Mumbai में वायु प्रदूषण के मुद्दे पर 23 जनवरी को सुनवाई होगी : उच्च न्यायालय
मुंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह महानगर में ‘‘मध्यम’’ स्तर की वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) से संतुष्ट नहीं है और कहा कि वह वायु प्रदूषण के मुद्दे पर 23 जनवरी को विचार करेगा।
अदालत ने तीन साल पहले देश की वित्तीय राजधानी में बिगड़ते वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) का स्वतः संज्ञान लिया था और समय-समय पर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) से इस समस्या से निपटने के लिए उपाय करने को कहा है।
मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति सुमन श्याम की पीठ ने शहर में वर्तमान वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के बारे में जानकारी मांगी। बीएमसी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एस यू कामदार ने बताया कि एक्यूआई 100 से 140 के बीच मध्यम स्तर का है।
वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के आंकड़ों से स्पष्ट रूप से असंतुष्ट होते हुए अदालत ने टिप्पणी की, ‘‘हम मध्यम स्तर से संतुष्ट नहीं हैं।’’ कामदार ने दलील दी कि बीएमसी ने वायु प्रदूषण की स्थिति को सुधारने के लिए कदम उठाए हैं और एक हलफनामा प्रस्तुत किया। अदालत ने कहा कि वह शुक्रवार को इस मुद्दे पर विचार करेगी।
Madhya Pradesh: बाघों की मौत पर उच्च न्यायालय गंभीर, केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य में बाघों की मौत के लगातार बढ़ते आंकड़ों पर गंभीरता जताते हुए मंगलवार को केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। अदालत ने वन्य जीव कार्यकर्ता अजय दुबे की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह नोटिस जारी किया।
याचिका में ‘टाइगर स्टेट’ मध्यप्रदेश में बाघों के जीवन असुरक्षित होने को चुनौती देते हुए बताया गया कि सिर्फ साल 2025 में राज्य में सबसे अधिक 54 बाघों की मौत हुई है।
याचिका में बताया गया कि ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ की शुरुआत के बाद से एक साल में सबसे ज्यादा बाघों की मौत हुई है और इनमें से 57 प्रतिशत की मौत का कारण अप्राकृतिक है। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की पीठ ने याचिका को गंभीरता से लेते हुए केन्द्र व राज्य सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से जवाब तलब किया।
याचिका में राज्य में बाघों के शिकार को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने, विशेषज्ञों की सिफारिशों को तुरंत लागू करने और संबंधित अधिकारियों के बीच तालमेल स्थापित करने के निर्देश देने का भी आग्रह किया गया।
याचिका में बताया गया कि दुनिया में बाघों की कुल आबादी 5,421 है, जिसमें से भारत में 3167 बाघ हैं, जिसमें से लगभग 25 प्रतिशत आबादी यानी 785 बाघ मध्यप्रदेश में हैं।
दुबे ने याचिका में बताया गया कि साल 2025 में मध्यप्रदेश में 54 बाघों की मौत हुई है जबकि 2022 में 43, 2023 में 45 और 2024 में 46 मौतें हुई थीं।याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सांघी तथा अलका सिंह ने पैरवी की।
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