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‘अर्बन माइंडसेट’ टी-शर्ट पर कमेंट से शुरू हुआ विवाद, DU छात्रा ने कार सवार युवकों पर लगाया छेड़छाड़ का आरोप

Mukherjee Nagar Harassment: दिल्ली के मुखर्जी नगर इलाके में दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक छात्रा के साथ कथित छेड़छाड़ और पीछा करने का मामला सामने आया है. छात्रा का आरोप है कि कार सवार कुछ युवकों ने उस पर अश्लील टिप्पणी की. जब उसने और उसकी सहेली ने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने गाली-गलौज शुरू कर दी. पुलिस से शिकायत करने की बात कहने पर उन्हें धमकी देने का भी आरोप है.

टी-शर्ट को लेकर की गई टिप्पणी

छात्रा के मुताबिक, वह रात करीब साढ़े 9 बजे अपनी सहेली के साथ हकीकत पार्क मोड़ से ओल्ड गुप्ता चौक की तरफ जा रही थी. इसी दौरान एक एसयूवी कार में सवार युवकों ने उनकी ओर ध्यान दिया. छात्रा ने बताया कि उसने लाल रंग की टी-शर्ट पहनी थी, जिस पर ‘अर्बन माइंडसेट’ लिखा हुआ था. आरोप है कि कार में बैठे एक युवक ने पहले उसकी टी-शर्ट को लेकर टिप्पणी की और इसके बाद बातचीत का लहजा आपत्तिजनक हो गया. छात्रा और उसकी सहेली ने युवकों की बातों का विरोध करते हुए उन्हें ऐसा व्यवहार न करने के लिए कहा.

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विरोध करने पर गाली-गलौज और धमकी का आरोप

छात्रा के मुताबिक विरोध करने के बाद कार सवार युवक और ज्यादा आक्रामक हो गए और दोनों युवतियों के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने लगे. छात्रा ने आरोपियों को पुलिस में शिकायत करने और उनकी कार की फोटो लेने की बात कही. इसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर उन्हें देख लेने की धमकी दी. स्थिति बिगड़ती देख दोनों युवतियां वहां से आगे बढ़ने लगीं. आरोप है कि कार सवार युवकों ने इसके बाद उनका पीछा करना शुरू कर दिया. 

चौराहे पर कार रोककर फिर की बदसलूकी

पीड़िता के मुताबिक, कुछ दूरी पर एक चौराहे के पास आरोपियों ने अपनी कार युवतियों के सामने रोक दी. आरोप है कि कार में बैठे युवकों ने शीशे नीचे किए और फिर से गाली-गलौज शुरू कर दी. छात्रा ने बताया कि इस दौरान वह और उसकी सहेली काफी डर गई थीं. इसके बावजूद उसने मोबाइल फोन निकालकर घटना को रिकॉर्ड करने की कोशिश की.

मोबाइल कैमरा देखते ही कार लेकर भागे

छात्रा के अनुसार, जैसे ही उसने मोबाइल का कैमरा आरोपियों की तरफ किया, कार सवार युवक वहां से तेजी से निकल गए. घटना के बाद छात्रा ने पुलिस से आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. फिलहाल सामने आए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. मामले में पुलिस की जांच, सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

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पाकिस्तान में क्यों लगा लॉकडाउन? सुनी पड़ी सड़कें, भीड़ जुटने पर भी लगी पाबंदी

Explainer: पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी PTI और सरकार के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. PTI ने देशव्यापी प्रदर्शन और इस्लामाबाद की ओर मार्च का ऐलान किया है. इसके जवाब में प्रशासन ने राजधानी और उससे जुड़े प्रमुख रास्तों पर बड़े पैमाने पर सुरक्षा इंतजाम किए हैं.

