कौन है संदिग्ध आतंकी उजैद? जिसकी तलाश में जम्मू पुलिस ने मेरठ में मारा छापा, अलकायदा से कनेक्शन
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चीन ने 'गाजा बोर्ड पीस' को किया खारिज, अमेरिका के इनविटेशन पर दिया ये जवाब, जानें भारत का क्या है रुख
चीन अब खुलकर अमेरिका के सामने खड़ा हो चुका है. वह सामने आकर हर मामले में उसका विरोध कर रहा है. ताजा मामले में उसने ‘गाजा पीस बोर्ड' में शामिल होने से उसने इनकार कर दिया है. इससे पहले फ्रांस और नार्वे जैसे यूरोपीय लोकतांत्रिक देशों ने इसे अंतराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताते हुए इसमें शामिल होने से इनकार किया था. इस फेहरिस्त में अब चीन भी शामिल हो गया है. भारत ने अब तक इस पर किसी तरह की कोई अधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है.
एक पोस्ट में भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने कहा, "चीन को गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका का निमंत्रण प्राप्त हुआ है. चीन हमेशा सच्चे बहुपक्षवाद का पालन करता है. अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में चाहे जो भी बदलाव आए, चीन संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखकर बनाई गई अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का समर्थन करेगा.
China rejects offer to join Board of Peace, says 'firmly committed to safeguarding international system with UN at core'
— ANI Digital (@ani_digital) January 22, 2026
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भारत ने नहीं दी कोई प्रतिक्रिया
गाजा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने को लेकर भारत ने भी अपने हालात को स्पष्ट नहीं किया है. उसने चुप्पी साध रखी है. भारत की नजर से देखें तो ट्रंप का गाजा पीस बोर्ड प्रस्ताव काफी संवेदनशील मामला है. भारत ऐतिहासिक रूप से फिलिस्तीन के आत्मनिर्णय, दो-राज्य समाधान और संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का समर्थक रहा है. वहीं हाल के वर्षों में इसराइल के साथ उसके रणनीतिक संबंध भी बेहतर हुए हैं. ऐसे में अब उसने किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी है. भारत का कहना है कि फिलिस्तीन
भारत ने बयान में कहा कि वह संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और बातचीत के दम पर फिलिस्तीन—इजरायल के विवाद को सुलझाने के पक्ष में रहा है. मगर ट्रंप का बोर्ड यूएन ढांचे से बाहर है. ऐसे में भारत खुलकर इसका समर्थन करने से बच रहा है. भारत गाजा में मानवीय मदद भेजता रहा है. ऐसे में राजनीतिक ढांचे पर चुप्पी बनाए रखना उसे कूटनीतिक लचीलापन देता है. भारत की रणनीति फिलहाल देखो और इंतजार करो की रही है.
क्या है गाजा बोर्ड ऑफ पीस?
गाजा बोर्ड ऑफ पीस का प्रस्ताव अमेरिकी राष्ट्रपति ने पहली बार बीते साल सितंबर में दिया था. तब उन्होंने गाजा में युद्ध खत्म करने की अपनी योजना का ऐलान किया था. हालांकि कुछ वक्त के बाद ऐलान किया कि बोर्ड गाजा के बाद दुनिया के अन्य संघर्षों को सुलझाने की दिशा में कदम रखेगा. इस बोर्ड के प्रमुख अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हैं. वहीं सदस्य देशों का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा. इन देशों को स्थायी सदस्यता दी जाएगी जो इस बोर्ड की गतिविधियों के लिए 1 बिलियन डॉलर की भुगतान करने वाले हैं.
इस बोर्ड में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर को कार्यकारी बोर्ड के सदस्यों में शामिल किया गया है. इस बोर्ड में दुनियाभर के करीब 50 देशों को निमंत्रण दिया गया है.
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