अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका का एक नौसैनिक बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की हत्या और परमाणु कार्यक्रम को फिर से शुरू करने की संभावना को लेकर तेहरान को चेतावनी दोहराई है। ट्रंप की ये टिप्पणियां गुरुवार को स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच से लौटने के दौरान आईं। ये टिप्पणियां ईरान में आंतरिक अशांति और परमाणु गतिविधियों को लेकर बढ़ते तनाव के बीच की स्थिति को दर्शाती हैं।
अमेरिकी युद्धपोत और वायु रक्षा प्रणालियाँ मध्य पूर्व की ओर रवाना
समाचार एजेंसी रॉयटर्स से नाम न छापने की शर्त पर बात करते हुए अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और कई निर्देशित मिसाइल विध्वंसक पोतों के आने वाले दिनों में मध्य पूर्व पहुँचने की उम्मीद है। क्षेत्र में अमेरिकी सेनाओं और ठिकानों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त वायु रक्षा प्रणालियों पर भी विचार किया जा रहा है, जो वाशिंगटन के मजबूत सैन्य विकल्पों को रेखांकित करता है। ट्रंप ने एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से कहा कि हमारे कई जहाज उस दिशा में जा रहे हैं, एहतियात के तौर पर... मैं नहीं चाहता कि कुछ भी हो, लेकिन हम उन पर कड़ी नज़र रख रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि इस तैनाती का उद्देश्य ईरानी कार्रवाइयों को रोकना था और अमेरिका को शायद इसका इस्तेमाल करने की जरूरत न पड़े।
ईरान को परमाणु चेतावनी दोहराई गई
अमेरिकी राष्ट्रपति ने तेहरान को उसके परमाणु कार्यक्रम को फिर से शुरू करने के खिलाफ चेतावनी दोहराई और कहा कि अगर ईरान ने संवर्धन गतिविधियां फिर से शुरू कीं तो अमेरिका दोबारा कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि अगर वे ऐसा दोबारा करने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें किसी और क्षेत्र में जाना होगा। हम वहां भी उन पर उतनी ही आसानी से हमला करेंगे। उन्होंने यह दावा भी दोहराया कि उनकी धमकियों के बाद ईरान ने प्रदर्शनकारियों की लगभग 840 नियोजित फांसी रोक दी। ट्रम्प ने कहा कि मैंने कहा था अगर तुम उन लोगों को फांसी देते हो, तो तुम्हें अब तक की सबसे भीषण मार पड़ेगी। इससे ईरान के परमाणु कार्यक्रम के साथ हमने जो किया, वह तुच्छ लगेगा।
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कहा जाता है कि अगर ईरान पर बरसों से अमेरिकी सेंशंस नहीं होते तो आज ईरान की तरक्की और उसकी इजात, उसकी खोज, उसके आविष्कार दुनिया देखती। कहा तो यह भी जाता है कि आज भी ईरान में छोटी बड़ी ऐसी बहुत सी टेक्नोलॉजी है जो दुनिया की नजरों से छिपी हुई है। दुनिया सिर्फ ईरान की आर्म इंडस्ट्री और खासकर रिवर्स इंजीनियरिंग से वाकिफ है। लेकिन ईरान दुनिया का एकलौता इस्लामिक मुल्क होगा जिसने साइंस और मजहब दोनों को एक साथ बड़ी समझदारी से समन्वित किया और इस्लामिक रेवोल्यूशन के बाद तो इस दिशा में जमकर काम हुआ। कहा जाता है कि उनके साइंटिस्ट ने ऐसीऐसी चीजें बना ली है जो अब तक दुनिया से छिपी हुई हैं। शायद इसी वजह से आरोप लगता है कि अमेरिका और इसराइल ईरान के वैज्ञानिकों की जान के दुश्मन बने रहते हैं।
इस्लामिक रिपब्लिक में कर्बला वाले जज्बे के साथ-साथ अपने दुश्मन को तकनीक के मैदान में भी धूल चटाने की सलाहियत है। ईरान में महंगाई के खिलाफ हुए प्रदर्शन या मुजाहरे देखते ही देखते हिंसक होने लगे थे। तीन से 4 दिन में ईरान में आग ही आग थी और महंगाई से राहत दो के नारे इस्लामिक रेवोल्यूशन मुर्दाबाद में बदल गए। अमेरिका खुलकर सामने आया। प्रेसिडेंट ट्रंप ने कहा किसी भी प्रदर्शनकारी पर कारवाई हुई तो अमेरिका एक्शन लेगा। ईरान में सरकार भी भांप गई कि यह तो मामला ही कुछ और है। फिर इसराइल के पीएम बेंजामिन बेंजामिन नेतन्याहू का बयान आ गया। 2026 की जनवरी ईरान में कत्लो गारत और बर्बादी लाई थी। दुनिया भर में ईरान के वीडियो दिखाए जा रहे थे। ईरान एक्शन में आया। एहतेजाज कर रहे लोगों पर काबू पाने के लिए देश भर में इंटरनेट बंद कर दिया गया और इसके बाद प्रदर्शनकारियों के लीडर और उनकी जड़ को तलाशने का अभियान चला।
ईरान में इंटरनेट और मोबाइल बंद कर दिए जाने पर सीआईए एक्टिव हुई और अमीर कारोबारी एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक से राब्ता कायम किया गया संपर्क किया गया। स्टारलिंक कंपनी ने अपनी खास सेटेलाइट टेक्नोलॉजी के जरिए ईरान में इंटरनेट की सप्लाई शुरू कर दी। ट्रंप ने खुद ऐलान किया कि ईरान में स्टारलिंक की नेट सुविधा है। प्रदर्शनकारी लगे रहें।
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