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हैदराबाद में फूड सेफ्टी विभाग की कार्रवाई, 8 रेस्टोरेंट्स के FSSAI लाइसेंस किए सस्पेंड

देश में जगह-जगह फूड सेफ्टी और खान-पान में साफ-सफाई को लेकर कार्रवाई हो रही है. अब फूड सेफ्टी विभाग की कार्रवाई की जद में हैदराबाद के कई रेस्टोरेंट आ गए हैं. यहां साफ-सफाई में गंभीर कमियां सामने आईं हैं. रेस्टोरेंट में कमियों को देखते हुए तेलंगाना स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी फॉर फूड एंड एसेंशियल ड्रग्स ने 8 जगहों के FSSAI लाइसेंस सस्पेंड कर दिए हैं. उनको तुरंत बंद करने का आदेश दे दिया गया है. 

हैदराबाद में 8 रेस्टोरेंट के लाइसेंस रद

फूड सेफ्टी अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की आठ टीमों ने गुरुवार को हैदाराबाद के मुख्य शहरी इलाकों में 15 जगहों का निरीक्षण किया है. अधिकारियों ने मिलावट के शक में खाने के 16 सैंपल लिए और कई आउटलेट्स पर कीड़े और मकोड़े, एक्सपायर्ड खाना, किचन में साफ-सफाई की कमी और गंदगी पाई गई.

इन-इन रेस्टोरेंट्स में हुई कार्रवाई

अधिकारी जब हैदराबाद इलाके के रायदुर्ग में पकवान ग्रैंड रेस्टोरेंट में पहुंचे, तब वहां उन्होंने 1,170 किलो एक्सपायर्ड चावल और 45 किलो नूडल्स मिले, जिन पर लेबलिंग में गड़बड़ी थी. रेस्टोरेंट में खराब अंडे, चूहों का आतंक और गंदी हालत में रेफ्रिजरेटर भी पाए गए. इसके अलावा, टीम ने 'गर्ल फ्रेंड मंडी', 'ईट क्लब ब्रांड्स' के 'बॉक्स 8' और 'मोजो पिज्जा' आउटलेट, 'सीजन्स एक्सप्रेस' और 'यमी बी' में भी छापेमारी की और सुधार के लिए इन्हें नोटिस भेजा जाएगा. इसके अलावा, पुप्पलगुडा स्थित 'आसा नियो इंडियन किचन' के खिलाफ भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. प्रस्ताव है कि अगर दोबारा गड़बड़ी मिलती है तो जुर्माना लगाने की कार्रवाई भी की जा सकती है. अधिकारियों ने साइबराबाद के ही गचीबोवली में 'अरोमा मल्टी-कुजीन रेस्टोरेंट' का लाइसेंस भी सस्पेंड कर दिया है. यहां कॉकरोच और चूहों का भारी आतंक, कीड़ों से दूषित खाना, एक्सपायर्ड फूड प्रोडक्ट्स और परिसर में बिल्लियां मिलीं. इस होटल में जरूरी पेस्ट-कंट्रोल और फूड-हैंडलर के हेल्थ रिकॉर्ड भी नहीं रखे गए थे.  

अन्य जिन जगहों के FSSAI लाइसेंस सस्पेंड किए गए, उनमें सफिलगुडा में 'आदित्य रेस्टोरेंट एंड बार', बेगम बाजार में 'वैष्णवी दर्शनी', कोठापेट में 'स्पाइसी हब' (ग्रीन ट्रीट रेस्टोरेंट), हफीजपेट में 'गोदावरी घुमाघुमालु', गोपनपल्ली में 'श्री कृष्णा फैमिली ढाबा प्योर वेज' और कोंडापुर में 'श्री साई मेस' (जो 'बाबाई होटल' की एक यूनिट है) शामिल हैं.

 

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दवा की पर्ची पर हिंदी को तरजीह दें डॉक्टर, मरीज से मातृभाषा में करें संवाद : ब्रजेश पाठक

लखनऊ, 25 सितंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने चिकित्सकों से अपील की है कि वे मरीजों को लिखी जाने वाली दवाओं और जांचों के नाम हिंदी अथवा देवनागरी लिपि में लिखें, ताकि मरीज को यह स्पष्ट रूप से पता हो कि उसे कौन सी दवा दी जा रही है। उन्होंने चिकित्सकों से मरीजों के साथ उनकी मातृभाषा और स्थानीय बोलियों में संवाद करने का भी आग्रह किया है।

ब्रजेश पाठक ने चिकित्सक समुदाय के नाम जारी अपील में कहा कि वह उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के रूप में ही नहीं, बल्कि एक हिंदी प्रेमी भारतीय के नाते डॉक्टरों से यह आग्रह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह व्यक्तिगत स्तर पर उन दवाओं को प्राथमिकता देंगे, जिनके नाम हिंदी में लिखे होंगे। उन्होंने कहा कि चिकित्सा व्यवस्था में लोकभाषाओं का इस्तेमाल बढ़ने से मरीज डॉक्टर की सलाह और उपचार को बेहतर ढंग से समझ सकेगा। इससे मरीज और चिकित्सक के बीच विश्वास भी मजबूत होगा।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र, लोकभाषा और लोकभावना से मजबूत होता है। राष्ट्रीय एकता भी हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के सशक्त होने से मजबूत होगी। उन्होंने चिकित्सकों से आग्रह किया कि यदि वे भोजपुरी, अवधी और अन्य मातृभाषाओं में मरीजों से संवाद करेंगे तो उनकी बात मरीजों को अधिक सहजता से समझ आएगी और चिकित्सा व्यवस्था पर उनका भरोसा बढ़ेगा। ब्रजेश पाठक ने भारतीय भाषाओं के प्रयोग के संदर्भ में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसर भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का संकल्प लेने के लिए प्रेरित करते हैं।

उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री विदेशों में भी हिंदी और भारतीय भाषाओं में जनसंवाद करते हैं। चिकित्सकों को भी राष्ट्रनायकों और महापुरुषों के कार्यों तथा विचारों से प्रेरणा लेकर चिकित्सा क्षेत्र में देशज भाषाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहिए। मरीज के लिए इलाज केवल दवा तक सीमित नहीं है, बल्कि डॉक्टर की बात को समझना और उस पर भरोसा करना भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में चिकित्सा क्षेत्र में सरल और मरीज की समझ वाली भाषा का अधिक इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

ब्रजेश पाठक ने चिकित्सकों से हिंदी तथा स्थानीय भाषाओं के प्रयोग को व्यवहार का हिस्सा बनाने का आग्रह करते हुए कहा कि इससे चिकित्सा सेवाओं और आम मरीज के बीच संवाद की दूरी कम होगी। यह कॉपी उपलब्ध अपील के मूल भाव को रखते हुए एजेंसी शैली में व्यवस्थित की गई है। इसी मुद्दे पर आज प्रकाशित रिपोर्ट भी डॉक्टरों से दवा/जांच के नाम हिंदी-देवनागरी में लिखने और मातृभाषा में संवाद की अपील की पुष्टि करती है।

--आईएएनएस

विकेटी/एसके

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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