टीम इंडिया के लिए आई बड़ी खुशखबरी, T20 World Cup 2026 से पहले होगी इस खतरनाक खिलाड़ी की वापसी
T20 World Cup 2026: भारतीय क्रिकेट टीम न्यूजीलैंड के साथ पांच मैचों की टी20 सीरीज खेल रही है. इस सीरीज के बाद टीम इंडिया सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में आईसीसी मेंस टी20 वर्ल्ड कप अपने घर पर खेलने वाली है. क्रिकेट का महाकुंभ 7 फरवरी से खेला जाने वाला है, भारत अपने ग्रुप स्टेज का एक मैच पाकिस्तान के साथ श्रीलंका में खेलेगा. इस टूर्नामेंट की शुरुआत से पहले टीम इंडिया को 2 बड़े झटके तब लगे, जब वर्ल्ड कप टीम का हिस्सा बने हुए खिलाड़ी तिलक वर्मा और वाशिंगटन सुंदर चोटिल हो गए.
भारत के लिए आई खुशखबरी
इसके बाद से इन दोनों के टी20 वर्ल्ड कप 2026 से बाहर पर सवाल उठ रहे थे. लेकिन अब एक ऐसा खबर सामने आई है, जो भारतीय क्रिकेट फैंस के चेहरों पर खुशी ले आएगी. दरअसल टीम इंडिया के बाएं हाथ के भरोसेमंद बल्लेबाज तिलक वर्मा जल्द ही फिट होकर टीम में लौट सकते हैं. तिलक भारत के लिए नंबर 3 पर लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं.
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पहुंचे तिलक
ऐसे में टी20 वर्ल्ड कप 2026 के स्क्वाड में उनका होना भारतीय क्रिकेट टीम के लिए काफी महत्वपूर्ण होने वाला है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार तिलक को अब कोई दर्द नहीं हो रहा है. वो फिटनेस टेस्ट और आगे के असेसमेंट के लिए बेंगलुरु स्थिति सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पहुंच चुके हैं. अब वो अपने रिहैब से गुजरेंगे और मैच फिट होने के लिए तैयारी करेंगे.
???? TILAK VARMA RECOVERY BOOST FOR TEAM INDIA ????
— Sam (@Cricsam01) January 20, 2026
-Big relief! Tilak Varma is pain-free and back at the BCCI CoE in Bengaluru.
His fast recovery after Jan 7 surgery is great news for the 2026 T20 WC. ????????????
He could return in the 4th T20I vs NZ (Jan 28). pic.twitter.com/Fw8YW4qOGh
तिलक जल्द शुरू करेंगे बल्लेबाजी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, तिलक वर्मा ने फिजिकल ट्रेनिंग स्टार्ट कर दी है. उन्होंने अभी बल्लेबाजी शुरू नहीं की है. वो एक-दो दिन के बाद बैटिंग और अन्य स्किल बेस्ट एक्टिविटीज भी स्टार्ट कर देंगे. अगर तिलक जल्द फिट हो जाते हैं तो वो 28 जनवरी को विशाखापत्तनम में न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाले चौथे टी20 मैच में टीम इंडिया के लिए वापसी कर सकते हैं.
आपको बता दें कि, विजय हजारे ट्रॉफी में 6 जनवरी को मैच के बाद तिलक को दर्द महसूस हुआ. इसके बाद जब उनका स्कैन हुआ तो सर्जरी कराने की सलाह दी गई. इसके बाद तिलक वर्मा को तीन मैचों के लिए बाहर कर दिया गया और उनकी जगह पर श्रेयस अय्यर को टी20 टीम में मौका दिया गया.
