IND vs WI: विराट कोहली के पास इतिहास रचने का मौका, एक और शतक लगाते ही अपने ही वर्ल्ड रिकॉर्ड को करेंगे डबल
india vs west indies: भारत के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली 27 सितंबर से वेस्टइंडीज के खिलाफ शुरू होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज से मैदान पर वापसी करेंगे। टेस्ट और टी20 इंटरनेशनल से संन्यास ले चुके कोहली अब सिर्फ वनडे फॉर्मेट में खेल रहे हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ उनका रिकॉर्ड पहले ही बेहद शानदार है और आगामी सीरीज में वह इसे और खास बना सकते हैं।
वेस्टइंडीज के खिलाफ जबरदस्त रिकॉर्ड
कोहली ने वेस्टइंडीज के खिलाफ अब तक 41 वनडे पारियों में 2,261 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका औसत 66.50 और स्ट्राइक रेट 96.95 रहा है। खास बात यह है कि वेस्टइंडीज के खिलाफ किसी भी बल्लेबाज ने अब तक 2,000 रन का आंकड़ा पार नहीं किया है।
सिर्फ एक शतक...
सिर्फ रन ही नहीं, शतकों के मामले में भी कोहली का रिकॉर्ड जबरदस्त है। उन्होंने कैरेबियाई टीम के खिलाफ 9 वनडे शतक लगाए हैं, जो किसी भी बल्लेबाज से ज्यादा हैं। इसके अलावा उनके नाम वेस्टइंडीज के खिलाफ 20 बार 50 प्लस स्कोर हैं। अब अगर वह सीरीज में एक और शतक लगा देते हैं तो उनके 10 शतक पूरे हो जाएंगे।
कोहली पहले ही श्रीलंका के खिलाफ 10 वनडे शतक लगाने वाले दुनिया के इकलौते बल्लेबाज हैं। ऐसे में वेस्टइंडीज के खिलाफ 10वां शतक उन्हें दो अलग-अलग टीमों के खिलाफ 10 या उससे ज्यादा वनडे शतक लगाने वाला पहला बल्लेबाज बना देगा।
भारत में भी वेस्टइंडीज के खिलाफ कोहली का बल्ला खूब चला है। उन्होंने 23 मैचों में 1,265 रन बनाए हैं। उनका औसत 63.25 और स्ट्राइक रेट 100.95 है। इस दौरान उन्होंने 5 शतक और 6 अर्धशतक लगाए हैं। 2018 की वनडे सीरीज में तो कोहली ने लगातार तीन मैचों में शतक जड़ दिए थे। वेस्टइंडीज के खिलाफ द्विपक्षीय वनडे सीरीज में पाकिस्तान के बाबर आजम भी ऐसा कर चुके हैं।
कोहली के ओवरऑल वनडे रिकॉर्ड पर नजर डालें तो वह 302 पारियों में 14,941 रन के साथ सबसे ज्यादा वनडे रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में दूसरे नंबर पर हैं। उनसे आगे सिर्फ सचिन तेंदुलकर हैं, जिनके नाम 18,426 रन हैं। कोहली के नाम वनडे में 54 शतक और 76 अर्धशतक हैं। भारत में उन्होंने 130 वनडे मैचों में 6,867 रन बनाए हैं और उनका औसत 62.42 है।
अब 27 सितंबर से शुरू होने वाली सीरीज में कोहली के पास इन आंकड़ों में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ने का मौका होगा।
UP वालों को कट्टे, गैंगवार और परिवारवाद वाले राज की याद दिलाकर सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा तय कर गये Amit Shah
उत्तर प्रदेश की राजनीति चुनावी मोड में प्रवेश कर चुकी है। एक तरफ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों और राजनीतिक प्रभाव को लेकर खींचतान के संकेत दिखाई दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ ग्रेटर नोएडा में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था, उद्योग और वैश्विक व्यापार का बड़ा मंच सजाया गया है। इसी माहौल में उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनी के चौथे संस्करण का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के विकास की तस्वीर पेश की। दोनों नेताओं के भाषणों में साफ तौर पर कानून-व्यवस्था, निवेश, विनिर्माण, निर्यात और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने को प्रमुखता दी गई।
अमित शाह ने अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश के पुराने और वर्तमान औद्योगिक परिदृश्य की तुलना करते हुए कहा कि कभी यहां अपराध की उद्योग जैसी व्यवस्था की चर्चा होती थी, शहरों में वाहन चोरी के कुटीर उद्योग और अवैध कट्टा निर्माण की बात होती थी, लेकिन आज उसी प्रदेश में कट्टा उद्योग की जगह रक्षा गलियारा, वाहन चोरी की जगह वाहन निर्माण और चेन झपटमारी की जगह चिकित्सा उपकरण पार्क दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार के दौर में कानून-व्यवस्था, औद्योगिक नीति और निवेश के अनुकूल वातावरण ने उत्तर प्रदेश को निवेश के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित किया है।