सड़कों पर कंटेनर, पुलों पर रेत की बोरियां, राजमार्गों की नाकेबंदी और हजारों सुरक्षाकर्मियों की तैनाती ने इस्लामाबाद को लगभग हाई-सिक्योरिटी जोन में बदल दिया है. इस बीच इमरान खान की तीन बहनों की 30 दिन की हिरासत ने भी विवाद को और बढ़ा दिया है. ऐसे में समझते हैं कि पूरा मामला क्या है, PTI का मार्च क्यों हो रहा है और सरकार ने इतनी सख्ती क्यों की है.

PTI क्यों निकालना चाहती है मार्च?

PTI का मुख्य मुद्दा इमरान खान की जेल से रिहाई है. इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं और उनके खिलाफ कई मामलों में कानूनी कार्रवाई हुई है. PTI लगातार आरोप लगाती रही है कि उनके साथ जेल में उचित व्यवहार नहीं किया जा रहा और उन्हें राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है.

पार्टी ने इसी मुद्दे को लेकर देशव्यापी विरोध और इस्लामाबाद मार्च का आह्वान किया है. PTI नेताओं का कहना है कि प्रदर्शन का उद्देश्य इमरान खान की रिहाई के साथ-साथ उनके मामलों में निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया की मांग करना भी है.

दूसरी ओर, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि बड़े पैमाने पर मार्च से राजधानी में कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है और किसी भी संभावित हिंसा को रोकने के लिए सुरक्षा कदम उठाए जा रहे हैं.

इस्लामाबाद को क्यों किया गया सील?

प्रशासन ने PTI समर्थकों को राजधानी में प्रवेश करने से रोकने के लिए कई प्रमुख रास्तों को बंद किया है. रिपोर्टों के मुताबिक, 1,000 से ज्यादा शिपिंग कंटेनर सड़कों पर लगाए गए हैं. इनमें से कुछ कंटेनरों को नुकीले अवरोधों से मजबूत किया गया है.

पुलों पर रेत की बोरियां रखी गई हैं और इस्लामाबाद की ओर जाने वाले प्रमुख राजमार्गों पर भी रोक लगाई गई है. राजधानी में सार्वजनिक सभा और भीड़ जुटाने पर प्रतिबंध लगाया गया है.

शहर में लगभग 22,000 पुलिस और अन्य सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है. इसका मकसद PTI कार्यकर्ताओं और समर्थकों को बड़ी संख्या में राजधानी में पहुंचने से रोकना और संभावित टकराव को नियंत्रित करना बताया गया है.

पेशावर-इस्लामाबाद हाईवे भी बंद

सुरक्षा इंतजाम सिर्फ इस्लामाबाद तक सीमित नहीं हैं. PTI के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में भी सुरक्षा बढ़ाई गई है.

पेशावर को इस्लामाबाद से जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग को बंद किया गया है. यही वह क्षेत्र है जहां PTI का मजबूत राजनीतिक आधार है और पार्टी को उम्मीद है कि यहां से बड़ी संख्या में समर्थक राजधानी की ओर मार्च कर सकते हैं.

खैबर पख्तूनख्वा के अधिकारियों ने सुरक्षा कदमों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी बताया है. वहीं PTI नेताओं का कहना है कि सरकार की कार्रवाई उनके शांतिपूर्ण राजनीतिक प्रदर्शन को रोकने की कोशिश है.

आम लोगों और कारोबारियों पर क्या असर?

राजधानी की नाकेबंदी का असर सिर्फ राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहा है. प्रमुख रास्ते बंद होने और आवाजाही प्रभावित होने से आम नागरिकों तथा कारोबारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

रिपोर्टों के मुताबिक, राजधानी में जरूरी सामान की आपूर्ति और कारोबार प्रभावित हुआ है. सड़कों पर भारी सुरक्षा व्यवस्था के कारण सामान्य यातायात भी बाधित हुआ है.

यानी राजनीतिक विरोध को रोकने के लिए उठाए गए सुरक्षा कदमों का सीधा असर शहर की रोजमर्रा की गतिविधियों पर भी पड़ा है.

मार्च की तारीख में बदलाव क्यों हुआ?

