मर्कोसुर समझौते पर यूरोपियन पार्लियामेंट का फैसला दुखद: जर्मन चांसलर मर्ज
नई दिल्ली, 21 जनवरी (आईएएनएस)। यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने मंगलवार को विश्व आर्थिक मंच से फ्री ट्रेड की बात कही थी। उन्होंने हाल ही में दक्षिण अमेरिका के आर्थिक समूह मर्कोसुर के साथ संपन्न हुए एग्रीमेंट की बात की थी। मर्कोसुर में ब्राजील, अर्जेंटीना, उरुग्वे और पैराग्वे जैसे देश शामिल हैं। यह समझौता वर्षों से बातचीत में था और इसे वैश्विक व्यापार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।
लेकिन यूरोपियन यूनियन की संसद ने बुधवार, 21 जनवरी को जो किया वो ईयू की उम्मीदों पर पानी फेरने सरीखा है। संसद ने ट्रेड डील को ईयू की टॉप कोर्ट में भेजने के लिए वोट कर दिया, जिससे इस समझौते पर कानूनी अनिश्चितता का साया पड़ गया है। स्ट्रासबर्ग में सांसदों ने 334 के मुकाबले 324 वोटों से यूरोपियन यूनियन के कोर्ट ऑफ जस्टिस (सीजेईयू) से यह तय करने के लिए कहा कि क्या यह डील ब्लॉक की पॉलिसी के साथ मेल खाती है। इस समझौते का कई यूरोपीय किसानों ने विरोध किया था।
संसद के इस रवैए पर जर्मन चांसलर ने खेद व्यक्त किया। उन्होंने कहा, मर्कोसुर समझौते पर यूरोपियन पार्लियामेंट का फैसला दुखद है। निर्णय जियोपॉलिटिकल स्थिति को ठीक से नहीं समझने वाला लगता है। हमें समझौते की वैधता पर पूरा भरोसा है। अब और देरी नहीं होनी चाहिए। समझौते को अब अस्थायी रूप से लागू किया जाना चाहिए।
स्थानीय मीडिया के अनुसार, बुधवार को वोट से पहले सैकड़ों किसान ट्रैक्टरों के साथ संसद भवन के बाहर जमा हुए थे – और जैसे ही नतीजा आया, प्रदर्शनकारी जश्न मनाने लगे।
शनिवार को ब्राजील, अर्जेंटीना, उरुग्वे और पैराग्वे के साथ इस समझौते पर मुहर लगी थी, जिसे दुनिया के सबसे बड़े मुक्त व्यापार समझौते के तौर पर प्रोजेक्ट किया जा रहा था। ऐसा दावोस में ईयू आयोग की अध्यक्ष ने भी कहा था।
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार बाधाओं को कम करना है। इसके तहत आयात-निर्यात पर लगने वाले कई तरह के शुल्क घटाए जाने या खत्म करने की मंशा दिखाई गई है।
--आईएएनएस
केआर/
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बाजार की पाठशाला : लंबे समय में सुरक्षित और मोटा मुनाफा चाहते हैं? ये टॉप 5 सरकारी योजनाएं बेस्ट ऑप्शन
नई दिल्ली, 21 जनवरी (आईएएनएस)। आज के समय में निवेश के सही विकल्प चुनना हर व्यक्ति के लिए बेहद जरूरी हो गया है, खासकर उन लोगों के लिए जो बचत के साथ अच्छा रिटर्न और सुरक्षा भी चाहते हैं। भारत में कई ऐसी सरकारी निवेश योजनाएं हैं जो न केवल सुरक्षा और भरोसा देती हैं, बल्कि निश्चित रिटर्न और टैक्स लाभ भी प्रदान करती हैं। इन योजनाओं की खासियत यह है कि यह जोखिम-मुक्त या कम जोखिम वाली हैं, इसलिए ये लंबे और मध्यम समय में मोटी राशि तैयार करने के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं।