गृह मंत्री ने उत्तर प्रदेश के छह रक्षा गलियारा केंद्रों- झांसी, चित्रकूट, लखनऊ, आगरा, अलीगढ़ और कानपुर, का उल्लेख करते हुए रक्षा उत्पादन में प्रदेश की भूमिका रेखांकित की। उन्होंने कहा कि देश का रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है और रक्षा निर्यात में 2013-14 की तुलना में 56 गुना वृद्धि हुई है। अमेठी में एके-203 राइफल के निर्माण का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे बदलते औद्योगिक वातावरण का उदाहरण बताया।
अमित शाह ने एक जनपद-एक उत्पाद योजना को भी रोजगार और उद्यम से जोड़ते हुए भदोही के कालीन, फिरोजाबाद के कांच, सहारनपुर की काष्ठ कला, कन्नौज के इत्र और वाराणसी की रेशमी साड़ियों का उल्लेख किया। उनका कहना था कि जिन युवाओं को कभी रोजगार के लिए प्रदेश से बाहर जाना पड़ता था, उनके लिए अब उत्तर प्रदेश में ही रोजगार और उद्यम के अवसर बढ़ रहे हैं।
वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसी तस्वीर को आगे बढ़ाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के उत्पादों, मजबूत आपूर्ति शृंखला और उद्यमियों की विश्वसनीयता पर दुनिया का भरोसा बढ़ रहा है।
योगी ने कहा कि प्रदेश में संभावनाओं की कभी कमी नहीं थी, जरूरत थी हुनर को सही माहौल और बाजार से जोड़ने की। उन्होंने पारंपरिक प्रतिभा और तकनीक के मेल को उत्तर प्रदेश की नई आर्थिक पहचान से जोड़ा। उन्होंने कहा कि 79 उत्पादों को भौगोलिक संकेतक प्रमाणन मिल चुका है और 75 अन्य उत्पादों के लिए आवेदन किया गया है। एक जनपद-एक उत्पाद, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा और विश्वकर्मा श्रम सम्मान जैसी योजनाओं के जरिए कारीगरों को प्रशिक्षण, उपकरण, ऋण और बाजार से जोड़ने का दावा भी उन्होंने किया।
हम आपको बता दें कि इस बार व्यापार प्रदर्शनी में 90 देशों से 600 से अधिक विदेशी खरीदारों के पहुंचने और करीब डेढ़ लाख कारोबारी आगंतुकों के आने की संभावना जताई गई है। आयोजन में 2,400 से अधिक प्रदर्शक शामिल हैं।
दूसरी ओर इन आर्थिक दावों के बीच उत्तर प्रदेश का राजनीतिक मैदान भी गर्म है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 24 सितंबर को रायबरेली से अपनी पीडीए रथयात्रा शुरू की। खास बात यह रही कि रायबरेली कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का लोकसभा क्षेत्र है। अखिलेश ने यात्रा के दौरान कांग्रेस के साथ गठबंधन को मजबूत बताया, लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर राजनीतिक खींचतान की चर्चा भी जारी है।
कांग्रेस की ओर से भी इस पर प्रतिक्रिया आई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने अखिलेश की रायबरेली यात्रा के संदर्भ में कहा कि कांग्रेस भी सैफई और कन्नौज जा सकती है। यानी गठबंधन के भीतर ही राजनीतिक प्रभाव और जमीन को लेकर संदेशों का आदान-प्रदान तेज हो चुका है।
यही उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनीति का दिलचस्प विरोधाभास है। एक तरफ चुनावी यात्राएं, सामाजिक समीकरण, गठबंधन और सीटों की बातचीत है; दूसरी तरफ सरकार ग्रेटर नोएडा से प्रदेश के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंचाने का मंच तैयार कर रही है। एक तरफ विपक्ष अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटा है, तो दूसरी तरफ योगी सरकार व्यापार, निर्यात, विनिर्माण और निवेश के आंकड़ों के जरिए अपनी विकास आधारित राजनीति को सामने रख रही है।
देखा जाये तो उत्तर प्रदेश में 2027 की चुनावी लड़ाई आखिरकार किस मुद्दे पर केंद्रित होगी, यह आने वाला समय तय करेगा। फिलहाल तस्वीर में दो अलग-अलग राजनीतिक आख्यान आमने-सामने हैं। एक ओर सामाजिक और चुनावी समीकरणों की कवायद और दूसरी ओर विकास, निवेश, रोजगार तथा वैश्विक बाजार में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी बढ़ाने का दावा है। ग्रेटर नोएडा का व्यापार प्रदर्शनी मंच इसी दूसरे आख्यान को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने पेश करता दिखाई दे रहा है।
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