सिर्फ 100 ग्राम की कीमत ₹100, पहाड़ के फूल से बनती है खास हर्बल चाय, देशभर में ग्राहक
Business Success Story: झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाले नीरज ने करीब 40 साल नौकरी करने और दिल्ली में MBA के बाद अच्छी नौकरी करने के बावजूद अपना कारोबार शुरू करने का फैसला किया. पैतृक गांव उत्तराखंड की जमीन और पहाड़ी संसाधनों से उन्होंने बुरांश, कफल और मसाला चाय जैसी हर्बल टी तैयार कर ब्रांड बनाया, जिसमें बुरांश की चाय करीब ₹1,000 किलो तक बिकती है. इसके साथ वह प्राकृतिक सिल्क के कपड़े और भेड़ पालन से जुड़े उत्पाद भी तैयार करते हैं. नीरज के मुताबिक, उनके प्रोडक्ट देशभर में सप्लाई होते हैं और कारोबार का सालाना टर्नओवर करोड़ों रुपये में है. खास बात यह है कि उनके साथ 200 से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं, जिन्हें इन उत्पादों की तैयारी और पैकेजिंग का प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा गया है.
Pitru Paksha Pret Dosh 2026: अकाल मृत्यु वालों के लिए गयाजी से पहले काशी में श्राद्ध क्यों है अनिवार्य! क्या है आत्मा का पितृ योनी में जाने से संबंध?
Pitru Paksha Pret Dosh 2026: अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए लोगों के लिए श्राद्ध का विशेष महत्व है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि गयाजी से पहले काशी में श्राद्ध करना क्यों अनिवार्य माना जाता है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसका संबंध आत्मा के पितृ योनि में जाने से है. इस परंपरा के पीछे क्या गूढ़ रहस्य छिपे हैं और यह किस प्रकार मृत आत्माओं को शांति प्रदान करता है, आइए जानते हैं.
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