भारत के साथ संबंध बेहतरीन, राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बीच व्यावहारिक रुख अपना रहा Nepal: शिशिर खनाल
(योषिता सिंह) न्यूयॉर्क, 25 सितंबर नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत के साथ नेपाल के संबंधों को ‘बेहतरीन’ करार दिया और कहा कि राजनीतिक मोर्चे पर ‘उतार-चढ़ाव’ आते रहते हैं लेकिन काठमांडू नयी दिल्ली के साथ संबंधों में ‘व्यावहारिक’ दृष्टिकोण अपना रहा है और चुनौतियों के बजाय अवसरों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। खनाल ने बृहस्पतिवार को ‘एशिया सोसाइटी’ में एक चर्चा के दौरान कहा, ‘‘हमारे बीच कई उच्चस्तरीय यात्राएं हुई हैं और यहां न्यूयॉर्क में भी मेरी भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात हुई है।’’ एशिया सोसाइटी के वैश्विक अध्यक्ष एवं सीईओ केविन रुड ने खनाल से सवाल किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भारत सरकार के बालेंद्र शाह सरकार के साथ संबंध कैसे हैं जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत के संबंध ‘बहुआयामी’ हैं और काठमांडू के कुल व्यापार का लगभग दो-तिहाई व्यापार भारत के साथ होता है। उन्होंने कहा, ‘‘दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध भी बेहद मजबूत हैं।
राजनीतिक मोर्चे पर कभी-कभी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है लेकिन मेरा मानना है कि इस समय हमारे संबंध बेहरतीन हैं।’’ जयशंकर ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन परिसर में खनाल के साथ वार्ता की। दोनों नेताओं ने इस साल जून में दिल्ली में हुई पिछली मुलाकात के बाद द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति पर चर्चा की, जिसमें विकास साझेदारी और ऊर्जा सहयोग भी शामिल था। जब खनाल से पूछा गया कि नेपाल नयी दिल्ली और बीजिंग के बीच भू-राजनीतिक संतुलन कैसे साध रहा है तो उन्होंने कहा कि अतीत में नेपाली राजनीति में मौजूद वैचारिक मतभेद पड़ोसी देशों के साथ संबंधों में भूमिका निभाते थे।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने इस बात पर विशेष ध्यान दिया है कि अपने संबंधों को अत्यधिक वैचारिक नजरिये से देखने के बजाय सहयोग के व्यावहारिक क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाए।’’ उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ संबंधों में सीमा जैसे विवादास्पद मुद्दे स्वाभाविक रूप से होते हैं लेकिन चुनौतियां कहां हैं, इस पर ध्यान देने के बजाय ‘‘हमारा मौजूदा दृष्टिकोण यह देखना है कि अवसर कहां हैं। भारत के साथ भी हम इसी व्यावहारिक दृष्टिकोण को अपनाने की कोशिश कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ऊर्जा व्यापार में वास्तव में सकारात्मक गति देखने को मिल रही है, क्योंकि हमारी अर्थव्यवस्था आयात पर बहुत अधिक निर्भर है। हम लगभग हर चीज आयात करते हैं।’’ इससे पहले ‘एशिया सोसाइटी’ में अपने शुरुआती संबोधन में खनाल ने कहा कि भारत और चीन जैसे महाद्वीपीय दिग्गजों के बीच स्थित होने के कारण नेपाल स्वाभाविक रूप से छोटा दिखाई देता है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पड़ोसियों का आकार, भूगोल की वास्तविकता है, लेकिन इसे हमारी महत्वाकांक्षा की सीमा कभी नहीं बनना चाहिए। नेपाल छोटा नहीं है बल्कि नेपाल रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है।’’ भारत के साथ संबंधों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि नेपाल का ध्यान ‘‘निकटता को उत्पादन के अवसर में बदलने’’ पर है। नेपाल की भारत के साथ 1,700 किलोमीटर से अधिक लंबी खुली सीमा है, जो पांच भारतीय राज्यों- उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम से लगती है।
इन राज्यों में 40 करोड़ से अधिक लोग रहते हैं। उन्होंने कहा कि मजबूत आपूर्ति श्रृंखला चाहने वाली वैश्विक और भारतीय कंपनियों के लिए नेपाल में, विशेषकर विशेष आर्थिक क्षेत्रों में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करना कई संरचनात्मक लाभ प्रदान करता है क्योंकि वहां कम लागत पर लगातार हरित ऊर्जा उपलब्ध है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच भी आसान है। चीन के साथ संबंधों को लेकर खनाल ने कहा कि नेपाल का दृष्टिकोण व्यावहारिक, वाणिज्यिक हितों पर आधारित और दीर्घकालिक मजबूती पर केंद्रित है।
Anant Chaturdashi पर घर में Ganesh Visarjan करते समय अपनाएं यह सही विधि
आज यानी की भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को 10 दिनों तक चलने वाले गणेश उत्सव का समापन हो रहा है। इस दिन गणपति विसर्जन किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और भदगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है। इससे व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। इस दिन देशभर में गणेश विसर्जन को लेकर विशेष तैयारी और रौनक देखने को मिलती है। ऐसे में अगर आप भी अनंत चतुर्दशी पर गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन करने के लिए जा रहे हैं। तो आइए जानते हैं इस दिन कि तिथि, मुहूर्त, महत्व और कुछ जरूरी नियमों के बारे में...
विसर्जन विधि और पाथेय की परंपरा
विसर्जन वाले दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। फिर बप्पा की विधिविधान से पूजा करें और उनको फूल, माला, अक्षत, सिंदूर और मोदक अर्पित करें। फिर धूप-दीप जलाकर भगवान गणेश की आरती उतारें।
वहीं ध्यान रखें कि गणपति को विदा करने से पहले उनको एक पोटली बांधकर जरूर दें। इस पोटली को पाथेय कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि बप्पा को देवलोक लौटते समय रास्ते में भोजन के लिए यह पोटली दी जाती है। इसके लिए पीले या लाल कपड़े में थोड़ा सा दूर्वा, अक्षत, सिक्का, मोदक, सुपारी और फल बांधकर गणपति के साथ रखें।
ऐसे करें विसर्जन
अगर आप घर पर विसर्जन कर रहे हैं, तो साफ पात्र में जल भरें और इसमें थोड़ा सा गंगाजल मिलाएं। अब हाथ में पुष्प लेकर पवित्र नदियों का स्मरण करें और फूल को जल में अर्पित करें। फिर श्रद्धापूर्वक बप्पा की प्रतिमा को जल में विसर्जित करें। इस दौरान बप्पा के मंत्र का जाप करें और 'गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ' का उद्घोष करें। फिर प्रतिमा को पूरी तरह से जल में समर्पित करें। आप बाद में उस जल को दुर्वा या कोई पवित्र पौधे में डाला जा सकता है।
महत्व
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू हुआ गणेश उत्सव का पर्व अनंत चतुर्दशी को समाप्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा-अर्चना के अलावा गणपति विसर्जन किया जाता है। इस बात अनंत चतु्र्दशी के मौके पर कई शुभ और दुर्लभ योग बन रहे हैं, जिससे बप्पा की पूजा और विसर्जन से भक्तों को कई गुना शुभ फल प्राप्त होंगे।
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