ईरानी राष्ट्रपति ने दिखाई मृत बच्चों की तस्वीर:UN में बोले- 200 साल में कोई हमला नहीं किया, खुद आतंक के शिकार; भाषण के 6 मायने
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण दिया। वे अपने साथ ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की तस्वीर लेकर पहुंचे थे। पजशकियान ने कहा कि ईरान ने 200 साल में किसी भी देश पर हमला नहीं किया। उन्होंने कहा, ट्रम्प हमें आतंकवादी कहते हैं लेकिन हम खुद आतंक के शिकार हैं। मैं उस ईरान से आया हूं, जहां हमारे सुप्रीम लीडर की बिना किसी वजह के हत्या कर दी गई। उन्होंने ईरान के मिनाब स्कूल पर हुए अमेरिकी हमले की तस्वीर दिखाते हुए कहा, हमारे स्कूल पर बम गिराया गया। इन बच्चों को देखिए। ये बच्चे अमेरिका और इजराइल के हथियारों से हुए हमले में मारे गए। इन बच्चों ने कोई अपराध भी नहीं किया था। 28 फरवरी को हुए इस हमले में 120 बच्चों समेत 156 लोगों की मौत हुई थी। UN में पजशकियान की 3 तस्वीरें… पजशकियान के UN भाषण के 6 बड़े मायने 1. ईरान को ‘पीड़ित’ दिखाने की कोशिश अमेरिका और इजराइल ईरान पर आतंकवाद फैलाने का आरोप लगाते रहे हैं। पजशकियान ने बच्चों के शवों और स्कूल बैग की तस्वीरें दिखाकर ईरान को आतंक का शिकार बताने की कोशिश की। ऐसा करके उन्होंने दुनिया से सहानुभूति और युद्ध के खिलाफ समर्थन जुटाने की कोशिश की। 2. ट्रम्प की धमकी का जवाब एक दिन पहले ट्रम्प ने ईरान को धमकी देते हुए कहा था कि समझौता करो, वरना ईरान को तबाह कर दिया जाएगा। इसके जवाब में पजशकियान ने कहा कि ईरान किसी दूसरे देश पर हमला नहीं करना चाहता लेकिन उसे अपनी हिफाजत के लिए किसी की इजाजत की जरूरत नहीं है। 3. परमाणु बम पर स्टैंड क्लियर पजशकियान ने कहा कि ईरान परमाणु बम नहीं चाहता, लेकिन शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक का अधिकार भी नहीं छोड़ेगा। यानी ईरान बम बनाने से इनकार कर रहा है, लेकिन अपने परमाणु कार्यक्रम पर पूरी रोक लगाने को भी तैयार नहीं है। 4. पश्चिमी देशों के दोहरे रवैये पर सवाल पजशकियान ने कहा, 'इजराइल गाजा में निर्दोष लोगों को मारता है, लेकिन प्रतिबंध तेहरान पर लगाए जाते हैं। यही पश्चिमी देशों का दोहरा रवैया है।' उन्होंने यह भी कहा कि इजराइल के पास परमाणु बम है, फिर भी इंटरनेशनल इंस्पेक्टर्स केवल ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम की जांच करने और उस पर पाबंदियां लगाने की मांग करते हैं। 5. अमेरिकी प्रतिबंधों का असर बताया पजशकियान ने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों का सबसे ज्यादा असर गरीब, बीमार और कमजोर ईरानियों पर पड़ रहा है। उन्होंने अमेरिका पर आम लोगों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। यानी ईरान युद्ध के साथ प्रतिबंधों से हो रही लोगों की परेशानी को भी दुनिया के सामने रखा। 6. UN की निष्पक्षता पर सवाल ईरानी राष्ट्रपति ने UN की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए इसे ताकतवर देशों की कठपुतली बताया। उन्होंने कहा कि जब गाजा, लेबनान और सीरिया में आम नागरिकों, महिलाओं और बच्चों की सरेआम हत्या की जाती है, तो संयुक्त राष्ट्र जरूरी कदम क्यों नहीं उठाता है? ईरान में जंग से 7,300 मौतें, 32 लाख लोगों ने घर छोड़ा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी से शुरू हुई जंग में ईरान में करीब 7,300 लोग मारे गए और 32,314 घायल हुए। करीब 1.49 लाख इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं, जिससे करीब 4 लाख लोग प्रभावित हुए। करीब 32 लाख लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा। जंग का असर स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी पड़ा। 229 स्वास्थ्य केंद्र और 49 अस्पताल क्षतिग्रस्त हुए। वहीं, ईरान ने अप्रैल में बताया था कि युद्ध की वजह से 24.8 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। खबर से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
आज का एक्सप्लेनर:जिनपिंग को लेने प्रोटोकॉल तोड़ एयरपोर्ट पहुंचे ट्रम्प, 3 दिन का स्पेशल कार्यक्रम; जानिए चीन को खुश करने में क्यों जुटा है अमेरिका
