SIR से 93 लाख नाम हटाकर BJP की मदद का आरोप, Mamata Banerjee ने CEC से मांगा इस्तीफा
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग (ईसी) ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के जरिये वैध मतदाताओं के नाम हटाकर राज्य विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत में मदद की। उन्होंने राज्य पुलिस पर मुर्शिदाबाद की अल्पसंख्यक बहुल रेजीनगर विधानसभा सीट पर छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले सत्तारूढ़ भाजपा के इशारे पर काम करने का भी आरोप लगाया। मई में विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की हार के बाद राज्य की राजधानी कोलकाता के बाहर अपनी पहली जनसभा के तहत हुगली जिले के श्रीरामपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख बनर्जी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा और हालिया खबर का स्पष्ट संदर्भ देते हुए कहा कि “भाजपा ने निर्वाचन आयोग का किस तरह इस्तेमाल किया, इसका सच अब सामने आ चुका है।
उन्होंने कहा कि जब तक कुमार इस्तीफा नहीं देते, तब तक देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन जारी रहेंगे। मतदाता सूची से मतदाताओं के नाम व्यवस्थित रूप से हटाए जाने का आरोप लगाते हुए बनर्जी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के नाम पर तंज कसते हुए कहा, “वैनिश (ज्ञानेश) कुमार को जाना ही होगा। जब तक वह इस्तीफा नहीं देते, हमारा आंदोलन जारी रहेगा।” उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के दौरान लगभग 93 लाख नाम या तो हटा दिए गए या विचाराधीन रखे गए।
बनर्जी ने आरोप लगाया कि इस कवायद का उद्देश्य राज्य पर कब्जा करने में भाजपा की मदद करना था। उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल में राज्य पर कब्जा करने के लिए एसआईआर कराया गया था। 93 लाख नाम या तो हटा दिए गए या उन्हें विचाराधीन रखा गया।” पूर्व मुख्यमंत्री ने पुलिस को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि उसका काम लोगों की सुरक्षा करना है, न कि उन्हें राजनीतिक बैठकों में शामिल होने से रोकना।
उन्होंने कहा, “पुलिस मेरी दुश्मन नहीं है। उसका काम लोगों की रक्षा करना है। लेकिन आज वह क्या कर रही है?” उन्होंने आरोप लगाया कि श्रीरामपुर में टीएमसी समर्थकों को शुक्रवार रात उनके घरों से उठा लिया गया ताकि उन्हें उनकी (बनर्जी) सभा में आने से रोका जा सके।
रेजीनगर में उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस “भाजपा के इशारे पर काम कर रही है” और अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों से उनके मतदाता पहचान पत्र छीन रही है।
Gujarat CID ने चुनावी चंदे में 314 करोड़ की कर चोरी पर तीन दलों पर दर्ज की FIR
गुजरात सीआईडी-अपराध ने शनिवार को तीन तथाकथित राजनीतिक संगठनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। इन पर वित्त वर्ष 2022 से 2025 के बीच कथित तौर पर ‘चुनावी चंदा घोटाले’ के जरिये सरकारी खजाने को 314 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। राज्य के अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने आणंद स्थित स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी (एसएपी), अहमदाबाद स्थित सत्यवादी रक्षक पार्टी (एसआरपी) और गरीब कल्याण पार्टी (जीकेपी) के खिलाफ अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं।
इन दलों ने कथित तौर पर करदाताओं से चंदा लिया और अपना कमीशन काटने के बाद बाकी रकम वापस कर दी। चूंकि राजनीतिक दलों को दिए गए चंदे पर आयकर से छूट होती है, इसलिए दानदाता स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) के बदले मिली रसीद दिखाकर कर में छूट का दावा कर सकते थे। सीआईडी अधिकारियों ने बताया कि ये प्राथमिकी आयकर विभाग की शिकायत पर दर्ज की गई हैं।
तीनों दलों के पदाधिकारियों के अलावा कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) को भी आरोपी बनाया गया है। सीआईडी अधिकारियों का दावा है कि तीनों दलों के आरोपी पदाधिकारियों ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उन्होंने कर चोरी में मदद करके कमीशन कमाने के उद्देश्य से ही इन दलों का गठन किया था। मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
आयकर विभाग की शिकायत के अनुसार, एसएपी, उसके पदाधिकारी, एक कर सलाहकार और एक सीए 519 करोड़ रुपये के फर्जी चंदे और 155 करोड़ रुपये की कर चोरी से जुड़े मामले में शामिल हैं। एक अन्य प्राथमिकी में अहमदाबाद स्थित जीकेपी के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष समेत नौ लोगों तथा तीन चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) को 62 करोड़ रुपये की कर चोरी में संलिप्तता को लेकर नामजद किया गया है। तीसरी प्राथमिकी एसआरपी के तीन पदाधिकारियों और एक कॉस्ट मैनेजमेंट अकाउंटेंट के खिलाफ दर्ज की गई है।
उन पर 124.5 करोड़ रुपये के वित्तीय नुकसान की साजिश रचने का आरोप है। प्राथमिकी के अनुसार, तीनों दलों के बैंक खातों में चंदा जमा किया गया। इसके बाद फर्जी खरीद या खर्च दिखाकर नकली बिल के आधार पर धनराशि निकाली गई।
प्राथमिकी के अनुसार, इसके बाद दल अपना कमीशन काटकर बाकी नकद राशि दानदाताओं को वापस कर देते थे। प्राथमिकी में कहा गया है कि इन दलों ने कथित तौर पर मिलीभगत करके निर्वाचन आयोग को झूठी योगदान रिपोर्ट सौंपी, जिससे उन्हें मिले चंदे की 30 प्रतिशत राशि के बराबर वित्तीय नुकसान सरकारी खजाने को हुआ। आरोपी सीए ने कथित तौर पर इन संस्थाओं और कुछ मुखौटा कंपनियों के खातों के लिए फर्जी ऑडिट रिपोर्ट तैयार की।
सीआईडी अधिकारियों ने बताया कि मामले की आगे की जांच जारी है।
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