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नेपाल चुनाव से पहले सोशल मीडिया विज्ञापनों पर राजनीतिक दलों का बढ़ता खर्च

नई दिल्ली, 22 जनवरी (आईएएनएस)। नेपाल में 5 मार्च को होने वाले आम चुनाव से पहले राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों ने सोशल मीडिया को अपना प्रमुख प्रचार माध्यम बना लिया है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, थ्रेड्स और मैसेंजर जैसे प्लेटफॉर्म पर राजनीतिक विज्ञापनों पर खर्च में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

नेपाल के अखबार काठमांडू पोस्ट के अनुसार, 20 अक्टूबर से 11 जनवरी के बीच उपलब्ध आंकड़ों में राष्ट्रीय परिवर्तन पार्टी (राष्ट्रीय परिवर्तन पार्टी) ने फेसबुक विज्ञापनों पर सबसे ज्यादा खर्च किया। 15 जनवरी को उज्यालो नेपाल के साथ विलय के बाद पार्टी ने अपने मुख्य पेज, ‘जेन–जी यूनाइटेड मूवमेंट’ नामक पेज और विभिन्न जिला इकाइयों के पेजों के जरिए प्रचार किया।

इस अवधि में गतिशील लोकतांत्रिक पार्टी भी शीर्ष खर्च करने वालों में शामिल रही। पार्टी के कई पेज और जिला इकाइयों ने लगातार प्रायोजित पोस्ट चलाईं। रिपोर्ट के अनुसार, संख्या के लिहाज से इस पार्टी के मुख्य फेसबुक पेज से बीते तीन महीनों में कुल 39 प्रायोजित पोस्ट की गईं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि नवंबर 2025 में गठित राष्ट्रीय परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष राजेश पोर्टेल, जिन्होंने जेन-जी आंदोलन के दौरान एक पैर खो दिया था, की अगुवाई वाली पार्टी ने पिछले तीन महीनों में अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर 1,199 अमेरिकी डॉलर खर्च किए। पार्टी की ओखलढुंगा इकाई ने 240 डॉलर, जेन–जी यूनाइटेड पेज ने 427 डॉलर और पंचथर इकाई ने 100 डॉलर खर्च किए। कुल मिलाकर पार्टी का खर्च करीब 2,360 डॉलर रहा।

रिपोर्ट के अनुसार, इन तीन महीनों के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि “राजनीतिक दल और उम्मीदवार जमकर खर्च कर रहे हैं, जिससे पारदर्शिता और लक्षित प्रचार को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।”

तकनीक विशेषज्ञ डोवन ने काठमांडू पोस्ट से कहा कि सोशल मीडिया ने चुनावी पहुंच को लोकतांत्रिक बनाया है और कम लागत में व्यापक जनसमर्थन तक पहुंच संभव की है, लेकिन “डिजिटल अभियानों में नैतिक और अनैतिक दोनों तरह की प्रवृत्तियां देखने को मिलती हैं।”

अन्य संगठनों में, गतिशील लोकतांत्रिक पार्टी इस अवधि में 39 विज्ञापनों पर 1,116 डॉलर खर्च कर दूसरे स्थान पर रही। बुद्ध एयर के मालिक और पार्टी के संस्थापक बीरेंद्र बहादुर बस्नेत ने भी चुनावी प्रचार के लिए पार्टी के आधिकारिक पेज के साथ-साथ अपने सचिवालय पेज का इस्तेमाल किया।

वहीं, उज्यालो नेपाल के संस्थापक सदस्य गुरंग ने भी डिजिटल प्रचार में सक्रिय निवेश किया। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने 11 विज्ञापनों पर 489 डॉलर खर्च किए। पिछले चुनावों में उन्होंने सोशल मीडिया पर लगभग 5,968 डॉलर खर्च किए थे और काठमांडू-5 सीट से 2,761 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे, जहां से वे इस बार भी उम्मीदवार हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि ‘सिटिज़न्स फॉर वोटिंग नेपाल’ नामक एक फेसबुक पेज, जो खुद को मतदाता साक्षरता बढ़ाने वाली गैर-पक्षपाती पहल बताता है, ने 21 से 23 नवंबर के बीच एक ही विज्ञापन पर 417 डॉलर खर्च किए। इस विज्ञापन में ऑनलाइन मतदाता पहचान पत्र पंजीकरण की प्रक्रिया को समझाया गया था।

