नवी मुंबई के पास बनेगी 'इनोवेशन सिटी', महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया ऐलान
दावोस, 22 जनवरी (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को नवी मुंबई के पास एक इनोवेशन सिटी बनाने का ऐलान किया। इसके जरिए सरकार की कोशिश अर्थव्यवस्था की रफ्तार को तेज करने के लिए इनोवेशन को बढ़ावा देना है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) के साइडलाइन में समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने दुनियाभर के अलग-अलग जगहों से आए 450 निवेशकों के सामने नवी मुंबई के पास इनोवेशन सिटी बनाने का ऐलान किया है। इसमें बड़ी संख्या में निवेशकों ने रुचि दिखाई है। साथ ही कहा कि इस इनोवेशन सिटी में टाटा ग्रुप करीब एक लाख करोड़ रुपए (11 अरब डॉलर) का निवेश करने की योजना बना रहा है।
फडणवीस ने आगे कहा कि इनोवेशन सिटी मुंबई में ग्लोबल इनोवेशन इकोसिस्टम लाने में मदद करेगी। हमारा लक्ष्य मुंबई को एक ऐसा केंद्र बनाना है जहां दुनिया का कोई भी व्यक्ति आसानी से प्लग-एंड-प्ले इनोवेशन सिस्टम का उपयोग कर सके। टाटा संस ने इनोवेशन सिटी के विकास के लिए 11 अरब डॉलर का निवेश किया है, जिसमें एक डेटा सेंटर भी शामिल है।
आईएएनएस से बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि इस इवेंट में मुंबई को सर्कुलर इकोनॉमी बनाने की घोषणा की गई है। इसके तहत शहर के सॉलिड वेस्ट, लिक्विड वेस्ट, मेडिकल वेस्ट, इलेक्ट्रॉनिक्स वेस्ट,बिल्डिंग मटेरियल वेस्ट और अन्य प्रकार के वेस्ट को सर्कुलर इकोनॉमी से वेस्ट में परिवर्तित किया जाएगा। इससे मुंबई की वायु और जल गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिलेगी और देश की आर्थिक राजधानी एक स्थिर शहर के रूप में विकसित होगा।
इससे पहले डब्ल्यूईएफ की वार्षिक बैठक के दौरान आईएएनएस से बातचीत में मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि भारतीय कंपनियों को अलग-अलग वैश्विक बाजारों तक पहुंच की जरूरत है, जिसे भारत-ईयू व्यापार समझौते के जरिए पूरा किया जाएगा।
उन्होंने कहा, यूरोप भारत को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखता है। यह हाल के दिनों में यूरोपीय संघ के नेतृत्व के बयानों से स्पष्ट है। ईयू के वक्तव्यों में भी भारत को एक प्रमुख वैश्विक निवेश केंद्र के रूप में उभरते हुए बताया गया है। भारत की स्थिर नीतियां और तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था यूरोपीय निवेश और साझेदारियों को आकर्षित कर रही हैं।
भारत-ईयू शिखर सम्मेलन 27 जनवरी को प्रस्तावित है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक बाजारों में अमेरिका के टैरिफ से जुड़ी उथल-पुथल और भू-राजनीतिक बदलावों के कारण अनिश्चितता बनी हुई है।
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
ग्रीनलैंड में तनाव कम होने से बाजार को राहत, रुपए में सुधार की उम्मीद : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 22 जनवरी (आईएएनएस)। ग्रीनलैंड से जुड़े वैश्विक तनाव में कमी आने के संकेतों से बाजार की भावना को राहत मिली है। गुरुवार को जारी डीबीएस बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, इससे बाजार की धारणा बेहतर होगी और रुपए में उतार-चढ़ाव तो बना रहेगा, लेकिन उसकी गिरावट अब पहले की तरह तेज नहीं होगी।
गुरुवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर से संभलता दिखा। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 15 पैसे मजबूत होकर 91.50 पर पहुंच गया।
डीबीएस बैंक की कार्यकारी निदेशक और वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव के अनुसार, पिछले साल से चले आ रहे नकारात्मक रुझान को वैश्विक और घरेलू कारणों ने बढ़ा दिया था।
उन्होंने कहा, वैश्विक वीआईएक्स में तीव्र वृद्धि बाजार के सभी संकेतकों की कमजोरी को दर्शाती है, जिसे प्रतिकूल भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में उछाल से और भी बल मिला है। ऐसे में ग्रीनलैंड से जुड़े तनाव में कमी आने के संकेत बाजार के लिए राहत लेकर आए हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यूरोपीय संघ के साथ एक बड़ा व्यापार समझौता जल्द पूरा हो सकता है, जिसकी घोषणा अगले हफ्ते होने की उम्मीद है। इसके अलावा, विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान अमेरिका के साथ व्यापार बातचीत को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं, जिससे बाजार में दोबारा उम्मीद जगी है।
देश के अंदर की स्थिति की बात करें तो रुपए पर दबाव ऐसे समय में आया है, जब आर्थिक विकास मजबूत दिखाई दे रहा है। चालू वित्त वर्ष की पहली दो तिमाहियों में औसत आर्थिक वृद्धि दर 8 प्रतिशत रही है और आने वाले वित्त वर्ष के लिए इसके 7.5 प्रतिशत से अधिक रहने का अनुमान है।
कमजोर रुपया जहां ऊंचे आयात शुल्क से प्रभावित निर्यातकों को कुछ राहत देता है, वहीं दूसरी ओर इससे अर्थव्यवस्था के कुछ हिस्सों में असंतुलन भी पैदा हुआ है।
डीबीएस बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, देश का चालू खाता घाटा अभी काबू में है और यह जीडीपी के करीब 1.0 से 1.2 प्रतिशत के आसपास रह सकता है। लेकिन, असली चिंता विदेशी पूंजी के प्रवाह को लेकर है।
बैंक ने बताया कि वर्ष 2025 में शुद्ध पूंजी निकासी के बाद इस साल इक्विटी बाजारों से करीब 3 अरब डॉलर की निकासी हुई है, जबकि बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेशकों की रुचि कमजोर बनी हुई है।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की स्थिति पिछले साल से बेहतर जरूर है, लेकिन विदेशी कंपनियों द्वारा मुनाफा वापस ले जाने के कारण कुल निवेश के मुकाबले इसमें अभी भी अंतर बना हुआ है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि आने वाले केंद्रीय बजट में सरकारी खर्च का असर साफ दिखाई देगा, क्योंकि वित्त वर्ष 2027 में केंद्र और राज्यों का कुल उधार बढ़ने की संभावना है।
--आईएएनएस
डीबीपी/एबीएम
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