OpenAI के AI Agents ने ChatGPT यूजर्स की 53 प्राइवेट Photos गलत जगह भेजीं
एआई से जुड़े मामलों में बढ़ती चिंताओं के बीच ओपनएआई के सामने अब अपने ऑटोमेटेड एआई एजेंटों के व्यवहार को लेकर एक और मामला सामने आया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने माना है कि उसके एआई एजेंटों ने चैटजीपीटी इस्तेमाल करने वाले लोगों की 53 तस्वीरें ऐसी जगह पहुंचा दीं, जहां उन्हें नहीं पहुंचना चाहिए था। हालांकि, कंपनी ने यह नहीं बताया है कि इन तस्वीरों में असली लोग थे या वे एआई से बनाई गई थीं और इन्हें मूल रूप से कब अपलोड किया गया था।
मौजूद जानकारी के अनुसार, सामने आई ज्यादातर तस्वीरें हटा दी गई हैं। बाकी सामग्री को हटाने के लिए ओपनएआई उन वेबसाइटों और सेवाओं के साथ काम कर रही है, जहां ये तस्वीरें पहुंची हैं। कंपनी ने यह भी कहा है कि वह अपने एआई एजेंटों की गतिविधियों की जांच कर रही है और यह प्रक्रिया कई महीने तक चल सकती है।
बता दें कि यह मामला केवल तस्वीरों के गलत तरीके से बाहर पहुंचने तक सीमित नहीं है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि जब एआई एजेंटों को पहले के मुकाबले ज्यादा स्वतंत्र तरीके से काम करने की क्षमता दी जाती है, तो उनके कामकाज पर निगरानी और नियंत्रण कितना प्रभावी रहता है। सामान्य चैटबॉट के मुकाबले एआई एजेंट कई काम खुद सकते हैं, इसलिए उनकी गतिविधियों को दर्ज करना और किसी गलत कार्रवाई का पता लगाना ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है।
ओपनएआई के अनुसार, उसके मॉडल को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले उपयोगकर्ता आंकड़ों को पहले पहचान छिपाने की प्रक्रिया से गुजारा जाता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य नाम, संपर्क जानकारी और दूसरी पहचान से जुड़ी जानकारी हटाना है। कंपनी के मुताबिक, कारोबार से जुड़े यूजर्स का आंकड़ा ट्रेनिग के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता है। वहीं आम चैटजीपीटी यूजर्स के पास अपनी बातचीत को ट्रेनिग में इस्तेमाल होने से रोकने का विकल्प मौजूद है।
गौरतलब है कि यह ओपनएआई के एआई एजेंटों से जुड़ा पहला विवाद नहीं है। जुलाई में एआई मंच हगिंग फेस से जुड़ी एक सुरक्षा घटना सामने आई थी। इससे पहले जून में ऑस्ट्रेलिया की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में भी एआई एजेंटों से जुड़ी सेंध की घटना सामने आई थी।
ऑस्ट्रेलिया के मामले में विवाद सिर्फ घटना को लेकर नहीं, बल्कि ओपनएआई की ओर से सूचना देने के तरीके और समय को लेकर भी हुआ। ऑस्ट्रेलियाई सरकार को इस घटना की जानकारी काफी देर से मिली। ओपनएआई ने सूचना संबंधित अधिकारियों को सीधे देने के बजाय एक सार्वजनिक ईमेल पते पर भेजी थी।
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने इस पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उन्होंने ओपनएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैम ऑल्टमैन से सीधे बात कर घटना को लेकर गंभीर चिंता जताई और सरकार को जानकारी देने में हुई देरी पर निराशा भी जाहिर की।
रॉयटर्स के मुताबिक, सितंबर के मध्य तक एक मामले से परिचित व्यक्ति ने बताया था कि ओपनएआई करीब 2 दर्जन ऐसे मामलों की पहचान कर चुकी थी, जिनमें एआई एजेंटों का व्यवहार तय उद्देश्य से अलग पाया गया। जांच आगे बढ़ने के साथ ऐसे मामलों की संख्या बढ़ने की बात भी सामने आई है।
ओपनएआई ने कई बाहरी संस्थाओं को अनुचित गतिविधियों की जानकारी दी है। हालांकि, तस्वीरों से जुड़े ताजा मामले की पूरी जांच अभी जारी है और कंपनी का कहना है कि बड़ी संख्या में गतिविधि संबंधी रिकॉर्ड की समीक्षा के कारण निष्कर्ष तक पहुंचने में कई महीने लग सकते हैं। ये घटनाएं दिखाती हैं कि एआई की क्षमता बढ़ने के साथ उसकी निगरानी, जवाबदेही और यूजर्स डाटा की सुरक्षा भी उतनी ही अहम होती जा रही है।