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से तीखी बहस, जापान की पीएम को नीचा दिखाना, भारत के पीएम को टैरिफ की चेतावनी… अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ज्यादातर विदेशी नेताओं के साथ अपमानजनक तरीके से पेश आते रहे। लेकिन चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के दौरे से पहले ट्रम्प के तेवर बदले-बदले से हैं। जिनपिंग के लिए रेड कार्पेट कैसे बिछा रहे ट्रम्प, चीन को खुश करने के पीछे क्या कोई खास मकसद और इस दौरे का दुनिया पर असर क्या पड़ेगा; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: अमेरिका की जमीन पर जिनपिंग के स्वागत में क्या-क्या होगा? जवाब: शी जिनपिंग 11 साल बाद अमेरिका पहुंचे हैं। भारतीय समय के मुताबिक 23-24 सितंबर की रात 2:30 बजे उनका विमान वॉशिंगटन डीसी के जॉइंट बेस एंड्रयूज पर लैंड हुआ। सवाल-2: आखिर जिनपिंग को इतनी तवज्जो क्यों दे रहे ट्रम्प, बदले में क्या चाहिए? जवाब: अमेरिका में दशकों पुरानी परंपरा रही है कि विदेशी नेता राष्ट्रपति से मिलने व्हाइट हाउस आते हैं, व्हाइट हाउस उनके स्वागत के लिए एयरपोर्ट नहीं जाता। ट्रम्प का प्रोटोकॉल तोड़ना सिर्फ शिष्टाचार नहीं, चीन की अहमियत का कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है। इसकी वजह मोटे-तौर पर 4 मांगों में छिपी है… 1. चीन रेयर अर्थ मिनरल्स की सप्लाई बनाए रखे 2. चाकू, बेलन, नोटबुक का कारोबार टैरिफ-फ्री हो 3. बड़ी डील की घोषणा, जिससे मिड-टर्म चुनावों में माहौल बने 4. चीन के साथ ‘AI हॉटलाइन’ बने, ताकि ये बेलगाम न हो अमेरिकी थिंकटैंक सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में चीनी कारोबार के एक्सपर्ट स्कॉट कैनेडी के मुताबिक, ‘ट्रम्प प्रशासन को उम्मीद थी कि टैरिफ के एकतरफा भारी दबाव से चीन झुक जाएगा। ऐसा नहीं हुआ। चीन का निर्यात इस साल 28% बढ़ा है। इसलिए मोलभाव में शी की स्थिति ट्रम्प से मजबूत दिख रही है।’ सवाल-3: जिनपिंग अमेरिका से क्या हासिल करने की कोशिश करेंगे? जवाब: अमेरिकी टैरिफ के बावजूद लगातार दूसरे साल चीन का ट्रेड सरप्लस 1 ट्रिलियन डॉलर पार कर सकता है। यानी चीन ने जितना सामान दूसरे देशों से खरीदा उससे कहीं ज्यादा उन्हें बेचा है। साफ है कि चीन व्यापार के लिए सिर्फ अमेरिका पर निर्भर नहीं है। ऐसे में अमेरिकी दौरे से जिनपिंग 3 चीजें साधना चाहते हैं… 1. अमेरिका ताइवान की आजादी का विरोध करे 2. रेयर अर्थ मिनरल्स के एवज में ज्यादा टैरिफ छूट मिले 3. जिनपिंग का भव्य स्वागत, जिससे चीन में छवि मजबूत हो सवाल-4: क्या इस दौरे से भारत और दुनिया पर कोई बड़ा असर पड़ेगा? जवाब: एशियाई और यूरोपीय देशों को डर है कि अगर अमेरिका और चीन साथ आ गए तो ये वर्ल्ड ऑर्डर, यानी दुनिया के नियम खुद तय करेंगे। AI के क्षेत्र में अमेरिका और चीन ही सबसे तेजी से काम कर रहे हैं। दोनों नेताओं की मीटिंग के बाद पूरी दुनिया में AI को नियंत्रित करने का सिस्टम तैयार हो सकता है। ईरान जंग शुरू होने के बाद से तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। अगर चीन की मध्यस्थता से अमेरिका ईरान जंग से बाहर निकल पाए और होर्मुज स्ट्रेट के कंट्रोल पर सहमति बन जाए, तो ग्लोबल ऑइल सप्लाई फिर पटरी पर आ सकती है। अमेरिका और चीन में ट्रेड वॉर की वजह से विदेशी कंपनियों के फैक्ट्री लगाने के लिए भारत विकल्प बनकर उभरा था। अमेरिका-चीन की सुलह से भारत के हाथ से यह मौका निकल सकता है। ब्रिगेडियर अनिल रमन (रि.) के मुताबिक, 'एशिया-पैसेफिक क्षेत्र में चीन को मैनेज करने के लिए अमेरिका भारत से अच्छे रिश्ते बनाकर रखता था। अगर अब अमेरिका-चीन आपस में ही अपने रिश्ते संभालने लगेंगे, तो अमेरिका को भारत की जरूरत कम होगी। लेकिन अगर चीन-अमेरिका में सहमति नहीं बन पाती है, तो अमेरिका के लिए भारत की जरूरत बढ़ जाएगी।' अमेरिका ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने वाला बिल पास हो गया है। अगर रेयर अर्थ मिनरल्स के बदले अमेरिका चीन को रूसी तेल खरीदने की ढील देता है, तो भारत पर अमेरिका को ऐसा कोई ऑफर देने का दबाव बढ़ेगा, जिससे उसे भी रियायत मिले। ---------- ये खबर भी पढ़िए… खामेनेई को घर में मारा, अब ईरानी राष्ट्रपति को वीजा:अमेरिका के दुश्मनों को भी न्यूयॉर्क आकर खिलाफ बोलने की छूट क्यों; 5 किस्से ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान न्यूयॉर्क पहुंच गए हैं। वे हर साल होने वाले यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली (UNGA) में आज भाषण देंगे। उनके साथ विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी होंगे। इन नेताओं को अपना दुश्मन मानने वाले अमेरिका ने ही इन्हें वीजा दिया है। पूरी खबर पढ़िए..
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 










