Samajwadi Party कार्यालय में Ram Govind Chaudhary को Akhilesh Yadav ने दी श्रद्धांजलि
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार को विधानसभा के आठ बार सदस्य रहे दिवंगत राम गोविंद चौधरी को अपनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वह सामाजिक न्याय के पुरोधा के रूप में जीवन भर संघर्षरत रहे और उन्होंने जनपक्ष को हमेशा सबसे पहले और ऊपर रखा। सपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नेता विरोधी दल (2017-2022) राम गोविंद चौधरी के निधन पर पार्टी प्रदेश मुख्यालय में शनिवार को एक शोक सभा हुई। यादव ने चौधरी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
सपा के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री राम गोविंद चौधरी का शुक्रवार रात लखनऊ स्थित संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में उपचार के दौरान निधन हो गया। वह करीब 74 वर्ष के थे। सपा के मुख्य प्रवक्ता एवं पूर्व मंत्री राजेंद्र चौधरी ने बताया कि आज पार्टी प्रदेश मुख्यालय में दिवंगत नेता के लिए शोक प्रस्ताव रखा गया।
उपस्थित सभी नेताओं, कार्यकर्ताओं ने रामगोविन्द चौधरी के निधन पर गहरा शोक जताते हुए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। पार्टी की ओर से जारी एक बयान के अनुसार इस मौके पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, ‘‘अब हमारे बीच महान समाजवादी प्रकाश-स्तंभ राम गोविंद चौधरी जी नहीं रहे, जिन्होंने महान स्वतंत्रता सेनानी एवं समाजवादी मार्गदर्शक जय प्रकाश नारायण जी और भूतपूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी की अगुवाई में समाजवादी मूल्यों, सिद्धांतों और लक्ष्यों की मशाल सदैव प्रज्वलित रखी।’’ यादव ने उनके कार्यों को स्मरण करते हुए कहा कि बलिया की क्रांतिकारी धरती से उठकर छात्र राजनीति के कठिन मार्ग से होते हुए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तक उनकी आवाज और अकाट्य तर्कों का सदैव सम्मान हुआ। सपा प्रमुख ने कहा, ‘‘विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने तब भी अपनी आवाज बुलंद रखी जब सदन में हमारे 50 विधायक भी नहीं थे।
जब वह बोलते थे तो सदन उन्हें बड़ी शांति और शिद्दत के साथ सुनता था।’’ बलिया जिले के सिकंदरपुर क्षेत्र के एक गांव में नौ जुलाई 1953 को जन्मे राम गोविंद चौधरी ने इसी जिले की चिलकहर और बांसडीह सीट का 1977 से 2022 के बीच विधानसभा में आठ बार प्रतिनिधित्व किया। वह मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के नेतृत्व की सरकारों में मंत्री भी रहे। इसके पहले 1972 में वह बलिया के टाउन कॉलेज छात्रसंघ के महामंत्री और 1974 में अध्यक्ष निर्वाचित हुए।
आपातकाल के दौरान उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया और जनपद छात्र युवा वाहिनी के सह-संयोजक रहे।
SIR को लेकर दिल्ली-महाराष्ट्र में चुनाव आयोग ने लिया बड़ा फैसला, किया ये बदलाव
भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने शनिवार को वोटर लिस्ट के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) को बेहतर बनाने के लिए कई उपायों की घोषणा की। इनमें नोटिस पाने वाले वोटर्स के लिए घर-घर जाकर वेरिफिकेशन, ऑनलाइन सुनवाई का ज़्यादा इस्तेमाल और कमज़ोर वर्गों के लिए खास मदद शामिल है। आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दर्ज करने की समय-सीमा भी बढ़ा दी है, जिससे वोटर्स को अपनी चिंताएं बताने या लिस्ट में सुधार की मांग करने के लिए ज़्यादा समय मिल सके। ECI ने एक बयान में कहा संशोधित SIR प्रक्रिया के तहत, जिन वोटर्स को नोटिस मिले हैं क्योंकि उन्हें अनमैप्ड माना गया है या उनमें लॉजिकल कमियां पाई गई हैं। उन्हें आम तौर पर इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) या असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (AERO) के सामने पेश होने की ज़रूरत नहीं होगी। आयोग ने बताया कि यह फ़ैसला 26 सितंबर, 2026 को हुई बैठक के बाद लिया गया और इसे पूरे आयोग ने मंज़ूरी दी। इसके बजाय, बूथ लेवल ऑफिसर (BLOs) ऐसे वोटरों के घर जाकर ज़रूरी दस्तावेज़ इकट्ठा करेंगे और उन्हें ERO द्वारा विचार किए जाने के लिए ECINET पोर्टल पर अपलोड करेंगे। आयोग ने कहा कि इससे वोटरों को चुनाव कार्यालय जाने की ज़रूरत कम हो जाएगी।
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ECI ने कहा कि सुनवाई सिर्फ़ ERO द्वारा तय किए गए खास मामलों में ही होगी और प्राथमिकता के तौर पर इसे ऑनलाइन किया जाएगा। अगर सुनवाई की ज़रूरत पड़ती है, तो वोटर के परिवार का कोई बालिग सदस्य वोटर की तरफ़ से पेश होने के लिए अधिकृत किया जा सकता है। अधिकारियों को ऑनलाइन सुनवाई के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं। ECI ने ज़िला चुनाव अधिकारियों (DEOs) से कहा कि वे स्थानीय ज़रूरतों के हिसाब से ज़रूरी हेल्प डेस्क बनाएँ और स्पेशल कैंप लगाएँ। ये कैंप नाइट शेल्टर में रहने वाले लोगों, मज़दूरों, आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों, बेघर लोगों और उन अन्य लोगों की मदद के लिए होंगे जिन्हें वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने या सुधार करवाने की प्रक्रिया में मुश्किल हो सकती है।
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गोवा में उठाए गए कदमों का ज़िक्र करते हुए ECI ने कहा गोवा के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) ने BLOs को निर्देश दिया है कि वे वोटर लिस्ट से छूटे हुए वोटरों के घर-घर जाकर उनसे फ़ॉर्म भरवाएँ।" आयोग के अनुसार, ऐसे 97 वोटरों में से 81 ने वोटर लिस्ट में नाम शामिल करवाने के लिए पहले ही फ़ॉर्म 6 जमा कर दिया है। SIR को कंट्रोल करने वाले कानूनी ढांचे पर, कमीशन ने कहा कि इस प्रक्रिया के लिए फॉर्म 6 के साथ जुड़ी घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है। कमीशन ने कहा, "SIR के दायरे से बाहर की अवधि के लिए, आवेदन 'रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960' के तहत प्रोसेस किए जाते रहेंगे। ECI ने अपने ECINET सिस्टम की समीक्षा करने की भी घोषणा की। उसने कहा कि फील्ड अधिकारियों को अभी उनके कानूनी अधिकारों के अनुसार प्लेटफॉर्म का रोल-बेस्ड एक्सेस (भूमिका-आधारित पहुंच) मिला हुआ है।
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