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Ovarian Cyst के लक्षण और कारण, ज्यादातर मामलों में बिना Surgery संभव है इलाज

आज के समय में महिलाएं घर के साथ-साथ ऑफिस की जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही हैं। हालांकि दोनों जगह की जिम्मेदारियों के चलते कई बार वह अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। आज की महिलाओं को ओवेरियन सिस्ट या ओवरी सिस्ट का सामना करना पड़ रहा है। यह एक सामान्य समस्या बनकर उभर रही है। ओवरी सिस्ट के होने के शुरूआती चरण में महिलाओं को किसी तरह के लक्षण नहीं दिखते हैं। रूटीन हेल्थ चेकअप के दौरान, अनियमित पीरियड्स या पेल्विक में दर्द की समस्या होने पर जांच करते समय इनका पता चलता है।

वहीं कई महिलाएं सिस्ट का नाम सुनकर घबरा जाती हैं। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो हर तरह की सिस्ट के लिए सर्जरी की जरूरत नहीं होती है। ओवेरियन सिस्ट के प्रकार और आकार को ध्यान में रखकर इलाज किया जाता है। वहीं कई तरह के ओवेरियन सिस्ट का इलाज नियमित फॉलोअप, निगरानी और दवाओं के जरिए किया जाता है।

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क्या है ओवेरियन सिस्ट

यह एक तरल पदार्थ से भरी थैली होती है, जोकि ओवरी के ऊपर या फिर अंदर बनती है। ओवरीज जरूरी प्रजनन अंग है, जो अंडे और हार्मोन जैसे एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन बनाते हैं। अधिकतर ओवेरियन सिस्ट सौम्य यानी की कैंसर रहित होती हैं। जोकि बिना किसी समस्या के खुद ठीक हो जाती हैं। वहीं कई बार यह सिस्ट बड़ी हो जाती हैं, जोकि असुविधाजनक या प्रजनन और हार्मोन से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकती हैं।

क्यों होते हैं ओवरी सिस्ट

हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो ओवेरियन सिस्ट बनने की वजह वजहें हो सकती हैं। जिनमें सबसे आम वजह 'फंक्शनल सिस्ट' हैं। जोकि मेंस्ट्रुअल साइकिल से जुड़े होते हैं। मासिक धर्म चक्र में ओव्यूलेशन वह प्रोसेस है, जब ओवरीज में विकसित होने वाले फॉलिकल्स से अंडे निकलते हैं। कई बार यह फॉलिकल्स ठीक तरह से नहीं खुलते हैं या फिर अंडा निकलने के बाद वह सिकुड़ जाते हैं। जिस कारण सिस्ट बन जाती है।

जानें ओवेरियन सिस्ट के अन्य कारण

एंडोमेट्रियोसिस
गर्भावस्था से जुड़े सिस्ट
हार्मोनल असंतुलन
पेल्विस में संक्रमण
पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम
फैमिली हिस्ट्री या कुछ चिकित्सीय स्थितियां

ओवेरियन सिस्ट से होने वाली समस्याएं

कई मामलों में ओवेरियन सिस्ट होने के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। लेकिन जैसे-जैसे सिस्ट का आकार बढ़ता जाता है या जटिल होता जाता है, महिलाओं में फिर कई तरह के लक्षण महसूस हो सकते हैं।

लक्षण


संभोग के दौरान दर्द।
बार-बार पेशाब आना।
पेट में सूजन या भारीपन।
पीरियड्स का समय पर न आना।
कुछ मामलों में गर्भधारण में कठिनाई।
जी मिचलाना या उल्टी
पेल्विस या पेट के निचले हिस्से में दर्द होना।

हालांकि बहुत कम मामलों में महिलाओं का सिस्ट ज्यादा बढ़ सकता है या फिर ओवरी मुड़ सकती है। इसको ओवेरियन टॉर्शन कहा जाता है। जिसके कारण महिलाओं को अचानक से तेज दर्द हो सकता है।