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इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार 2025 की घोषणा, अंतरराष्ट्रीय जूरी ने ग्रासा माशेल को चुना
नई दिल्ली, 21 जनवरी (आईएएनएस)। इंदिरा गांधी शांति, निरस्त्रीकरण और विकास पुरस्कार 2025 की घोषणा कर दी गई है। अंतरराष्ट्रीय जूरी ने इस वर्ष यह प्रतिष्ठित सम्मान अफ्रीका की जानी-मानी राजनेता, समाजसेवी और मानवाधिकार कार्यकर्ता ग्रासा माशेल को देने का फैसला किया है।
इस जूरी की अध्यक्षता भारत के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और पूर्व विदेश सचिव शिवशंकर मेनन कर रहे हैं।
जूरी के अनुसार, ग्रासा माशेल का पूरा जीवन आत्म-शासन के संघर्ष, मानवाधिकारों की रक्षा और कमजोर वर्गों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए समर्पित रहा है। उनका लक्ष्य हमेशा एक न्यायपूर्ण और समान समाज का निर्माण करना रहा है, जिसमें हर व्यक्ति को सम्मान और अवसर मिल सके।
ग्रासा माशेल का जन्म 17 अक्टूबर 1945 को मोजाम्बिक के एक ग्रामीण इलाके में ग्रासा सिम्बिने के रूप में हुआ था। उन्होंने मेथोडिस्ट मिशन स्कूलों में पढ़ाई की और बाद में जर्मन भाषा का अध्ययन करने के लिए लिस्बन विश्वविद्यालय में छात्रवृत्ति प्राप्त की।
वहीं उनके भीतर स्वतंत्रता और राजनीति के प्रति जागरूकता पैदा हुई। 1973 में मोजाम्बिक लौटने के बाद उन्होंने मोजाम्बिक लिबरेशन फ्रंट से जुड़कर स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया और शिक्षक के रूप में भी काम किया।
1975 में देश को आजादी मिलने के बाद ग्रासा माशेल मोजाम्बिक की पहली शिक्षा और संस्कृति मंत्री बनीं। उनके कार्यकाल में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिला। प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर छात्रों की भागीदारी में भारी बढ़ोतरी हुई, जहां लड़कों की संख्या 40 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत से अधिक और लड़कियों की भागीदारी 75 प्रतिशत तक पहुंच गई।
1990 के दशक में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर काम करना शुरू किया। संयुक्त राष्ट्र ने उन्हें सशस्त्र संघर्ष का बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव पर एक अहम अध्ययन का नेतृत्व सौंपा। 1996 में आई उनकी रिपोर्ट द इम्पैक्ट ऑफ आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट ऑन चिल्ड्रन ने युद्ध क्षेत्रों में संयुक्त राष्ट्र और उसके सदस्य देशों के काम करने के तरीके को नई दिशा दी। इस योगदान के लिए उन्हें 1997 में संयुक्त राष्ट्र का नैनसेन शरणार्थी पुरस्कार और ब्रिटेन का मानद डेम कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर सम्मान मिला।
ग्रासा माशेल कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से भी जुड़ी रहीं। वह द एल्डर्स की संस्थापक सदस्य हैं और गर्ल्स नॉट ब्राइड्स की स्थापना में भी उनकी अहम भूमिका रही है। वह संयुक्त राष्ट्र महासचिव के सतत विकास लक्ष्य सलाहकार समूह की सदस्य भी हैं। इसके अलावा, वह अफ्रीका चाइल्ड पॉलिसी फोरम की संरक्षक और मंडेला इंस्टीट्यूट फॉर डेवलपमेंट स्टडीज की अध्यक्ष हैं, जहां वह बच्चों और युवाओं के हित में नीतियां बनाने और लागू करने में योगदान देती हैं।
हाल के वर्षों में उन्होंने सामाजिक परिवर्तन पर विशेष ध्यान दिया है। वर्ष 2010 में उन्होंने ग्रासा माशेल ट्रस्ट की स्थापना की, जो महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण, खाद्य सुरक्षा और सुशासन को बढ़ावा देता है। उन्होंने जिजिले इंस्टीट्यूट फॉर चाइल्ड डेवलपमेंट की भी शुरुआत की। 2018 में उन्हें महिलाओं और किशोरों के स्वास्थ्य के लिए किए गए कार्यों के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन का सर्वोच्च सम्मान, डब्ल्यूएचओ गोल्ड मेडल, प्रदान किया गया।
जूरी ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण, आर्थिक सशक्तिकरण और कठिन परिस्थितियों में किए गए मानवीय कार्यों के जरिए ग्रासा माशेल ने लाखों लोगों को एक अधिक न्यायपूर्ण और समान दुनिया बनाने की प्रेरणा दी है। इसी असाधारण योगदान के लिए उन्हें इंदिरा गांधी शांति, निरस्त्रीकरण और विकास पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया जा रहा है।
--आईएएनएस
वीकेयू/एएस
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