इसी तरह, नेपाली कांग्रेस पार्टी से मोरंग-3 सीट से चुनाव लड़ रहे चिकित्सा उद्यमी सुनील कुमार शर्मा ने पिछले 90 दिनों में तीन विज्ञापनों पर 289 डॉलर खर्च किए। वहीं, ‘आरएसपी कवरेज युगेश’ नामक पेज ने 230 डॉलर खर्च किए, हालांकि इसका कंटेंट सामान्य पार्टी कवरेज के बजाय कुछ खास उम्मीदवारों के प्रचार पर केंद्रित नजर आया।

इसके अलावा, नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के नेता झलनाथ खनाल और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के अध्यक्ष राजेंद्र लिंगदेन के लिए भी फेसबुक विज्ञापन देखे गए।

--आईएएनएस

डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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पाकिस्तान में आईएसआई की निगरानी में एकजुट हो रहे जिहादी और सांप्रदायिक आतंकी गुट: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 22 जनवरी (आईएएनएस)। एक रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत के बीच बढ़ता तालमेल पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) की रणनीतिक साजिश को दर्शाता है। हालिया घटनाक्रम में इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत के समन्वयक मीर शफीक मंगल द्वारा लश्कर-ए-तैयबा के नेता राना मोहम्मद अशफाक को हथियार भेंट करना इस साझेदारी का प्रतीक माना जा रहा है, जो आईएसआई की निगरानी में जिहादी और सांप्रदायिक गुटों को एक मंच पर ला रही है।

इंडिया नैरेटिव में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की “डीप स्टेट” ने आतंकवाद को केवल सहन ही नहीं किया, बल्कि उसे राज्य नीति का सुनियोजित औजार बना लिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आईएसआई इस पूरे तंत्र की केंद्रबिंदु है, जो केवल आतंकी संगठनों को संरक्षण नहीं देती, बल्कि लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत और हमास जैसे संगठनों को जोड़कर एक तरह का “अपवित्र गठबंधन” तैयार कर रही है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद, जिसमें मुरिदके स्थित लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय को गंभीर नुकसान पहुंचा और इन संगठनों के आपसी संबंध उजागर हुए, आईएसआई ने अपने प्रयास और तेज कर दिए। आईएसआई ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद को अलग-अलग काम करने के बजाय एक “पैक” के रूप में साथ मिलकर काम करने का निर्देश दिया। हालात ऐसे हैं कि पाकिस्तानी सेना के अधिकारी खुले तौर पर आतंकियों के जनाजों में शामिल होते देखे जा रहे हैं, वहीं राजनेता लश्कर-ए-तैयबा के उपनेता सैफुल्लाह कसूरी के साथ मंच साझा कर रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ नेता रऊफ ने परेड के दौरान राज्य के संरक्षण में जिहाद के लिए भर्ती को आसान बताया, जहां हाफिज सईद के बेटे तल्हा सईद की भी मौजूदगी रही।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आईएसआई से जुड़े इस नेटवर्क में लश्कर-ए-तैयबा की शहरी लॉजिस्टिक्स और ऑपरेटिव क्षमताओं को जैश-ए-मोहम्मद की आत्मघाती हमलों की क्षमता के साथ जोड़ा गया है, जिसे हमास से मिलने वाले सामरिक सहयोग से और मजबूती मिली है। इस गठजोड़ का उद्देश्य भारत के खिलाफ लंबे समय तक हिंसा की रणनीति को आगे बढ़ाना है।

हालांकि रिपोर्ट में यह भी जोर दिया गया है कि अत्याधुनिक तकनीक से लैस भारतीय सुरक्षा बल इस नई चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ड्रोन जैमर, एंटी-ड्रोन स्वार्म और लेजर काउंटरमेजर्स आईईडी गिराने जैसी साजिशों को नाकाम करने के लिए तैनात हैं। इसके साथ ही, सटीक तोपखाने, मानव प्रदर्शन बढ़ाने वाले एक्सो-सूट और पैरा स्पेशल फोर्सेज की त्वरित प्रतिक्रिया इकाइयां हाइब्रिड फिदायीन हमलों और शहरी घेराबंदी जैसी स्थितियों से निपटने को तैयार हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर सेंसर ग्रिड और रणनीतिक हेलीकॉप्टर पैड त्वरित कार्रवाई को संभव बनाते हैं, जबकि साइबर यूनिट्स हवाला नेटवर्क और दुष्प्रचार अभियानों को बाधित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। भारतीय सशस्त्र बल जम्मू-कश्मीर में किसी भी प्रकार के हवाई समर्थन को रोकने के लिए आसमान की निगरानी कर रहे हैं और विदेशी खुफिया सूचनाओं के संभावित दुरुपयोग से भी सतर्क हैं।

--आईएएनएस

डीएससी

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