ओवेरियन सिस्ट पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट

अधिकतर ओवेरियन सिस्ट सौम्य होते हैं और समय के साथ ठीक हो जाती हैं। हालांकि इलाज का तरीका महिला की उम्र, सिस्ट के आकार, लक्षणों और अल्ट्रासाउंड के नतीजों पर निर्भर करता है। इसलिए लिए हमेशा सर्जरी पहला ऑप्शन नहीं होती है।

वहीं अगर किसी महिला को यह बताया जाता है कि उनको ओवेरियन सिस्ट है, तो उनको घबराना नहीं चाहिए। क्योंकि अक्सर सावधानीपूर्वक निगरानी और डॉक्टरी सलाह से साधारण सिस्ट ही ठीक हो जाते हैं।

कब किया जाता है ओवेरियन सिस्ट में बिना सर्जरी वाले इलाज पर विचार

जब सिस्ट का आकार ज्यादा बड़ा नहीं होता है।

लक्षण हल्के या बिल्कुल न के बराबर हों।

फटने या मुड़ने के कोई संकेत न हों

अल्ट्रासाउंड में साधारण और कैंसर-रहित दिखें।

कुछ मामलों में डॉक्टर महिलाओं को देखने और इंतजार करने का तरीका अपनाए जाने की सलाह दे सकते हैं। इसमें बार-बार यह देखने के लिए अल्ट्रासाउंड किया जाता है कि क्या सिस्ट सिकुड़ रहा है या फिर अपने आप ठीक हो रहा है।

ओवेरियन सिस्ट का इलाज

कुछ खास मामलों में गर्भनिरोधक गोलियां या हार्मोनल थेरेपी दी जाती है।

दर्द कम करने वाली दवाएं।

लाइफस्टाइल और पीएमओएस मामलों में महिलाओं को वेट कंट्रोल करने की सलाह दी जाती है।

सर्जरी की कब होती है जरूरत

गंभीर लक्षण होना
कैंसर होने का शक होना।
अंडाशय फट जाए या मुड़ जाने की स्थिति में।
सिस्ट का आकार तेजी से बड़ा होना।

सिस्ट का जल्दी पता चलना क्यों जरूरी

हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो महिलाओं को पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द, पेट में बिना किसी वजह के आने वाली सूजन और मासिक धर्म में अनियमितता भूलकर भी नजरअंदाज करने की गलती नहीं करनी चाहिए। स्त्री रोग विशेषज्ञ से नियमित जांच करवाना, समय पर अल्ट्रासाउंड करवाना और ओवरी के सिस्ट का समय पर पता लगाने के साथ-साथ इसकी जटिलताओं से भी बचाव में मदद करता है।

ओवेरियन सिस्ट आम परेशानी होती हैं और कोई बड़ी समस्या नहीं होती है। लेकिन फिर भी डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। वहीं सही जांच और इलाज से कई महिलाएं बिना सर्जरी के इससे निजात पा सकती हैं और अपने प्रजनन को भी स्वस्थ बनाए रख सकती हैं।

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Mohsin Naqvi के खिलाफ ACC Board के 3 सदस्य, Bangladesh को मिल सकती है कमान

एशियाई क्रिकेट परिषद में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष मोहसिन नकवी का कार्यकाल अप्रैल 2027 के बाद आगे बढ़ने की संभावना फिलहाल कमजोर दिखाई दे रही है। मौजूदा हालात में परिषद के कार्यकारी बोर्ड से उनके कार्यकाल को बढ़ाने के लिए जरूरी समर्थन मिलना मुश्किल बताया जा रहा है। नकवी का मौजूदा कार्यकाल 2 अप्रैल 2027 को पूरा होना तय है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, एशियाई क्रिकेट परिषद के कार्यकारी बोर्ड में शामिल 5 पूर्ण सदस्य देशों में से कम से कम 3 और संभवत: 4 देश नकवी के कार्यकाल को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। इन 5 देशों में भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और अफगानिस्तान शामिल हैं। परिषद के अध्यक्ष का पद आम तौर पर पूर्ण सदस्य देशों के बीच हर 2 साल में घूमता है।

