'हनीमून से मनी-मून' तक, ममता बनर्जी ने सुवेंदु सरकार को घेरा, सीईसी ज्ञानेश कुमार को कहा 'वैनिश कुमार'
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 'वैनिश कुमार' करार दिया. ममता का आरोप है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर के जरिए 92 लाख वैध वोटरों के नाम मतदाता सूची से गायब कर दिए गए. उन्होंने बीजेपी के शासन को 'मनी-मून पीरियड' बताते हुए जमीनी और कानूनी लड़ाई लड़ने का खुला ऐलान किया है.
EC High-Level Meeting: SIR में जिनका नाम छूटा, अधिकारी खुद उनके घर जाकर लेंगे दस्तावेज; जानें 5 बड़े फैसले
देश भर में स्पेशल इंटेंसिव रीविजन (SIR) यानी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर चल रहे भारी विवाद के बीच शनिवार को दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के मुख्यालय में एक अहम बैठक आयोजित की गई।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्त- डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी इस बैठक में शामिल हुए। आयोग ने इस दौरान कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं, जिससे प्रक्रिया को आसान बनाने और जनता की शिकायतों का समाधान करने का प्रयास किया जा रहा है।
चुनाव आयोग के 5 बड़े फैसले और राहत निम्नलिखित हैं:
नोटिस पाने वालों को घर बैठे राहत: एसआईआर (SIR) में जिन मतदाताओं को नोटिस मिला है, बीएलओ खुद उनके घर जाकर दस्तावेज लेंगे। इससे मतदाताओं को दफ्तरों के चक्कर काटने की मजबूरी नहीं होगी और जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन सुनवाई की जाएगी।
वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने का मौका: जिन नागरिकों का नाम सूची में छूट गया है या जो नए युवा मतदाता हैं, वे ईआरओ (ERO) के पास आवेदन देकर इस विशेष अभियान के तहत अपना नाम दोबारा जुड़वा सकेंगे।
बेघर और कमजोर वर्ग के लिए कैंप: रैन बसेरों, मजदूरों और बेघर लोगों के सुगमतापूर्वक मतदाता पंजीकरण के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) विशेष हेल्प डेस्क और कैंप लगाएंगे।
दिल्ली और महाराष्ट्र में तारीख बढ़ाई गई: दिल्ली और महाराष्ट्र में क्लेम और ऑब्जेक्शन दाखिल करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 30 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। इसके साथ ही दिल्ली में विवाद का निपटारा 30 नवंबर और महाराष्ट्र में 10 नवंबर तक करना तय किया गया है।
गोवा के छूटे मतदाताओं के लिए घर-घर प्रक्रिया: गोवा में जांच के दौरान योग्य पाए गए जिन वोटर्स के नाम सॉफ्टवेयर की समस्या के कारण अंतिम सूची में नहीं जुड़ सके थे, वहां ब्लॉक अफसर घर-घर जाकर फॉर्म-6 कलेक्ट करेंगे।
आंतरिक मतभेद और चुनाव आयुक्तों के सवाल
मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से सामने आया है कि पिछले 10 महीनों के दौरान दोनों चुनाव आयुक्तों ने आयोग के कई फैसलों पर करीब 14 बार आपत्तियां जताई हैं। फॉर्म-6 में बदलाव, वोटर डेटा के नियंत्रण, पश्चिम बंगाल की 16 लाख अपीलों और गोवा में सॉफ्टवेयर की तकनीकी समस्या के कारण 97 योग्य वोटर्स के अंतिम सूची में न जुड़ पाने जैसे गंभीर मुद्दों पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, आयोग का यह पक्ष रहा है कि बहुसदस्यीय संस्था में अलग-अलग विचार आना एक सामान्य प्रक्रिया है।
राजनीतिक विरोध और कांग्रेस का प्रदर्शन
एसआईआर प्रक्रिया और चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस ने आक्रामक रुख अपनाया हुआ है। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर मनमानी करने और अन्य आयुक्तों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए देश भर में जोरदार प्रदर्शन किया है।
विपक्षी दलों की मांग है कि ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाया जाए। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में सरगर्मी काफी बढ़ गई है।
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