Jantar Mantar AISA Protest: जंतर मंतर पर ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी को लेकर AISA का प्रदर्शन, नेहा बोरा समेत हिरासत में लिए 40 प्रदर्शनकारी
Jantar Mantar AISA Protest: चुनाव आयोग और SIR पर खुलासे के बाद से विपक्ष के देशव्यापी प्रदर्शन के आह्वान के बीच जंतर मंतर पर जारी AISA के नेतृत्व में आयोजित प्रोटेस्ट में भारी संख्या में लोग पहुंचे, लेकिन इस दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को डिटेन कर लिया।
बताया जा रहा है कि योगेंद्र यादव समेत 40 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को डिटेन किया जा चुका है। जंतर मंतर पर प्रदर्शन के लिए प्रशांत भूषण, अंजलि भारद्वाज, नेहा बोरा समेत AISA के कार्यकर्ता पहुचें। फिलहाल दिल्ली पुलिस ने बैरिकेड लगाकर सभी को रोक दिया है।
पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रोका
जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को बैरिकेड पर रोकने के बाद दिल्ली पुलिस ने एक एक करके प्रदर्शनकारियों को डिटेन करना शुरू किया। जिसमें सबसे पहले AISA के कार्यकर्ताओं को डिटेन करके बस में भरा गया, जिसमें कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच जमकर धक्कामुक्की हुई।
दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स के 4-5 जवान प्रदर्शनक्रियों को उठा उठा कर बस में भरते हुए नजर आए। छात्रों को डिटेन करने के बाद दिल्ली पुलिस ने दूसरी बस में योगेंद्र यादव सहित प्रदर्शन कर रहे नेताओं को डिटेन किया। बसों में भर लिया गया।
Students protesting at Jantar Mantar brutally detained to protect CEC Gyanesh Kumar who has sold out the electoral system and the nation. pic.twitter.com/rlNiAC0xb4
— Neha (@neha_aisa) September 25, 2026
मुख्य चुनाव आयुक्त अपराधी है-महुआ मोइत्रा
प्रदर्शनकारियों के बीच तृणमूल संसद महुआ मोइत्रा भी आई थी। हालांकि महुआ मोइत्रा पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने से पहले ही निकल गई। महुआ मोइत्रा ने मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को अपराधी कहा और हटाने की मांग उठाई है।
मतदाताओं के मुद्दों को उठाने वाली अंजलि भारद्वाज ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि SIR की प्रक्रिया बेहद बुरी तरह से की जा रही है और इसमें काफी खामियां हैं। दोपहर 2 बजकर 47 मिनट पर दिल्ली पुलिस की महिला पुलिसकर्मियों ने महिला प्रदर्शनकारियों और छात्राओं को डिटेन करके तीसरी बस में भर कर रवाना कर दिया और पूरे इलाके को खाली करवा दिया है.
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठे सवाल
इससे पहले ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने 24 सितंबर शुक्रवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक नागरिक विरोध प्रदर्शन और जनसभा की। इसमें चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर सीईसी ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करने की मांग उठाई गई।
आयोजकों का कहना है कि यह विरोध प्रदर्शन AISA की दिल्ली ईकाई ने द इंडियन एक्सप्रेस की हालिया रिपोर्ट के बाद आयोजित किया है, इसमें भारत निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करो के नारे लगे
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के समर्थन वाली AISA ने प्रदर्शन के दौरान ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करो के नारे लगाए। भारी पुलिस तैनाती के बीच चुनाव आयोग के कामकाज में खामियों का आरोप लगाया।
इस विरोध प्रदर्न मे कई कार्यकर्ताओं और जानी मानी हस्तियों ने हिस्सा लिया. इनमें AISA के अध्यक्ष नेहा, योगेंद्र यादव, आरजेडी सांसद मनोझ झा, सीपीआईएमल लिबरेशन के दीपांकर भट्टाचार्य, वकील प्रशांत भूषण, अंजलि भारद्वाज और नंदिता नारायण शामिल थे।
इटली के स्कूलों में BAN हुआ बुर्का-हिजाब और नकाब, नियम तोड़ा तो लगेगा 1 लाख रुपये से अधिका का जुर्माना
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने स्कूलों में बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ कक्षाओं में विदेशी छात्रों की संख्या सीमित करने का फैसला किया है. इटली की कैबिनेट ने गुरुवार, 24 सितंबर को इससे जुड़ी डिक्री को मंजूरी दी. नए नियमों के तहत प्राथमिक स्कूलों की कक्षाओं में ऐसे छात्रों की संख्या 30 प्रतिशत तक सीमित की जाएगी, जिन्हें इतालवी भाषा पर पर्याप्त पकड़ नहीं है.