इस व्यवस्था के तहत अब बांग्लादेश की बारी है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष तमीम इकबाल के परिषद की जिम्मेदारी संभालने में रुचि रखने की बात सामने आई है। ऐसे में मौजूदा व्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए नकवी को सभी प्रमुख सदस्यों का समर्थन हासिल करना जरूरी होगा, जो मौजूदा परिस्थितियों में आसान नहीं माना जा रहा है।

कुछ समय से यह चर्चा भी थी कि नकवी अगले वार्षिक आम बैठक तक पद पर बने रह सकते हैं। हालांकि, परिषद के एक सदस्य ने क्रिकेट से जुड़ी वेबसाइट क्रिकबज को बताया कि अध्यक्ष का कार्यकाल वार्षिक आम बैठक की तारीख से जुड़ा नहीं है। यानी आम बैठक कब होती है, इससे अध्यक्ष का 2 साल का कार्यकाल अपने आप आगे नहीं बढ़ता है।

परिषद के इसी सदस्य के अनुसार, नकवी का कार्यकाल अप्रैल 2027 में समाप्त होगा और इसके बाद बांग्लादेश को अध्यक्ष पद संभालने का मौका मिलना तय व्यवस्था के अनुरूप होगा। उन्होंने यह भी कहा कि नकवी यह तर्क दे सकते हैं कि पिछले साल अगस्त में हुई आम बैठक में परिषद के दूसरे पदों के चुनाव नहीं हुए थे और इस साल अगस्त में चुनाव कराए गए हैं, लेकिन अध्यक्ष का कार्यकाल आम बैठक से अलग है।

गौरतलब है कि एशियाई क्रिकेट परिषद के अध्यक्ष का कार्यकाल बढ़ाए जाने का उदाहरण पहले भी सामने आ चुका है। 2024 में जय शाह को तीसरे साल के लिए अध्यक्ष बनाए रखा गया था। उस समय श्रीलंका की बारी थी, लेकिन उसने सर्वसम्मति से जय शाह को एक और कार्यकाल जारी रखने की सहमति दी थी। यानी ऐसे फैसलों के लिए सदस्य देशों की व्यापक सहमति अहम रहती है।

नकवी के मामले में यही सहमति सबसे बड़ी चुनौती बनती दिख रही है। परिषद के सदस्य के अनुसार, अध्यक्ष का पद पूर्ण सदस्यों के बीच 2 साल के लिए घूमता है और विशेष स्थिति में कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए कार्यकारी बोर्ड का समर्थन जरूरी होती है। मौजूदा परिस्थितियों में नकवी के कार्यकाल को बढ़ाने पर ऐसी सहमति बनने की संभावना कम बताई जा रही है।

बांग्लादेश की बारी और तमीम इकबाल की कथित दिलचस्पी इस मुद्दे को और महत्वपूर्ण बना रही है। हालांकि, नकवी के कार्यकाल के दौरान एक और चर्चा का विषय सामने आ सकता है। दिसंबर में बांग्लादेश में एशियाई अंडर-19 महिला चैंपियनशिप आयोजित होनी है, जिसमें भारत 2 बार का मौजूदा चैंपियन है।

बता दें कि इससे पहले भारतीय टीम से जुड़े एक खिताबी समारोह को लेकर नकवी चर्चा में रहे हैं। अगर भारत इस प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंचता है, तो ट्रॉफी कौन सौंपेगा, इस पर भी नजर रह सकती है। हालांकि, यह स्थिति नकवी के मौजूदा कार्यकाल के दौरान ही बनेगी और अप्रैल 2027 के बाद परिषद की अध्यक्षता किसके पास होगी, यह सदस्य देशों की तय व्यवस्था और सहमति पर निर्भर करेगा।

Tue, 29 Sep 2026 21:55:00 +0530

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