Mumbai 3.0: रायगढ़ पेन स्मार्ट सिटी के लिए फडणवीस ने पांच समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए
मुंबई 3.0 के महत्वाकांक्षी मिशन में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने रायगढ़ पेन स्मार्ट सिटी परियोजना के लिए दावोस में पांच समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए जिनमें से चार सिंगापुर की कंपनियों के साथ हैं।
विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक के दौरान फडणवीस ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि पांच विदेशी कंपनियों के साथ हुए इन समझौता ज्ञापनों के कारण यहां स्मार्ट सिटी परियोजना शुरू की गई है और यह अपनी तरह की अनूठी परियोजना होगी जो नवी मुंबई हवाई अड्डे से लगभग 15 से 20 किलोमीटर दूर स्थित है।
उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार पहली बार किसी निजी पार्टी के साथ संयुक्त उद्यम में प्रवेश कर रही है जिसके तहत जमीन निजी पार्टी द्वारा खरीदी जाती है और सरकार मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण के माध्यम से भूमि का विकास कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘वास्तव में यह सबसे बेहतरीन व्यापारिक जिला होगा और सभी अग्रणी व्यवसाय यहीं स्थित होंगे। जीसीसी (ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर) भी यहीं स्थित होंगे।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि इनके नाम जल्द साझा किए जाएंगे। फडणवीस ने कहा, ‘‘लेकिन मैं आपको बता सकता हूं कि वैश्विक समुदाय और निवेशकों के बड़े-बड़े दिग्गजों ने यहां रुचि दिखाई है। उन्होंने हमारे साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसलिए मुझे लगता है कि यह कुछ ऐसा है जो तीसरे मुंबई की शुरुआत करेगा।’’
उन्होंने कहा कि यह बीकेसी (बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स, मुंबई का एक प्रमुख व्यापारिक जिला) से भी बड़ा होगा। अभी यह लगभग 300 एकड़ में फैला है, लेकिन हम इसे 1,000 एकड़ तक विस्तारित करना चाहते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि मुंबई भारत की ‘फिनटेक’ (वित्तीय प्रौद्योगिकी) राजधानी है और पूरा ‘फिनटेक’ पारिस्थितिकी तंत्र वहीं होगा।
Ayodhya के रामकथा संग्रहालय को 233 साल पुरानी रामायण की पांडुलिपि भेंट की गई
संस्कृति मंत्रालय ने वाल्मीकि रामायण की एक दुर्लभ 233 वर्ष पुरानी संस्कृत पांडुलिपि अयोध्या के राम कथा संग्रहालय को मंगलवार को भेंट करने की घोषणा की। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति श्रीनिवास वरखेड़ी ने प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय की कार्यकारी परिषद के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा को वाल्मीकिरामायणम (तत्त्वदीपिकाटिका सहित) की पांडुलिपि सौंपी।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि आदि कवि वाल्मीकि द्वारा रचित और महेश्वर तीर्थ द्वारा लिखित शास्त्रीय टीका के साथ यह पांडुलिपि संस्कृत (देवनागरी लिपि में) में लिखी गई है।
बयान के मुताबिक, “यह विक्रम संवत 1849 (1792 ईस्वी) की ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण कृति है और रामायण की एक दुर्लभ संरक्षित पाठ्य परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है।” इसमें कहा गया, “संग्रह में महाकाव्य के पांच प्रमुख कांड, बालकांड, अरण्यकांड, किष्किंधाकांड, सुंदरकांड और युद्धकांड शामिल हैं, जो इतिहास की कथात्मक व दार्शनिक गहराई को दर्शाते हैं।”
इस पांडुलिपि को पहले नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन को दिया गया था और अब इसे अयोध्या स्थित अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय को स्थायी रूप से भेंट कर दिया गया है।
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