"जीरो सिविक सेंस...", वीडियो रिकॉर्डिंग में युवक के आने से भड़क गई युवती, फिर जो हुआ, देखें वीडियो
सोशल मीडिया की दुनिया में कब क्या देखने को मिल जाए कुछ पता नहीं होता है. कई बार ऐसे वीडियो देखने को मिल जाते हैं, जो अपने आप में चौंकाने वाले होते हैं. एक ऐसा ही वीडियो सोशल मीडिया पर छाया हुआ है, जिसमें एक युवती पब्लिक प्लेस पर मोबाइल स्टैंड लगाकर खुद का वीडियो रिकॉर्ड करती नजर आ रही है. वीडियो के दौरान एक युवक फोन पर बात करते हुए पीछे से निकल जाता है. युवक कैमरे के सामने से नहीं बल्कि पीछे की ओर से गुजरता है, लेकिन यह बात युवती को नागवार गुजरती है.
युवती का बयान बना विवाद की वजह
युवक के निकलते ही युवती कैमरे पर कहती है कि लोगों में “जीरो सिविक सेंस” है. वह यह भी कहती है कि युवक ने न तो सॉरी कहा और न ही किसी तरह की प्रतिक्रिया दी, बस सीधे निकल गया. इसी बयान के बाद वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया और बड़ी संख्या में लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी.
यूजर्स ने किया युवती को ट्रोल
वीडियो वायरल होने के बाद ज्यादातर सोशल मीडिया यूजर्स ने युवती के बयान से असहमति जताई. लोगों का कहना है कि जब कोई पब्लिक प्लेस पर वीडियो शूट करता है, तो वहां से गुजरने वाले हर व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. यूजर्स ने लिखा कि सार्वजनिक जगह किसी की निजी संपत्ति नहीं होती.
पब्लिक प्लेस को प्राइवेट बनाना चाहती हैं
कई यूजर्स ने तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोग पब्लिक प्लेस को प्राइवेट स्टूडियो बनाना चाहते हैं. उनका कहना था कि युवक फोन पर बात करते हुए सामान्य तरीके से जा रहा था और उसने जानबूझकर वीडियो खराब नहीं किया. ऐसे में सिविक सेंस का सवाल उठाना गलत है.
सिविक सेंस पर छिड़ी नई बहस
इस वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर सिविक सेंस की परिभाषा को लेकर बहस तेज हो गई है. कुछ लोगों का मानना है कि आजकल सिविक सेंस शब्द का इस्तेमाल बिना सोचे-समझे किया जा रहा है. वहीं, कई यूजर्स ने यह भी कहा कि पब्लिक स्पेस में शूटिंग करते समय दूसरों की मौजूदगी को स्वीकार करना चाहिए.
आखिर किसकी गलती?
वायरल वीडियो ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पब्लिक प्लेस में कंटेंट बनाते समय जिम्मेदारी किसकी होती है. जहां एक ओर युवती का नाराज होना सामने आया, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया ने इस मामले को बिल्कुल अलग मोड़ दे दिया.
> Films in public
— ︎ ︎venom (@venom1s) January 22, 2026
> A man goes on the road
> Gets angry at him and says he has zero civic sense
Why are these girls so entitled?
If he stopped even for a second and looked at her, she would call him creepy and accuse him of sexual harassment.
pic.twitter.com/beS72j1KN9
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पाकिस्तान: ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के फैसले पर विपक्ष का हमला
इस्लामाबाद, 22 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के पाकिस्तान सरकार के फैसले को लेकर देश में सियासी विवाद तेज हो गया है। पाकिस्तान की सीनेट में विपक्षी नेता अल्लामा राजा नासिर अब्बास ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे नैतिक रूप से गलत और नीतिगत तौर पर भी अस्वीकार्य बताया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए अल्लामा राजा नासिर अब्बास ने कहा कि यह पहल शुरू से ही समस्याग्रस्त रही है। उन्होंने कहा कि युद्ध के बाद गाजा के पुनर्निर्माण के नाम पर बनाई गई यह व्यवस्था वास्तव में फिलिस्तीनी जनता से शासन का अधिकार छीनने जैसी है। पुनर्निर्माण, सुरक्षा और राजनीतिक निगरानी को बाहरी ताकतों के हाथ में सौंपना एक नव-औपनिवेशिक सोच को दर्शाता है, जो अंततः आत्मनिर्णय के अधिकार को कमजोर करेगा।
उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान की भागीदारी इसलिए और भी चिंताजनक है क्योंकि जिस पहल को शुरू में गाजा में कथित नरसंहार के बाद सीमित पुनर्निर्माण तंत्र के रूप में पेश किया गया था, उसका दायरा अब खुले तौर पर बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बोर्ड का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को दरकिनार करना या कमजोर करना है।
इस मुद्दे पर संविधान संरक्षण आंदोलन (तहरीक-ए-तहाफुज़-ए-आइन-ए-पाकिस्तान) के उपाध्यक्ष मुस्तफा नवाज खोखर ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि संसद से कोई राय लिए बिना और सार्वजनिक बहस के बिना इस बोर्ड में शामिल होना मौजूदा शासन की जनता के प्रति उपेक्षा को दर्शाता है।
खोखर ने एक्स पर लिखा कि तथाकथित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ गाजा पर शासन करने और संयुक्त राष्ट्र के समानांतर व्यवस्था बनाने की एक औपनिवेशिक कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बोर्ड का चार्टर ट्रंप को एकतरफा और निरंकुश अधिकार देता है, जिससे वे अपनी व्यक्तिगत और अमेरिकी एजेंडा को लागू कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि बोर्ड के अन्य सदस्यों की नियुक्ति या बर्खास्तगी का अधिकार भी अध्यक्ष (ट्रंप) के पास होगा। बोर्ड की बैठक कब होगी और किस विषय पर चर्चा होगी, यह भी वही तय करेंगे। उनके अनुसार, एक अरब डॉलर देकर स्थायी सदस्यता का प्रावधान इसे ‘अमीरों का क्लब’ बना देता है।
पाकिस्तान की पूर्व राजदूत (अमेरिका, ब्रिटेन और संयुक्त राष्ट्र) मलीहा लोधी ने भी इस फैसले को कई कारणों से अविवेकपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सरकार इस तथ्य को नजरअंदाज कर रही है कि ट्रंप इस बोर्ड के जरिए अपने एकतरफा फैसलों के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन और वैधता हासिल करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बोर्ड का कार्यक्षेत्र गाजा से कहीं आगे तक फैला हुआ है, जो इसमें शामिल न होने का एक और बड़ा कारण है।
इन बयानों से पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने घोषणा की थी कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 के ढांचे के तहत गाजा शांति योजना के कार्यान्वयन के समर्थन में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होगा। विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि इससे स्थायी युद्धविराम, फिलिस्तीनियों के लिए मानवीय सहायता में वृद्धि और गाजा के पुनर्निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
--आईएएनएस
डीएससी
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