IND vs NZ: अभिषेक शर्मा के बाद नागपुर में हार्दिक और रिंकू सिंह का तूफान, भारत ने न्यूजीलैंड को दिया 239 रनों का लक्ष्य
IND vs NZ 1st T20: भारत और न्यूजीलैंड के बीच पहला टी20 मैच नागपुर के विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में खेला जा रहा है. न्यूजीलैंड के कप्तान मिचेल सेंटनर ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया. पहले बल्लेबाजी करने उतरी टीम इंडिया ने 7 विकेट पर 239 रनों का बड़ा स्कोर खड़ा किया है. अभिषेक शर्मा ने 84 रनों की तूफानी पारी खेली. वहीं रिंकू सिंह ने 20 गेंद पर नाबाद 44 रनों की विस्फोटक पारी खेली.
संजू सैमसन और ईशान किशन रहे फ्लॉप
अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन ने टीम इंडिया की पारी का आगाज किया, लेकिन 7 गेंद पर 10 रन बनाकर संजू सैमसन आउट हो गए. उन्हें काइल जैमीसन ने पवेलियन भेजा. इसके बाद नंबर-3 पर बल्लेबाजी करने उतरे ईशान किशन भी 5 गेंद पर 8 रन बनाकर जैकब डफी को शिकार बने.
अच्छे फॉर्म में नजर आए सूर्यकुमार यादव
इसके बाद अभिषेक शर्मा और कप्तान सूर्यकुमार यादव के बीच तीसरे विकेट के लिए 99 रनों तेज साझेदारी हुई. दोनों खिलाड़ियों ने न्यूजीलैंड गेंदबाजों की जमकर पिटाई की, लेकिन फिर सूर्या 32 गेंद पर 22 रन बनाकर अपना विकेट गंवा बैठे. उन्हें मिचेल सेंटनर ने पवेलियन भेजा.
अभिषेक शर्मा और रिंकू सिंह ने खेली तूफानी पारी
इसके बाद एक तूफानी पारी खेलकर अभिषेक शर्मा आउट हुए. उन्होंने 35 गेंदों पर 84 रनों की धमाकेदार पारी खेली. इस दौरान उनके बल्ले से 5 चौका और 8 छक्का निकला. अभिषेक ने 240 की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की. फिर शिवम दुबे 9 रन बनाकर चलते बने. इसके बाद हार्दिक पांड्या 16 गेंद पर 25 रन बनाकर आउट हुए, लेकिन आखिरी में रिंकू सिंह ने कमाल की फिनिशर की भूमिका निभाई. रिंकू ने 20 गेंदों पर नाबाद 44 रनों की विस्फोटक पारी खेली. इस दौरान उनके बल्ले से 4 चौका और 3 छक्का निकला. न्यूजीलैंड के लिए जैकब डफी और काइल जैमीसन ने 2-2 विकेट लिए.
Going, going, GONE! ????
— BCCI (@BCCI) January 21, 2026
???? Rinku Singh with a fabulous final flourish to power #TeamIndia to 2⃣3⃣8⃣/7 ????
Scorecard ▶️ https://t.co/ItzV352h5X#INDvNZ | @IDFCFIRSTBank | @rinkusingh235 pic.twitter.com/BGTv4m3NxD
ऐसी है दोनों टीमों की प्लेइंग 11:
भारत की प्लेइंग 11 : अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), ईशान किशन, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), रिंकू सिंह, हार्दिक पंड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमराह, वरुण चक्रवर्ती.
न्यूजीलैंड की प्लेइंग 11: टिम रॉबिन्सन, डेवोन कॉनवे (विकेटकीपर), रचिन रविंद्र, ग्लेन फिलिप्स, मार्क चैपमैन, डैरिल मिशेल, मिशेल सैंटनर (कप्तान), क्रिस्टियन क्लार्क, काइल जैमीसन, ईश सोढ़ी, जैकब डफी.
यह भी पढ़ें: IND vs NZ: अभिषेक शर्मा ने 2 छक्का लगाते ही T20 इंटरनेशनल में रचा कीर्तिमान, युवराज सिंह को पछाड़ा
वुडरो विल्सन के 'पीस विदआउट विक्ट्री' ने दिखाई दुनिया को नई राह, 14 प्वाइंट बने राष्ट्र संघ का आधार
नई दिल्ली, 21 जनवरी (आईएएनएस)। आज जब आधी दुनिया में जंग के हालात हैं तो अमेरिका के ही एक ऐसे राष्ट्रपति को याद करना जरूरी है जिसने दुनिया को शांति की राह दिखाई। राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने अमेरिकी सीनेट में एक ऐतिहासिक भाषण दिया था जिसे इतिहास में “पीस विदआउट विक्ट्री” के नाम से जाना जाता है। भाषण ऐसे समय में आया था जब प्रथम विश्व युद्ध अपने सबसे भयावह दौर में था और यूरोप के अधिकांश देश युद्ध की विभीषिका झेल रहे थे। विल्सन का मानना था कि यदि युद्ध का अंत किसी एक पक्ष की पूर्ण जीत और दूसरे की अपमानजनक हार से हुआ, तो वह शांति स्थायी नहीं होगी।
22 जनवरी 1917 को दिए अपने भाषण में वुडरो विल्सन ने तर्क दिया कि विजय पर आधारित शांति बदले की भावना को जन्म देती है, जो भविष्य में नए संघर्षों को आमंत्रण देती है। उन्होंने कहा कि सच्ची और टिकाऊ शांति वही होगी जिसमें किसी देश को पराजित और अपमानित न किया जाए, बल्कि सभी देशों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित हो। यह विचार उस दौर की पारंपरिक “विजेता बनाम पराजित” राजनीति से बिल्कुल अलग था।
इतिहासकार आर्थर एस. लिंक अपनी प्रसिद्ध पुस्तक वुडरो विल्सन एंड द प्रोग्रेसिव एरा” में लिखते हैं कि विल्सन का यह विचार उनके नैतिक आदर्शवाद और नैतिकता से गहराई से जुड़ा था। लिंक के अनुसार, विल्सन अंतरराष्ट्रीय राजनीति को केवल शक्ति-संतुलन के नजरिए से नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी के रूप में देखते थे।
हालाकि, उस समय यूरोपीय शक्तियों ने विल्सन के “पीस विदआउट विक्ट्री” के सिद्धांत को व्यावहारिक नहीं माना। ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देश जर्मनी की स्पष्ट हार चाहते थे। इसके बावजूद, विल्सन का यह विचार आगे चलकर उनके ‘फोर्टीन पॉइंट्स’ का आधार बना, जिसे उन्होंने 1918 में प्रस्तुत किया। इन बिंदुओं में आत्मनिर्णय, खुले कूटनीतिक समझौते और राष्ट्र संघ की स्थापना जैसे विचार शामिल थे।
“पीस विदआउट विक्ट्री” केवल एक भाषण नहीं था, बल्कि यह विश्व राजनीति को नैतिक आधार देने का एक प्रयास था। भले ही तत्कालीन विश्व शक्तियां इसे पूरी तरह स्वीकार न कर सकीं, लेकिन इस विचार ने यह स्पष्ट कर दिया कि स्थायी शांति बल से नहीं, बल्कि न्याय, सहयोग और पारस्परिक सम्मान से ही संभव है।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation






















