर्नओवर, खर्च, कटौतियां, कर संबंधी खुलासे और आगे ले जाए गए घाटे जैसे आंकड़ों में अंतर होने पर बाद में परेशानी हो सकती है और पांचवां, केवल चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा टैक्स ऑडिट रिपोर्ट अपलोड कर देना पर्याप्त नहीं है. रिपोर्ट अपलोड होने के बाद करदाता को अपने आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग-इन कर उसे स्वीकृत भी करना होता है. इसलिए इस प्रक्रिया के लिए पर्याप्त समय पहले से निकालना जरूरी है.
कई करदाता टैक्स ऑडिट रिपोर्ट और आयकर रिटर्न की अंतिम तिथियों को लेकर भ्रमित हो जाते हैं. वर्तमान नियमों के अनुसार, टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 है, जबकि ऑडिट के दायरे में आने वाले करदाताओं के लिए आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 है. इसलिए दोनों समयसीमाओं को अलग-अलग समझना और उनके अनुसार तैयारी करना आवश्यक है.
Input: IANS
'मन की बात' में पीएम मोदी ने पोषण माह पर की बात, छत्तीसगढ़ से मिजोरम तक की पहलों को सराहा
नई दिल्ली, 27 सितंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात के 138वें एपिसोड में देश में कुपोषण के खिलाफ चल रहे जन-आंदोलन की जमकर तारीफ की। पीएम ने कहा कि सितंबर का महीना कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने और एक स्वस्थ व बेहतर पोषण वाले भारत के निर्माण के लिए समर्पित है। पूरे देश में कुपोषण से निपटने और पोषण के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए कई प्रेरणादायक पहल की जा रही हैं।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, सितंबर का ये महीना कुपोषण से लड़ाई को समर्पित है। पोषण माह में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोग और संस्थाएं इस नेक कार्य के लिए एक साथ आती हैं। छत्तीसगढ़ ने हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा अभियान शुरू किया है। इसमें लोगों को पौष्टिक मुनगा यानि मोरिंगा को अपने खान-पान में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। मोरिंगा को पोषण का पावरहाउस माना जाता है।
पीएम ने कहा, इसी तरह गुजरात ने भी एक अनोखी पहल की है और वांगी स्पर्धा यानि मिलेट्स से बने व्यंजनों का कॉम्पिटिशन शुरू किया है। इस पहल के जरिए सस्ते और पौष्टिक स्थानीय खान-पान को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब तक दो लाख से ज्यादा लोग इस प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुके हैं। मोटे अनाजों को बढ़ावा देने की यह पहल पोषण के साथ-साथ किसानों को भी फायदा पहुंचा रही है।
पीएम मोदी ने महाराष्ट्र के प्रयासों को भी सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि वहां टीचर्स, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और बच्चों के माता-पिता एक साथ मिलकर जागरूकता अभियान से जुड़ रहे हैं। स्कूल और समुदाय का यह संगम कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को और मजबूत कर रहा है।
मिजोरम का उदाहरण देते हुए पीएम ने कहा, इस साल वहां लोगों ने साथ मिलकर पोषण वाटिकाओं की देखभाल के लिए एक अभियान शुरू किया है। यह मिजो समाज की गौरवशाली परंपरा तलो-मड़-यना के अनुरूप है, जिसका अर्थ है निस्वार्थ सेवा और दूसरों की मदद में हमेशा आगे रहना। ऐसे प्रयास बेहद सराहनीय हैं और हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े हैं।
प्रधानमंत्री ने आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़े लोगों पर गर्व जताया। उन्होंने बताया कि तकनीक के इस्तेमाल से पोषण अभियान को नई ताकत मिली है। पीएम ने कहा, ये आंगनवाड़ी केंद्र अब पोषण ट्रैकर से डिजिटली जुड़ गए हैं। करीब 9 करोड़ लाभार्थी इसमें रजिस्टर्ड हो चुके हैं। इससे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की बेहतर देखभाल संभव हुई है।
अंत में पीएम मोदी ने देशवासियों से अपील की कि कुपोषण के खिलाफ इस लड़ाई को इसी तरह आगे लेकर जाना है और समाज को कुपोषण से पूरी तरह मुक्त करना है।
--आईएएनएस
एससीएच/एएस
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