लौकी खाते ही बिगड़ सकती है तबीयत, अगर स्वाद में आए ये बदलाव तो तुरंत फेंक दें
लौकी को आमतौर पर हल्की, आसानी से पचने वाली और सेहत के लिए अच्छी सब्जी माना जाता है। लेकिन अगर लौकी का स्वाद सामान्य से बहुत ज्यादा कड़वा हो, तो इसे खाना भारी पड़ सकता है। हार्मोनल हेल्थ और वेट लॉस एक्सपर्ट लीमा महाजन के मुताबिक, सामान्य लौकी आमतौर पर पूरी तरह सुरक्षित होती है। लेकिन लौकी में अगर तेज और असामान्य कड़वाहट महसूस हो, तो यह एक बड़ा संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में लौकी को खाना नहीं चाहिए।
लौकी का कड़वा स्वाद क्यों है खतरे की घंटी?
सामान्य लौकी का स्वाद हल्का और फीका होता है। लेकिन अगर लौकी का स्वाद अचानक बहुत तेज कड़वा लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसकी वजह लौकी में कुकुर्बिटासिन नाम के प्राकृतिक तत्व की ज्यादा मात्रा हो सकती है।
कुकुर्बिटासिन पौधे में पाए जाने वाले प्राकृतिक बचाव वाले तत्व हैं। पौधे इन्हें खुद को बचाने के लिए बनाते हैं। लेकिन इनकी मात्रा ज्यादा होने पर ऐसी लौकी खाना सेहत के लिए गंभीर परेशानी पैदा कर सकता है।
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कड़वी लौकी खाने से हो सकती हैं ये परेशानियां
अगर लौकी में कुकुर्बिटासिन की मात्रा ज्यादा है और उसे खा लिया जाए, तो पेट से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इनमें तेज पेट दर्द, बार-बार उल्टी और दस्त जैसी परेशानियां शामिल हैं।
इससे शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन भी हो सकता है। कुछ मामलों में ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक गिर सकता है। इतना ही नहीं, गंभीर स्थिति में पेट और आंतों से ब्लीडिंग भी हो सकती है और उल्टी में खून तक आ सकता है।
कई मामलों में लिवर से जुड़ी जांच में एंजाइम का स्तर बढ़ा हुआ मिल सकता है। स्थिति ज्यादा गंभीर होने पर मरीज को आईसीयू में भर्ती करने की जरूरत भी पड़ सकती है।
लौकी खाने से पहले ऐसे करें छोटा सा टेस्ट
लौकी को पकाने या उसका जूस बनाने से पहले उसके स्वाद की जांच कर लेना एक आसान सावधानी है। इसके लिए लौकी का एक बहुत छोटा टुकड़ा काटें और उसकी बेहद थोड़ी मात्रा का स्वाद लें। सामान्य लौकी का स्वाद हल्का और फीका होना चाहिए। अगर लौकी का स्वाद साफ तौर पर बहुत तेज या असामान्य रूप से कड़वा है, तो उसे तुरंत थूक दें और पूरी लौकी को फेंक दें।
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क्या पकाने से कड़वी लौकी का जहर निकल जाता है?
