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Toyota Innova Hycross फेसलिफ्ट की जल्द हो सकती है एंट्री, दिख सकते हैं ये बड़े बदलाव

टोयोटा इस साल के आखिर तक इनोवा हाइक्रॉस फेसलिफ्ट को इंडियन मार्केट में लॉन्च कर सकती है। नई हाइक्रॉस में डिजाइन से लेकर फीचर्स तक कुछ खास बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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SEBI ने Portfolio Managers के नियमों में किया बदलाव, IPO और विदेशी सिक्योरिटीज में निवेश को मंजूरी

अब पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं के जरिए निवेश करने वाले ग्राहकों के लिए निवेश के विकल्प बढ़ने वाले हैं। सेबी ने पोर्टफोलियो प्रबंधकों से जुड़े नए नियमों को मंजूरी दे दी है। इसके तहत पोर्टफोलियो प्रबंधक अब ग्राहकों के पैसे को आईपीओ, विदेशी प्रतिभूतियों और प्राथमिक बाजार में जारी होने वाले ऋण साधनों में भी लगा सकेंगे।

मौजूद जानकारी के अनुसार, सेबी के बोर्ड ने सेबी (पोर्टफोलियो प्रबंधक) विनियम, 2026 को मंजूरी दी है। यह नया नियम 2020 में लागू मौजूदा व्यवस्था की जगह लेगा। सेबी का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं के क्षेत्र को आगे बढ़ाना, नियमों का पालन आसान करना, अलग-अलग प्रावधानों को एक जगह लाना और ऐसे पुराने नियम हटाना है जिनकी अब जरूरत नहीं रह गई है।

नई व्यवस्था के तहत पोर्टफोलियो प्रबंधक आईपीओ और ऋण बाजार में पहली बार जारी होने वाली प्रतिभूतियों में ग्राहकों की ओर से निवेश कर सकेंगे। इसके अलावा, डिस्क्रेशनरी पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवा ग्राहकों की कुल प्रबंधित संपत्ति का 10 प्रतिशत तक निवेश-योग्य, गैर-परिवर्तनीय और बिना लिस्टिंग किए गए ऋण साधनों में लगा सकेगी। इसके लिए ग्राहक की सहमति जरूरी होगी।

सेबी ने शेयर बाजार में कारोबार होने वाले डेरिवेटिव साधनों में निवेश की सीमा को भी अधिक लचीला बनाया है। इसके तहत ग्राहक की प्रबंधित संपत्ति के 1.25 गुना तक इन साधनों में निवेश किया जा सकेगा।

विदेश में निवेश के लिए भी रास्ता आसान किया गया है। डिस्क्रेशनरी और गैर-विवेकाधीन दोनों तरह की सेवाएं देने वाले पोर्टफोलियो प्रबंधक विदेशी शेयर और ऋण प्रतिभूतियों के अलावा रियल एस्टेट निवेश न्यास, विदेशी म्यूचुअल फंड, कारोबार वाले कोष, इंडेक्‍स कोष और विदेशी सरकारी ऋण में निवेश कर सकेंगे। हालांकि, ऐसे निवेश विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून और भारतीय रिजर्व बैंक की उदारीकृत धन प्रेषण योजना के तहत होंगे।

गौरतलब है कि सेबी ने सीधे म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए भी पोर्टफोलियो प्रबंधक मार्ग शुरू किया है। इसे म्यूचुअल फंड इकाइयों में निवेश के लिए पोर्टफोलियो प्रबंधक मार्ग यानी प्राइम नाम दिया गया है। इसके जरिए ग्राहक का पैसा म्यूचुअल फंड की सीधे निवेश वाली योजनाओं, कारोबार वाले कोष, सूचकांक कोष और विशेष निवेश कोष में लगाया जा सकेगा।

इस व्यवस्था के तहत न्यूनतम निवेश राशि 25 लाख रुपये होगी। नए ढांचे के तहत काम करने वाली संस्था के लिए कम से कम 2 करोड़ रुपये की शुद्ध संपत्ति जरूरी होगी। मुख्य अधिकारी के पास स्नातक डिग्री, सीएफए या सीए योग्यता के साथ प्रतिभूति बाजार का कम से कम दो साल का अनुभव और निर्धारित प्रमाणपत्र होना जरूरी होगा।

प्राइम में संबद्ध या समूह की एसेट प्रबंधन कंपनियों की योजनाओं में निवेश की अधिकतम सीमा 25 प्रतिशत रखी गई है। प्रबंधन शुल्क ग्राहक की कुल प्रबंधित संपत्ति का अधिकतम 1 प्रतिशत होगा, जबकि प्रदर्शन के आधार पर शुल्क लेने की भी अनुमति होगी। निकासी शुल्क से छूट का प्रावधान भी किया गया है।

सेबी ने स्वतंत्र कोष प्रबंधक की नई व्यवस्था भी बनाई है। ऐसे प्रबंधक पंजीकृत पोर्टफोलियो प्रबंधक के साथ मिलकर ग्राहकों के पोर्टफोलियो का संचालन कर सकेंगे, लेकिन उनकी सभी गतिविधियों की पूरी जिम्मेदारी पंजीकृत पोर्टफोलियो प्रबंधक की होगी। ग्राहक के स्वतंत्र कोष प्रबंधक के हटने या सेवा खत्म होने पर ग्राहक को बाहर निकलने का अनिवार्य विकल्प मिलेगा।

