Nodia Engineer Death: युवराज मौत मामले में अब CBI की हुई एंट्री, नोएडा अथॉरिटी से ली गईं फाइलें
Nodia Engineer Death: नोएडा सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज मेहता की डूबने से हुई मौत के मामले में अब जांच ने नया मोड़ ले लिया है. इस केस में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एंट्री हो चुकी है. अब जांच एजेंसी स्पोर्ट्स सिटी प्लॉट आवंटन में MJ विजटाउन बिल्डर की भूमिका की बारीकी से पड़ताल करेगी. माना जा रहा है कि यह जांच सिर्फ हादसे तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उससे जुड़े प्रशासनिक फैसलों और जमीन के लेन-देन तक जाएगी.
रातों-रात फाइलें लेकर गई CBI
सूत्रों के मुताबिक, CBI ने 21 जनवरी की रात नोएडा प्राधिकरण से MJ विजटाउन से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलें अपने कब्जे में ले लीं. बताया जा रहा है कि स्पोर्ट्स सिटी के प्लॉट का एक हिस्सा MJ विजटाउन को बेचा गया था, जिसकी प्रक्रिया और शर्तों को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं. इसी कड़ी में CBI की टीम अब यह भी जांच करेगी कि आवंटन में नियमों का पालन हुआ या किसी स्तर पर गड़बड़ी की गई.
दो FIR और तीन गिरफ्तारियां
इस मामले में नोएडा पुलिस पहले ही दो एफआईआर दर्ज कर चुकी है. वहीं अब तक तीन लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है. पुलिस की शुरुआती जांच में लापरवाही के संकेत मिलने के बाद मामला और गंभीर हो गया था. अब CBI के आने से उम्मीद की जा रही है कि केस की जांच व्यापक दायरे में होगी और जिम्मेदार पक्षों की भूमिका स्पष्ट होगी.
हादसा जहां हुआ, वह प्लॉट स्पोर्ट्स सिटी का हिस्सा
जिस गहरी खाई में पानी भरने के कारण युवराज मेहता की मौत हुई थी, वह जगह स्पोर्ट्स सिटी प्लॉट नंबर-2 के ए-3 प्लॉट में आती है. जानकारी के अनुसार, प्लॉट नंबर-2 का उपविभाजन नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों की ओर से स्वीकृत किया गया था. करीब 27,185 वर्ग मीटर भूमि का भू-उपयोग लेआउट में कॉमर्शियल दर्शाया गया है. अब सवाल उठ रहा है कि जब यह व्यावसायिक जमीन है, तो सुरक्षा और निर्माण मानकों को लेकर निगरानी इतनी कमजोर क्यों रही.
129 करोड़ बकाया, फिर भी सवालों में आवंटन
जांच में यह भी सामने आया है कि MJ विजटाउन पर नोएडा अथॉरिटी का करीब 129 करोड़ रुपये बकाया है. ऐसे में यह बिंदु भी जांच का विषय बन गया है कि बकाया होने के बावजूद कंपनी की गतिविधियों पर नियंत्रण और जवाबदेही तय क्यों नहीं हुई. CBI अब वित्तीय लेन-देन और प्राधिकरण की भूमिका को भी खंगाल सकती है.
फॉरेंसिक टीम ने किया मौके का बारीकी से निरीक्षण
मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक टीम भी घटनास्थल पर पहुंची थी. टीम ने पूरे क्षेत्र को घेरकर इंच-बाय-इंच जांच की और उस स्थान का निरीक्षण किया जहां कार अनियंत्रित होकर पानी से भरे गहरे गड्ढे में जा गिरी थी. शुरुआती रिपोर्ट में सुरक्षा रेलिंग और ठोस बैरिकेडिंग की कमी को हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है.
अब आगे क्या?
CBI की जांच के बाद इस मामले में कई नए खुलासे संभव हैं। यह केस अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और बिल्डर सिस्टम की कार्यशैली पर भी बड़ा सवाल बन चुका है.