सिर्फ लौकी को पकाने के भरोसे इसे सुरक्षित नहीं माना जा सकता। सामान्य तरीके से उबालने या प्रेशर कुकर में पकाने से कुकुर्बिटासिन भरोसेमंद तरीके से खत्म नहीं होते। इसलिए अगर लौकी कच्ची अवस्था में ही बहुत ज्यादा कड़वी लग रही है, तो उसे पकाकर या उसका जूस बनाकर खाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
लौकी नहीं, उसकी असामान्य कड़वाहट है असली समस्या
यह समझना जरूरी है कि लौकी अपने आप में समस्या नहीं है। सामान्य स्वाद वाली लौकी आमतौर पर सुरक्षित होती है। खतरे का संकेत तब मिलता है, जब उसका स्वाद सामान्य से अलग और बहुत ज्यादा कड़वा हो। इसलिए लौकी इस्तेमाल करने से पहले अगर आपको उसमें तेज कड़वाहट महसूस हो, तो इसे खाने का जोखिम न लें और पूरी लौकी को फेंक दें।
तोरी, खीरा और कद्दू में भी रखें ध्यान
यह सावधानी सिर्फ लौकी के लिए नहीं है। लौकी वाले परिवार की कुछ दूसरी सब्जियों में भी अगर सामान्य से अलग और तेज कड़वा स्वाद आए, तो सावधान रहना चाहिए। इनमें तोरी, खीरा और कुछ तरह के कद्दू शामिल हैं। इन सब्जियों में भी असामान्य कड़वाहट महसूस होने पर इन्हें खाना नहीं चाहिए।
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आज के समय में देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा डायबिटीज जैसे गंभीर सेहत संबंधी समस्या से परेशान है। आधुनिक लाइफस्टाइल और खानपान की गलत आदतें इस बीमारी की मुख्य वजह हैं। सोने-जागने का अनिश्चित समय, गलत खानपान, फिजिकल एक्टिविटी में कमी, स्मोकिंग और एल्कोहल भी इसमें प्रमुख कारण हैं। हालांकि वैसे तो डायबिटीज से बचाव के कई तरीकों के बारे में बताया जाता है। जैसे मैदे, तेल, घी, चावल, चीनी और आलू आदि से परहेज करना आदि। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्लो वॉक भी डायबिटीज को कम करने में मदद कर सकती है।
जानें क्या कहती है रिसर्च
एक रिपोर्ट के मुताबिक रोजाना लंच या डिनर के बाद अगर 10-15 मिनट हल्की वॉक की जाए, तो इसके बाद लोगों में ब्लड शुगर लेवल में कमी देखी गई है। शोधकर्ताओं के मुताबिक खाना खाने के करीब 30 मिनट बाद अगर 10 मिनट भी वॉक कर ली जाए, तो यह आपकी सेहत को लाभ पहुंचा सकती है। वहीं अगर आप भी डायबिटीज की समस्या से राहत पाना चाहती हैं, तो लंच व डिनर के बाद टहलने की आदत को रूटीन में जरूर शामिल करना चाहिए। इससे न सिर्फ ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है, बल्कि यह फिटनेस को भी बनाए रखने में मदद करता है।
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क्या है एक्सपर्ट की राय
हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो यह रिसर्च सही है। खाने के बाद शरीर में ब्लड सर्कुलेशन सही तरीके से होता है। स्लो वॉक से खून में मौजूद ग्लूकोज का मसल्स सही तरीके से इस्तेमाल कर लेते हैं। नियमित रूप से वॉक करने से तनाव दूर होता है और नींद भी अच्छी आती है। इससे शुगर लेवल भी कंट्रोल में रहता है।
वॉक करना सबसे आसान एक्टिविटी होती है। ऐसे में डायबिटीज से परेशान लोग स्लो वॉक कर सकते हैं। इसमें चोट लगने का जोखिम भी कम होता है और वॉक करने के लिए किसी स्पेशल इक्विपमेंट की आवश्कता नहीं पड़ती है। लेकिन आरामदायक कपड़े और जूते पहनने से आपको मोटिवेट रहने में सहायता जरूर मिल सकती है। जब आप रेगुलर वॉक करते हैं, तो आपको सेहत से जुड़े कई फायदे मिलते हैं।
यहां देखें स्लो वॉक के फायदे
मेटाबॉलिज्म बढ़ता है।
बैलेंस में सुधार होता है।
मूड बेहतर होता है।
स्लो वॉक से दिल की सेहत में सुधार होता है।
इससे इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है।
ब्लड शुगर का लेवल कम होता है।
स्लो वॉक से ज्यादा फोकस्ड और अलर्ट महसूस होता है।
याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता में भी सुधार होता है।
वेट कंट्रोल में आसानी होती है।
ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है।
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