जानकारों के मुताबिक, सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम (एससीएसएस) एक ऐसी योजना है, जो खास तौर पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए है, जो रिटायरमेंट के बाद नियमित आय चाहते हैं। एससीएसएस में निवेश पर वर्तमान में लगभग 8.2 प्रतिशत के करीब ब्याज मिलता है और यह तिमाही आधार पर सीधे बैंक खाते में जमा होता है। इसकी खास बात यह है कि यह पूरी तरह सरकारी गारंटी वाली योजना है, इसलिए निवेशकों को अपने मूलधन की सुरक्षा की चिंता नहीं रहती। साथ ही, धारा 80सी के तहत टैक्स लाभ भी मिलता है, जिससे टैक्स बोझ कम होता है। पांच साल की अवधि में रखे गए निवेश पर मिलने वाला यह ब्याज निश्चित रूप से मध्यम और वरिष्ठ निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प है।
अगली प्रमुख योजना है पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ)। यह भारत सरकार द्वारा समर्थित बचत योजना है, जो 15 साल की अवधि के लिए होती है और इसमें निवेश पर मिलने वाला ब्याज टैक्स-फ्री होता है। पीपीएफ में न केवल आपका मूलधन सुरक्षित रहता है, बल्कि दीर्घकालिक निवेश के लिए यह सबसे भरोसेमंद विकल्पों में से एक है। रिटायरमेंट प्लानिंग, बच्चों की शिक्षा या भविष्य की बचत के लिए पीपीएफ का इस्तेमाल निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर किया जाता है, क्योंकि इसे 80सी टैक्स लाभ के रूप में भी शामिल किया जा सकता है।
नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (एनएससी) 5 साल की अवधि वाली सरकारी बचत योजना है, जिसमें लगभग 7.7 प्रतिशत के करीब ब्याज मिलता है। एनएससी में निवेश पर भी 80सी के तहत टैक्स छूट मिलती है, जिससे टैक्स लाभ के साथ ही अपनी पूंजी को भी बढ़ाने का मौका मिलता है। यह योजना उन निवेशकों के लिए उपयुक्त मानी जाती है जो मध्यम अवधि में सुरक्षित और सुनिश्चित रिटर्न चाहते हैं, और बाजार जोखिम से बचना चाहते हैं।
एक और योजना जो निवेशकों के बीच लोकप्रिय है, वह है पोस्ट ऑफिस मासिक आय योजना (एमआईएस)। इसमें निवेश करने पर हर महीने सुनिश्चित ब्याज मिलता है, जो खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जिन्हें नियमित मासिक आय की जरूरत होती है। इसमें वर्तमान में लगभग 7.4 प्रतिशत के आस-पास ब्याज की दर मिलती है और पैसा भी सरकार की गारंटी के अंतर्गत सुरक्षित रहता है। इस योजना से रिटायरमेंट के बाद या नियमित खर्चों के लिए निश्चित आय की पूर्ति आसान होती है।
सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाई) भी निवेश के लिहाज से बेहतरीन विकल्प है, खासकर उन परिवारों के लिए जिनके घर में लड़की है। इस योजना में निवेश पर मिलने वाला ब्याज फिलहाल 8.2 प्रतिशत है, जो अन्य योजनाओं से काफी ज्यादा है, साथ ही यह टैक्स-फ्री रिटर्न देता है। एसएसवाई का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह न केवल निवेश को सुरक्षित रखती है, बल्कि बेटी के भविष्य की शिक्षा, विवाह जैसे खर्चों के लिए एक मजबूत वित्तीय आधार भी प्रदान करती है।
जानकारों का कहना है कि ये सरकारी योजनाएं निवेश के लिए सुरक्षा, टैक्स लाभ और निश्चित रिटर्न जैसी सुविधाओं के साथ बेहतरीन विकल्प पेश करती हैं। हालांकि निवेश की दुनिया में जोखिम और लाभ पर निर्णय लेने से पहले इन सरकारी योजनाओं को समझना हर निवेशक के लिए जरूरी है।
--आईएएनएस
डीबीपी/एबीएम
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