अंकिता लोखंडे ने भी 2016 वाले ट्रेंड को फॉलो किया:पोस्ट में मुश्किल दौर को याद करते हुए लिखा – अंदर से टूट गई थी
सोशल मीडिया पर इन दिनों 2016 नॉस्टेल्जिया यानी 2016 की पुरानी यादों का ट्रेंड चल रहा है। लोग उस साल से जुड़ी यादों को शेयर कर रहे हैं। इसी ट्रेंड में टीवी एक्ट्रेस अंकिता लोखंडे ने भी 2016 की अपनी पुरानी यादें शेयर कीं। अंकिता ने 2016 की कुछ पुरानी तस्वीरें शेयर कीं। उन्होंने बताया कि वह साल उनकी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर में से एक था। पोस्ट में उन्होंने लिखा कि 2016 ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया और अंदर से तोड़ा और बदल दिया। उस साल उन्होंने अपने पालतू कुत्तों को खो दिया था, जिसका दर्द आज भी उन्हें याद है। अंकिता ने लिखा कि साल 2016 में उन्होंने इंस्टाग्राम पर पहला पोस्ट किया था। उसी समय उन्हें एहसास हुआ कि वह हमेशा से फैमिली गर्ल रही हैं। उन्होंने अपने कुत्ते स्कॉच को याद करते हुए लिखा कि वही उस साल उनका सबसे बड़ा सहारा था। उन्होंने हर मुश्किल समय में उनका साथ दिया। अंकिता ने कहा कि वह आज भी उन्हें बहुत मिस करती हैं। अंकिता ने अपने दादा आजोबा को भी याद किया। उन्होंने उस दौर की तस्वीरों का जिक्र किया, जब वह फोटोशूट और छोटी-छोटी चीजों में खुशी ढूंढा करती थीं। उन्होंने लिखा कि साड़ी पहनने का उनका प्यार आज भी वैसा ही है। पोस्ट के आखिर में अंकिता ने लिखा कि 2016 की ये यादें उन्हें खुद को समझने और आगे बढ़ने की ताकत देती हैं। उन्होंने खुद को याद दिलाया कि उन्होंने मुश्किल दौर को पार किया और आगे बढ़ीं। गौरतलब है कि अंकिता को टीवी शो पवित्र रिश्ता से खास पहचान मिली थी। इस शो के दौरान उनकी मुलाकात 2009 में सुशांत सिंह राजपूत से हुई थी, जिसके बाद दोनों लगभग 7 साल तक रिलेशनशिप में रहे थे। वहीं, साल 2016 में दोनों का ब्रेकअप हुआ। इसी के चलते अंकिता की इस पोस्ट के बाद कुछ लोग इसे एक्टर सुशांत से भी जोड़ रहे हैं। हालांकि अपने पोस्ट में अंकिता ने सीधे तौर पर सुशांत का कहीं पर भी जिक्र नहीं किया है।
40 या 50 नहीं बल्कि इस उम्र से हो जाती है बुढ़ापे की शुरुआत, 47 साल चली रिसर्च में हुआ ये खुलासा
हर इंसान का सपना होता है कि वह लंबे समय तक स्वस्थ और जीवित रहे, लेकिन प्रकृति ने हर इंसान को एक निश्चित वक्त दिया है. उससे अधिक समय तक ना तो कोई इसांन जवान रह सकता है और ना ही जीवित. ऐसे में स्वीडन की कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट में हुए एक शोध में इस बात का खुलासा हुआ है कि इंसान 35 साल की उम्र के बाद धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है और बुढ़ापे की ओर बढ़ने लगता है. उसकी फिटनेस और ताकत कम होने लगती है और ये बढ़ती उम्र के साथ धीरे-धीरे बिगड़ने लगती है.
47 साल तक चला शोध
कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट के शोधार्थियों ने 47 साल तक हजारों वयस्क और युवाओं पर नजर रखी. जिससे पता चलाया जा सके कि वयस्कता के दौरान फिटनेस, ताकत और मांसपेशियों की सहनशक्ति में कैसे बदलाव आता है. शोध के निष्कर्षों से पता चलता है कि शारीरिक प्रदर्शन लगभग 35 वर्ष की आयु से कम होने लगता है. हालांकि शोध में इस बात का भी पता चला कि अगर इंसान 35 साल की उम्र या उससे के भी एक्सरसाइज शुरू कर दे तो उसे काफी लाभ मिलता है.
एक्सरसाइज से 10 प्रतिशत बढ़ाई जा सकती है क्षमता
47 साल तक चली इस रिसर्च में पता चला कि 35 साल की उम्र से फिटनेस और ताकत कम होने लगती है, और फिर उम्र के साथ धीरे-धीरे बिगड़ती जाती है, हालांकि इसमें अच्छी बात यह है कि जिन वयस्कों ने बाद में व्यायाम करना शुरू किया, उन्होंने भी अपनी शारीरिक क्षमता में दोबारा से 10 प्रतिशत तक का सुधार कर लिया. यह इस बात का प्रमाण है कि इंसानों का एक्टिव रहना काफी जरूरी है. फिर भले ही आप इसे देरी से ही शुरू क्यों ना करें.
16 से 63 वर्ष के महिलाओं और पुरुषों को किया गया शामिल
यह रिसर्च स्वीडिश शारीरिक गतिविधि और फिटनेस अध्ययन (SPAF) का हिस्सा है, जिसमें 16 से 63 वर्ष की आयु के हजारों पुरुषों और महिलाओं पर का चयन कर उनपर नजर रखी गई. जर्नल ऑफ कैचेक्सिया, सार्कोपेनिया एंड मसल में प्रकाशित यह अध्ययन, किसी एक समय के बजाय दशकों में शारीरिक क्षमता में होने वाले बदलाव के बारे में बताता है.
बता दें कि क्षेत्र में पहले भी इस प्रकार के अध्ययन किए गए. लेकिन उनमें अधिकांश शोध क्रॉस-सेक्शनल डेटा पर आधारित थे, जिनमें एक ही व्यक्ति पर नजर रखने के बजाय विभिन्न आयु समूहों की तुलना की गई थी. इसके विपरीत, SPAF अध्ययन ने लगभग आधी सदी तक पूरे स्वीडन एक ही प्रतिभागियों में फिटनेस और ताकत का बार-बार मापन किया गया, जिससे यह अपनी तरह के सबसे व्यापक प्रयासों में से एक बन गया.
शारीरिक रूप से फिट लोग भी 35 के बाद होने लगते हैं कमजोर
शोध के परिणाम बताते हैं कि फिटनेस और ताकत दोनों ही 35 वर्ष की आयु से कम होने लगती हैं, चाहे लोगों ने जीवन में पहले कितना भी प्रशिक्षण लिया हो. उस उम्र के बाद, शारीरिक गिरावट धीरे-धीरे जारी रहती है और बढ़ती उम्र के साथ इसकी गति तेज हो जाती है. इस प्रवृत्ति के बावजूद, शोधकर्ताओं को उत्साहजनक प्रमाण मिले हैं कि व्यायाम किसी भी अवस्था में लाभदायक साबित होता है. वयस्कता के दौरान शारीरिक रूप से सक्रिय होने वाले प्रतिभागियों ने अपनी शारीरिक क्षमता में 5-10 प्रतिशत की वृद्धि की.
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