महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दावोस दौरे को लेकर राज्य की राजनीति में जबरदस्त घमासान मच गया है। दरअसल, शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दावोस दौरे पर तीखा हमला बोलते हुए इसे पिकनिक करार दिया है। संजय राउत ने सवाल उठाया कि आखिर भारतीय राज्यों के मुख्यमंत्री हर साल दावोस जाकर क्या साबित करना चाहते हैं? संजय राउत ने कहा कि देश के अलग अलग राज्यों के मुख्यमंत्री दावोस में इकट्ठा होकर आपस में बातचीत करते हैं और भारतीय कंपनियां वहीं समझौते करती हैं। उन्होंने कहा कि यह सारा तमाशा जनता के पैसे पर होता है और जो करार दावोस में किए जा रहे हैं वे मुंबई में बैठकर भी हो सकते थे। संजय राउत ने साफ शब्दों में कहा कि भारतीय नजरिए से दावोस सम्मेलन हास्यास्पद है।
उन्होंने यह भी मांग की कि मुख्यमंत्री देश और राज्य को बताएं कि दावोस यात्रा पर कितना खर्च किया गया। हालांकि राउत ने यह भी जोड़ा कि अगर निवेश और रोजगार के जो आंकड़े सरकार बता रही है वे सही हैं तो उनका स्वागत किया जाना चाहिए।
वहीं संजय राउत के हमले का जवाब मुख्यमंत्री की पत्नी अमृता फडणवीस ने दिया और उनके बयान को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि पिकनिक पर जाने वाला व्यक्ति सुबह छह बजे से रात ग्यारह बजे तक लगातार बैठकें और सम्मेलन नहीं करता। अमृता फडणवीस ने कहा कि दावोस एक वैश्विक मंच है जहां दुनिया भर के प्रतिनिधि मिलते हैं और निवेश के नए रास्ते खुलते हैं। उन्होंने कहा कि वहां जाना हर राज्य प्रमुख की जिम्मेदारी है।
हम आपको यह भी बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने दावोस से बड़ी उपलब्धियों का दावा किया है। महाराष्ट्र सरकार ने विश्व आर्थिक मंच के पहले ही दिन चौदह लाख पचास हजार करोड़ रुपये के 19 समझौतों पर हस्ताक्षर कर दिये थे। ये निवेश हरित ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण, इस्पात निर्माण, आईटी, डाटा सेंटर, इलेक्ट्रिक वाहन, जहाज निर्माण और डिजिटल ढांचे जैसे क्षेत्रों में होंगे। राज्य सरकार का दावा है कि इससे राज्य में पंद्रह लाख रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
Continue reading on the app