Fiji Sugar Corporation को भारत से मिले 12 Agricultural Drones, खेती में बढ़ेगी तकनीक
फ़िजी में भारत के हाई कमिश्नर सुनीत मेहता ने लॉटोका में फ़िजी के कृषि, जलमार्ग और चीनी उद्योग मंत्री टोमासी ट्यूनाबुना को 12 एग्रीकल्चरल ड्रोन सौंपे। इसका मकसद पूरे देश में ज़्यादा कुशल, टेक्नोलॉजी-आधारित और टिकाऊ गन्ने की खेती को बढ़ावा देना है। ये एग्रीकल्चरल ड्रोन भारत सरकार ने फ़िजी शुगर कॉर्पोरेशन को तोहफ़े में दिए थे। इससे पिछले साल अगस्त में फ़िजी के प्रधानमंत्री सिटिवेनी राबुका की नई दिल्ली यात्रा के दौरान किए गए वादे को सफलतापूर्वक पूरा किया गया। फ़िजी में भारतीय हाई कमीशन ने एक्स पर पोस्ट किया, हाई कमिश्नर सुनीत मेहता ने लॉटोका में कृषि, जलमार्ग और चीनी उद्योग मंत्री माननीय टोमासी ट्यूनाबुना को भारत सरकार की ओर से फ़िजी शुगर कॉर्पोरेशन (FSC) को तोहफ़े में दिए गए 12 एग्रीकल्चरल ड्रोन औपचारिक रूप से सौंपे।
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यह हैंडओवर अगस्त 2025 में भारत की यात्रा के दौरान माननीय प्रधानमंत्री सिटिवेनी राबुका द्वारा की गई घोषणा को पूरा करता है और कृषि तथा चीनी क्षेत्र में भारत-फिजी की लंबे समय से चली आ रही और कई तरह की साझेदारी को दिखाता है। बीजों और मोबाइल मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं से लेकर ITEC के तहत कानपुर के नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट में फिजी के गन्ना किसानों के लिए विशेष प्रशिक्षण तक, भारत का सहयोग तकनीक, ज्ञान और क्षमता-निर्माण को एक साथ लाता है, इसमें आगे कहा गया। बयान के अनुसार, इन 12 ड्रोनों से फिजी में गन्ने के उत्पादन की दक्षता, तकनीकी एकीकरण और स्थिरता में सुधार होने की उम्मीद है। भारतीय उच्चायोग ने कहा कि भारत कृषि नवाचार, उत्पादकता और लचीलेपन को बढ़ाने के लिए फिजी के साथ सहयोग करना जारी रखे हुए है, जिससे एक ऐसी स्थायी साझेदारी मजबूत हो रही है जिसका लाभ फिजी के किसानों और स्थानीय समुदायों को मिलता है। इससे पहले, 8 सितंबर को सुनीत मेहता ने फिजी के उप प्रधानमंत्री मनोआ कामिकामिका से मुलाकात की, जहाँ कृषि, स्वास्थ्य, व्यापार, कारोबार और अर्थव्यवस्था में द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा हुई।
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फिजी में भारत के हाई कमिश्नर सुनीत मेहता ने फिजी के डिप्टी प्राइम मिनिस्टर और इंडस्ट्री, कॉमर्स, बिज़नेस डेवलपमेंट और पब्लिक एंटरप्राइज़ेज़ मिनिस्टर माननीय मनोआ कामिकामिका से मिलकर खुशी जताई। फिजी में भारतीय हाई कमीशन ने एक्स पर पोस्ट किया कि इस मीटिंग में भारत और फिजी की पुरानी और कई तरह की पार्टनरशिप को और मज़बूत करने के तरीकों पर चर्चा करने का मौका मिला। इसमें खेती, स्वास्थ्य, व्यापार, बिज़नेस और आर्थिक सहयोग जैसे आपसी हित के कई मुद्दों पर बातचीत हुई।
Iran ने US के सामने रखा 7-Day Plan, Strait of Hormuz खोलने और शांति वार्ता की रखी शर्त
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने कहा है कि ईरान ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए सात दिन का प्लान पेश किया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस प्लान का मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना और उसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक बातचीत शुरू करना भी है। अरागची ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पत्रकारों को बताया कि यह प्रस्ताव उसी MoU (समझौता ज्ञापन) जैसा है, जिस पर इस साल जून में अमेरिका और ईरान के बीच सहमति बनी थी। NYT की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा हमने बिचौलियों के ज़रिए अमेरिका के सामने एक प्लान रखा है कि अगर कुछ शर्तें पूरी होती हैं, तो सातवें दिन के आखिर तक होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोल दिया जाएगा और बातचीत फिर से शुरू हो जाएगी... बेहतर होगा कि अमेरिका में मध्यावधि चुनावों से पहले कोई समझौता हो जाए।" इससे पहले, जर्मन विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के साथ अपनी बैठक में, अरागची ने ज़ोर देकर कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान ने कूटनीति को आगे बढ़ाने के लिए अपनी उचित शर्तें और ज़रूरतें अमेरिकी पक्ष को बता दी हैं।
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उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि क्षेत्र में सुरक्षा बहाल करने के लिए ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका की दखलंदाज़ी और आक्रामक कार्रवाइयों को रोकना ज़रूरी है। ईरानी विदेश मंत्री ने अपने शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को लेकर कूटनीति को आगे बढ़ाने के ईरान के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान कोई भी पक्ष ईरान की नेक नीयत को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता, और न ही बातचीत के बीच ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका और इज़राइल की सैन्य आक्रामकता को अनदेखा किया जा सकता है, जबकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में असुरक्षा के लिए ईरान को ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है।
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अरागची ने जर्मनी समेत यूरोपीय देशों की आलोचना की कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन और अमेरिका की दादागिरी वाली हरकतों को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर तेहरान का रुख़ स्पष्ट करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र में भरोसा बहाल करने के लिए सभी देशों को UN चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों और उद्देश्यों का पालन करना होगा। इस बीच, फॉक्स न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने इस साल जून में दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते को लागू न कर पाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी पक्ष को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने फॉक्स न्यूज से कहा कि हमने आपके राष्ट्रपति के साथ एक समझौता किया था, उस समझौते पर हस्ताक्षर भी हुए थे, और उसी के आधार पर हम आगे बढ़ना चाहते हैं। उस समझौते के ढांचे पर भी सहमति बनी थी। हमने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद नहीं किया था; वह खुला था। बिना किसी कानूनी आधार या ढांचे के... उन्होंने हम पर हमला किया। उन्होंने हमारे सम्मानित सर्वोच्च नेता की हत्या कर दी; हमारे वैज्ञानिकों, सैन्य कमांडरों और सरकार को निशाना बनाया। समस्या यह है कि बातचीत करने के बजाय, अमेरिका सीधे बमबारी करके और हर रास्ते को रोककर टकराव पर उतर आता है। हम तैयार हैं।
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