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बजट 2026 में रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर सबसे ज्यादा फोकस होने की उम्मीद : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 22 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय बजट 2026 में सरकार वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए उन क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान देगी, जहां बड़े स्तर पर पूंजीगत खर्च किया जाता है। इनमें रक्षा क्षेत्र को सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है। यह बात गुरुवार को जारी निवेश प्लेटफॉर्म स्मॉलकेस की रिपोर्ट में कही गई।
स्मॉलकेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में शामिल करीब 40 प्रतिशत निवेश प्रबंधकों ने कहा कि इस बजट में रक्षा क्षेत्र को ज्यादा बजट मिल सकता है। इसकी वजह देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना, सेना का आधुनिकीकरण, रक्षा निर्यात की संभावनाएं और इस क्षेत्र में सरकार का लगातार खर्च है।
बजट से पहले किए गए इस सर्वे में 50 से ज्यादा निवेश प्रबंधकों ने हिस्सा लिया, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को दूसरा सबसे बड़ा लाभ पाने वाला क्षेत्र बताया गया। करीब 29 प्रतिशत लोगों का मानना है कि सड़क, रेलवे और अन्य बुनियादी ढांचे पर सरकारी खर्च से लंबे समय तक आर्थिक विकास को फायदा मिलेगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्यम अवधि के लिए भारतीय शेयर बाजार के निवेशक सकारात्मक दिख रहे हैं। हालांकि, बजट के आसपास कुछ समय के लिए बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ज्यादातर फंड मैनेजर भारतीय शेयर बाजार को लेकर सकारात्मक नजरिया रखते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 82 प्रतिशत से ज्यादा लोगों को उम्मीद है कि निफ्टी50 वित्त वर्ष 2027 के अंत तक 25,000 अंक से ऊपर बंद होगा। वहीं 43 प्रतिशत निवेशकों का अनुमान है कि यह 25,000 से 27,500 के दायरे में रह सकता है।
महंगाई को लेकर भी निवेश प्रबंधक ज्यादा चिंतित नहीं हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि 85 प्रतिशत से अधिक लोग मानते हैं कि वित्त वर्ष 2027 में महंगाई दर 4 से 5 प्रतिशत या उससे कम रह सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी बजट से फायदा मिलने की उम्मीद है। करीब 18 प्रतिशत लोगों ने इस क्षेत्र का नाम लिया, क्योंकि सरकार उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के जरिए उद्योगों को लगातार समर्थन दे रही है।
खपत और कृषि क्षेत्रों को लेकर करीब 7-7 प्रतिशत लोगों ने समर्थन की उम्मीद जताई है। इससे संकेत मिलता है कि सरकार इन क्षेत्रों में सीमित और लक्षित मदद दे सकती है, न कि बड़े पैमाने पर राहत।
रिपोर्ट के अनुसार, करीब 80 प्रतिशत निवेश प्रबंधकों को बजट के आसपास बाजार में उतार-चढ़ाव की आशंका है। इसकी वजह नीतिगत फैसले, अचानक घोषणाएं और वैश्विक घटनाएं हो सकती हैं। हालांकि, उनका मानना है कि यह उतार-चढ़ाव ज्यादा समय तक नहीं रहेगा और बाजार जल्द ही अपने मूल आधार पर लौट आएगा।
टैक्स को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़े बदलाव की उम्मीद कम है। निवेशकों का मानना है कि कंपनियों के लिए टैक्स में बड़ी कटौती की गुंजाइश नहीं है, जबकि नौकरीपेशा लोगों के लिए सीमित राहत या टैक्स नियमों को आसान बनाया जा सकता है।
कंपनियों पर टैक्स में स्थिरता बनाए रखने की संभावना है और सरकार का ध्यान पूंजीगत खर्च से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाओं और नियमों के पालन पर रहेगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार शहरों और गांवों में मांग बढ़ाने के लिए कुछ चुनिंदा कदम उठा सकती है, लेकिन बड़े पैमाने पर खर्च बढ़ाने से बचेगी, ताकि वित्तीय अनुशासन बना रहे।
--आईएएनएस
डीबीपी/एबीएम
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