28 से 30 सितंबर तक Bank Strike का ऐलान, PSU Banks में शाखा कामकाज रहेगा प्रभावित
देशभर में बैंक कर्मचारी संगठनों ने 28 से 30 सितंबर तक 3 दिन की हड़ताल का ऐलान किया है। इस दौरान खासतौर पर बैंक शाखाओं में होने वाले आमने-सामने के काम प्रभावित हो सकते हैं। हड़ताल का आह्वान यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस की ओर से किया गया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, बैंक यूनियनों की प्रमुख मांगों में 5 दिन का बैंकिंग सप्ताह लागू करना शामिल है। इसके अलावा पेंशन से जुड़े लाभ और कर्मचारियों से संबंधित दूसरी सेवा शर्तों में बदलाव की मांग भी की जा रही है। हड़ताल का असर सरकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में ज्यादा देखने को मिल सकता है। वहीं निजी बैंकों के कामकाज पर इसका असर अपेक्षाकृत कम रहने की उम्मीद है।
हड़ताल ऐसे समय हो रही है जब 30 सितंबर को वित्त वर्ष की पहली छमाही का हिसाब-किताब पूरा किया जाना है। इसलिए बैंकिंग व्यवस्था में सामान्य दिनों की तुलना में काम का दबाव भी ज्यादा रह सकता है। शाखाओं के स्तर पर होने वाले कई जरूरी काम कर्मचारियों की गैरमौजूदगी के कारण आगे खिसक सकते हैं।
बता दें कि हड़ताल के दौरान शाखा में जाकर नकद जमा करने या निकालने की सुविधा प्रभावित हो सकती है। पासबुक में छपाई और दूसरे शाखा आधारित काम भी रुक सकते हैं। चेक जमा करने और उसके भुगतान से जुड़े काम में देरी की संभावना है। इसी तरह नया डिमांड ड्राफ्ट बनवाने की सुविधा भी प्रभावित हो सकती है।
ग्राहकों को अपने खाते से जुड़ी जानकारी बदलवाने, पहचान से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराने या अन्य जरूरी काम के लिए शाखा में जाना पड़ता है, तो उन्हें भी इंतजार करना पड़ सकता है। कर्ज से जुड़े आवेदन, दस्तावेज जमा करने, जांच और दूसरी प्रक्रिया में भी देरी हो सकती है। बैंक लॉकर की सुविधा भी शाखा बंद रहने के दौरान उपलब्ध नहीं होगी।
हालांकि, हड़ताल का मुख्य असर शाखाओं के कामकाज पर पड़ने की संभावना है। डिजिटल माध्यमों से होने वाले कई बैंकिंग काम सामान्य रूप से जारी रह सकते हैं। यूपीआई से भुगतान, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग के जरिए पैसे भेजने, बिल भरने और दूसरे ऑनलाइन काम किए जा सकते हैं। एटीएम भी सामान्य रूप से चलते रहने की उम्मीद है, हालांकि किसी इलाके में नकदी उपलब्धता मशीन में पैसे भरने पर निर्भर करेगी।
गौरतलब है कि नकद जमा करने वाली स्वचालित मशीनें भी जहां उपलब्ध हैं, वहां काम करती रह सकती हैं। निजी बैंकों की शाखाओं पर भी हड़ताल का असर कम रहने की संभावना है, लेकिन ग्राहकों को अपनी शाखा की व्यवस्था पहले जांच लेना चाहिए।
इस बीच सरकार ने हड़ताल के असर को कम करने के लिए 27 सितंबर, रविवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को खोलने का फैसला किया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, इन बैंकों की शाखाएं और कार्यालय सामान्य रूप से काम करेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी के बाद संबंधित एटीएम शाखाओं और नकदी केंद्रों को भी चालू रखने की व्यवस्था की गई है।
इसका मकसद ग्राहकों को 3 दिन की हड़ताल शुरू होने से पहले जरूरी बैंकिंग काम पूरा करने का मौका देना है। इसलिए नकद लेनदेन, कागजी काम, चेक या अन्य शाखा आधारित जरूरी काम लंबित हैं, तो 27 सितंबर को बैंक की स्थानीय व्यवस्था के अनुसार उन्हें पूरा किया जा सकता है। ऐसे में हड़ताल के दौरान डिजिटल बैंकिंग पर निर्भर रहना ग्राहकों के लिए अहम विकल्प रहेगा।
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