तकनीक और नवाचार के दम पर भारत 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर हासिल कर सकता है: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
चेन्नई, 26 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि यदि भारत विभिन्न क्षेत्रों में तकनीक और नवाचार को व्यापक रूप से अपनाता है, तो देश वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में 10 प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि दर भी हासिल कर सकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार, उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों और समाज सहित सभी हितधारकों को मिलकर अधिक प्रयास करने होंगे।
आईआईटी मद्रास एलुमनाई एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक फायरसाइड चैट में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के सामने अपार अवसर हैं, लेकिन इसके लिए सकारात्मक सोच और सामूहिक भागीदारी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि देश में ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो भारत की असफलता में संतोष महसूस करते हैं, लेकिन विकसित राष्ट्र बनने की यात्रा में इस मानसिकता को बदलना होगा और अधिक लोगों को सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करना होगा।
निर्मला सीतारमण ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की सराहना करते हुए कहा कि तकनीकी हस्तक्षेपों ने कृषि सहित कई क्षेत्रों में बड़ा बदलाव लाया है। उन्होंने बताया कि तकनीक ने किसानों को बाजारों से बेहतर तरीके से जोड़ने, उत्पादकता बढ़ाने और खेती से जुड़ी सूचनाओं तक आसान पहुंच बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कृषि क्षेत्र में ड्रोन और एरियल जियोस्पेशियल उपकरणों के बढ़ते उपयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि इन तकनीकों ने भूमि की सटीक मैपिंग और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में किसानों को नई क्षमता प्रदान की है। इससे कृषि गतिविधियां अधिक वैज्ञानिक और दक्ष बन रही हैं।
वित्त मंत्री ने उर्वरक वितरण में प्वाइंट-ऑफ-सेल (पीओएस) मशीनों के उपयोग का भी उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि परीक्षण परियोजनाओं के दौरान यह प्रणाली किसानों, उनकी भूमि और फसल से संबंधित जानकारी दर्ज करती है तथा मिट्टी, सिंचाई और फसल की स्थिति के आधार पर आवश्यक उर्वरक की मात्रा के बारे में भी सुझाव प्रदान करती है। इससे उर्वरकों के अधिक संतुलित उपयोग को बढ़ावा मिल रहा है।
कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री ने कैशलेस नेशन: हाउ यूपीआई चेंज्ड एव्रीथिंग नामक पुस्तक का भी विमोचन किया। डॉ. संतनु पॉल और बी. संबामूर्ति द्वारा लिखी गई यह पुस्तक भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) की अवधारणा और उसके तेजी से हुए विस्तार की कहानी को प्रस्तुत करती है।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत का यूपीआई अब वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है और यह 11 देशों में संचालित हो रहा है। उन्होंने कहा कि फ्रांस, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, ग्रीस और मॉरीशस जैसे देशों तक इसकी पहुंच बढ़ी है। उन्होंने बताया कि यूपीआई केवल भारत में निर्बाध भुगतान का माध्यम नहीं रहा, बल्कि यह देश के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना मॉडल को दुनिया तक पहुंचाने का भी एक सशक्त उदाहरण बन गया है।
वित्त मंत्री ने बताया कि वर्ष 2018 के बाद से यूपीआई-आधारित भुगतान केंद्रों की संख्या लगभग 260 गुना बढ़ी है, जिससे डिजिटल भुगतान देश के दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंचा है और आम लोगों के लिए लेनदेन को अधिक सुविधाजनक बनाया है।
उन्होंने यूपीआई के वैश्विक महत्व पर जोर देते हुए कहा कि दुनिया में होने वाले हर दो रियल-टाइम डिजिटल भुगतान में से एक भुगतान भारत में होता है। उनके अनुसार यह भारत की डिजिटल क्षमता, नवाचार और बड़े पैमाने पर तकनीक अपनाने की सफलता को दर्शाता है।
वित्त मंत्री का मानना है कि स्टार्टअप नवाचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल भुगतान, आधुनिक कृषि तकनीक और उभरती प्रौद्योगिकियों का व्यापक उपयोग भारत को उच्च विकास दर हासिल करने में मदद कर सकता है। उन्होंने कहा कि यदि देश तकनीक-आधारित विकास मॉडल को और गहराई से अपनाता है, तो विकसित भारत 2047 का लक्ष्य हासिल करना पूरी तरह संभव है।
--आईएएनएस
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Gujarat: 238 गांवों के आदिवासी युवाओं के लिए पहला साइंस कॉलेज, बच्चों की हार्ट सर्जरी से बदल रही दक्षिण गुजरात की तस्वीर
दक्षिण गुजरात के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में श्रीमद राजचंद्र मिशन धरमपुर की कई पहलें सामने आई हैं. इन प्रयासों के केंद्र में पूज्य गुरुदेवश्री राकेशजी की वह सोच है, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में ही बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है.
धरमपुर क्षेत्र में स्थापित श्रीमद राजचंद्र विद्यापीठ को 238 गांवों के लिए पहला साइंस कॉलेज बताया गया है. इसका उद्देश्य आदिवासी युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए बड़े शहरों का रुख करने की जरूरत कम करना है. कॉलेज में विज्ञान से जुड़े कई स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित होते हैं. इनमें B.Sc. के साथ केमिस्ट्री और माइक्रोबायोलॉजी में M.Sc. तथा मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी से जुड़े पाठ्यक्रम शामिल हैं.
शिक्षा के साथ स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी मिशन की गतिविधियां ग्रामीण आबादी तक पहुंच रही हैं. श्रीमद राजचंद्र हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर 250 बेड का मल्टी-स्पेशियलिटी चैरिटेबल अस्पताल है, जहां ग्रामीण और जरूरतमंद मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं. अस्पताल में कार्डियोलॉजी, पीडियाट्रिक्स, ऑर्थोपेडिक्स और ऑन्कोलॉजी समेत कई विशेषज्ञ सेवाएं मौजूद हैं.
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, आदिवासी बच्चों के लिए हार्ट सर्जरी और चिकित्सा सहायता भी इस सामाजिक पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को गंभीर हृदय संबंधी बीमारियों के इलाज तक पहुंच उपलब्ध कराना है.
शिक्षा से रोजगार तक का प्रयास
मिशन की पहल केवल स्कूल और कॉलेज तक सीमित नहीं है. महिलाओं के कौशल विकास और रोजगार के लिए श्रीमद राजचंद्र सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर विमेन के माध्यम से प्रशिक्षण और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है. ‘राज उपहार’ से जुड़े स्थानीय हस्तशिल्प उत्पादों को 26 देशों तक पहुंचाए जाने की जानकारी भी दी गई है.
इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के लिए नए सैटेलाइट सेंटर भी स्थापित किए गए हैं. मिशन का आगामी श्रीमद राजचंद्र सर्वमंगल विश्वविद्यालय भी बहुविषयक उच्च शिक्षा और शोध के अवसरों को ग्रामीण क्षेत्र तक पहुंचाने की योजना का हिस्सा है. इस तरह दक्षिण गुजरात में शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और ग्रामीण आजीविका को जोड़कर एक ऐसा मॉडल विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें स्थानीय स्तर पर ही लोगों को आगे बढ़ने के अवसर मिल सकें.
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