इसके अलावा, योग्य कोष प्रबंधकों को विदेश में निवेश करने वाले पात्र निवेश कोषों का प्रबंधन और सलाह देने की अनुमति होगी। भारतीय प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले ऐसे कोषों के लिए सीमा मौजूदा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक व्यवस्था के अनुसार बनी रहेगी। कुल मिलाकर नई व्यवस्था पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं में निवेश के दायरे को बढ़ाने और नियमों को आसान बनाने की दिशा में अहम बदलाव लेकर आई है।

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  Sports

BCCI घरेलू सत्र के लिए Muthoot Fincorp को 35 मैचों के Title Sponsor अधिकार सौंपेगा

भारतीय क्रिकेट के टाइटल स्पॉन्सर से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। मुथूट फिनकॉर्प ने अगले दो घरेलू सत्रों के लिए भारतीय क्रिकेट टीम के टाइटल स्पॉन्सर अधिकार हासिल कर लिए है। इसके साथ ही भारत में होने वाले अंतरराष्ट्रीय और घरेलू मुकाबलों में अब मुथूट फिनकॉर्प का नाम टाइटल स्पॉन्सर के तौर पर दिखाई देगा।

क्रिकबज की जानकारी के अनुसार, इस प्रायोजन को ‘ब्लू मुथूट’ नाम से पेश किए जाने की बात सामने आई है। समझौते पर प्रति मुकाबला 4.85 करोड़ रुपये की शुरुआती दर के आधार पर बातचीत हुई है। हालांकि, कुछ सूत्रों का कहना है कि अंतिम रकम इस शुरुआती दर से कम भी हो सकती है। बीसीसीआई की ओर से आधिकारिक घोषणा के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी।

दरअसल, नए टाइटल स्पॉन्सर के नाम की घोषणा में देरी हुई थी। इसकी एक बड़ी वजह यह बताई गई कि अधिकारों के लिए पर्याप्त गभीर बोली लगाने वाले सामने नहीं आए। उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इसकी एक वजह प्रति मुकाबले रखी गई ऊंची शुरुआती कीमत भी थी। इससे पहले आईडीएफसी फर्स्ट बैंक टाइटल स्पॉन्सर था और वह प्रति मुकाबला 4.2 करोड़ रुपये का भुगतान कर रहा था।

मौजूद जानकारी के अनुसार, अगर अधिकारों के लिए प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया होती तो 13 अगस्त को नए प्रायोजक का फैसला हो जाना था। बीसीसीआई ने अधिकारों की बिक्री के लिए जारी निविदा में इसी तारीख को अंतिम दिन रखा था। लेकिन पर्याप्त बोली नहीं मिलने के बाद बोर्ड ने संभावित कंपनियों के साथ सीधे बातचीत शुरू की।

इस प्रक्रिया के दौरान गूगल जेमिनी, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, स्पिनी और एसबीआई लाइफ जैसी कंपनियों से संपर्क किए जाने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, एसबीआई लाइफ ने बाद में बीसीसीआई के सहयोगी भागीदार के तौर पर समझौता किया। कैंपा और चैटजीपीटी भी सहयोगी भागीदारों में शामिल हैं। इन तीनों कंपनियों के साथ दो सत्रों के लिए समझौता किया गया है, जिसकी शुरुआत वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत की घरेलू सीरीज से हुई है और यह मार्च 2028 तक चलेगी।

बता दें कि कोच्चि स्थित मुथूट परिवार के स्वामित्व वाली मुथूट फिनकॉर्प के पास 31 मार्च 2028 तक भारत में होने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय और घरेलू मुकाबलों के शीर्ष प्रायोजन अधिकार रहेंगे। इस अवधि में करीब 35 घरेलू अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले जाने हैं। इनमें 10 टेस्ट, 12 एकदिवसीय और 13 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले शामिल हैं।

नया समझौता तुरंत प्रभाव से लागू माना जा रहा है। इसका पहला असर भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाली एकदिवसीय श्रृंखला में दिखाई देगा, जिसकी शुरुआत 27 सितंबर से होनी है। खास बात यह है कि श्रृंखला का पहला मुकाबला मुथूट फिनकॉर्प के घरेलू राज्य केरल में खेला जाएगा। तिरुवनंतपुरम में होने वाला यह मुकाबला नए टाइटल स्पॉन्सर के लिए खास शुरुआत होगी।

गौरतलब है कि भारतीय क्रिकेट के टाइटल स्पॉन्सर अधिकार कंपनियों के लिए बड़े प्रचार मंच के तौर पर देखे जाते हैं। भारत में होने वाले अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के साथ-साथ घरेलू मैचों तक ब्रांड की पहुंच मिलने के कारण ऐसे समझौते कंपनियों को बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचने का मौका देते हैं। मुथूट फिनकॉर्प के साथ यह साझेदारी मार्च 2028 तक भारतीय क्रिकेट के घरेलू मुकाबलों से जुड़ी रहेगी।

Thu, 24 Sep 2026 21:51:00 +0530

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