PTI ने शुरुआती तौर पर 27 सितंबर को देशव्यापी प्रदर्शन और इस्लामाबाद मार्च का कार्यक्रम रखा था. बाद में पार्टी की ओर से इसे 4 अक्टूबर तक टालने की घोषणा की गई.

पार्टी नेताओं का कहना है कि तारीख आगे बढ़ाने का मकसद सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाए रखना और आंदोलन के लिए ज्यादा समय जुटाना है. हालांकि, मार्च की रणनीति और उसके स्वरूप को लेकर PTI नेतृत्व के भीतर भी चर्चा जारी रही है.

इस बदलाव का एक असर यह भी हो सकता है कि राजधानी में लगाए गए कई सुरक्षा प्रतिबंध और सड़क अवरोध कुछ समय तक बने रहें या परिस्थितियों के अनुसार बदले जाएं.

इमरान खान की तीन बहनें क्यों हिरासत में ली गईं?

मार्च से पहले इमरान खान के परिवार के खिलाफ हुई कार्रवाई ने विवाद को और बढ़ा दिया. उनकी बहन अलीमा खान को 20 सितंबर को हिरासत में लिया गया. इसके बाद उजमा खान और नूरीन नियाजी को भी 30 दिनों के लिए हिरासत में लिया गया.

तीनों के खिलाफ पंजाब के Maintenance of Public Order (MPO) Ordinance, 1960 के तहत कार्रवाई की गई. प्रशासन की ओर से सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर चिंता को इसका आधार बताया गया.

PTI और परिवार की ओर से इन हिरासतों को चुनौती दी गई है. उनका तर्क है कि इन आदेशों में पर्याप्त आधार नहीं बताए गए और सामान्य कानूनी प्रक्रिया के बजाय निवारक हिरासत का इस्तेमाल किया गया.

लाहौर हाईकोर्ट में क्या हुआ?

इमरान खान की बहनों की हिरासत के खिलाफ लाहौर हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गईं. 24 सितंबर को अदालत ने तत्काल हिरासत आदेशों को निलंबित करने की मांग स्वीकार नहीं की, लेकिन पंजाब सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा.

इसका मतलब है कि अदालत ने फिलहाल तत्काल राहत नहीं दी है, लेकिन हिरासत की वैधता से जुड़े सवालों पर आगे सुनवाई जारी रहेगी.

क्या इमरान खान की जेल और मार्च का सीधा संबंध है?

राजनीतिक रूप से दोनों घटनाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं. PTI का आंदोलन सीधे इमरान खान की रिहाई की मांग को केंद्र में रखता है. दूसरी ओर, सरकार सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को लेकर प्रतिबंध लगा रही है.

इमरान खान और PTI उनके खिलाफ चल रहे मामलों को राजनीतिक कार्रवाई बताते रहे हैं और आरोपों से इनकार करते हैं. दूसरी ओर, सरकार और प्रशासन सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था को अपनी कार्रवाई का आधार बताते हैं. इसलिए दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है.

आगे की रणनीति पर होंगी नजरें

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि PTI 4 अक्टूबर के प्रस्तावित मार्च को किस स्वरूप में आगे बढ़ाती है और प्रशासन उसका सामना कैसे करता है.

अगर बड़ी संख्या में लोग राजधानी की ओर बढ़ते हैं तो सड़क बंदी, सुरक्षा बलों की तैनाती और गिरफ्तारी जैसे कदमों का दायरा बढ़ सकता है. वहीं, लंबे समय तक राजधानी बंद रहने से आम नागरिकों और कारोबार पर पड़ने वाला दबाव भी सरकार के लिए एक अलग चुनौती बन सकता है.

फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम के तीन प्रमुख केंद्र हैं इमरान खान की जेल और उनकी रिहाई की मांग, PTI का प्रस्तावित इस्लामाबाद मार्च और सरकार की सुरक्षा एवं निवारक कार्रवाई. आने वाले दिनों में इन तीनों के बीच संतुलन ही पाकिस्तान के राजनीतिक माहौल की दिशा तय करेगा.

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