स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक
नई नियमों के तहत स्कूलों में बुर्का और नकाब पहनने पर प्रतिबंध लगाया गया है. नियम तोड़ने पर 1,000 यूरो (भारतीय मद्रा में 109227.94 रुपये) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. सरकार का कहना है कि स्कूलों में चेहरा स्पष्ट रूप से दिखाई देना और छात्रों के बीच बेहतर संवाद जरूरी है. मेलोनी ने इस कदम को स्कूलों में एकीकरण और समान अवसर से जोड़कर पेश किया है.
बुर्का पूरे शरीर को ढकने वाला परिधान है, जबकि नकाब चेहरे को ढकता है और आमतौर पर केवल आंखें दिखाई देती हैं. दोनों को लेकर यूरोप के कई देशों में पहले से अलग-अलग तरह के प्रतिबंध लागू हैं.
कक्षाओं में 30% की सीमा
सरकार ने उन छात्रों के लिए 30 प्रतिशत की सीमा तय की है, जिनकी इतालवी भाषा पर पर्याप्त पकड़ नहीं है. सरकार का तर्क है कि यदि किसी कक्षा में बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे हों जिन्हें पढ़ाई की भाषा समझने में परेशानी हो, तो उनके शैक्षणिक विकास और एकीकरण पर असर पड़ सकता है. इटली में विदेशी मूल के छात्रों की संख्या पहले से ही शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण है. रॉयटर्स के अनुसार, देश के स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों में करीब 11.6 प्रतिशत गैर-इतालवी नागरिक हैं. हालांकि, नई व्यवस्था मुख्य रूप से भाषा दक्षता और नए आने वाले छात्रों से जुड़े मामलों पर केंद्रित है.
कुछ अभिभावकों के लिए इतालवी सीखना जरूरी
नई नीति में उन विदेशी छात्रों के अभिभावकों पर भी ध्यान दिया गया है, जिनके बच्चों को स्कूल व्यवस्था में गंभीर रूप से घुलने-मिलने में परेशानी हो रही है. ऐसे मामलों में अभिभावकों को इतालवी भाषा सीखने के लिए कहा जा सकता है. सरकार का मानना है कि माता-पिता की भाषा क्षमता बच्चों की पढ़ाई और स्कूल के साथ उनके जुड़ाव में मदद कर सकती है.
सरकार ने बताया एकीकरण का कदम
मेलोनी सरकार का कहना है कि इन उपायों का उद्देश्य विदेशी छात्रों को अलग करना नहीं, बल्कि स्कूलों में बेहतर एकीकरण सुनिश्चित करना है. प्रधानमंत्री ने कहा है कि इटली में भविष्य बनाने वालों को देश की भाषा सीखने, संस्कृति समझने और नियमों का सम्मान करने की जरूरत है. हालांकि, सरकार के फैसले पर विपक्ष और कुछ संगठनों ने सवाल उठाए हैं. आलोचकों का कहना है कि विदेशी छात्रों की संख्या सीमित करने से बच्चों के बीच अलगाव बढ़ सकता है. दूसरी ओर, शिक्षा मंत्री ग्यूसेप वल्दितारा ने भाषा की पर्याप्त जानकारी को शैक्षणिक प्रगति से जोड़ते हुए सरकार के फैसले का समर्थन किया है. नई डिक्री अब इटली की संसद की प्रक्रिया से गुजरेगी. डिक्री-लॉ को कानून का स्थायी रूप देने के लिए संसद से निर्धारित अवधि में मंजूरी जरूरी होगी.
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