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LoC से लेकर लाइब्रेरियों तक एक्शन ही एक्शन, Jammu-Kashmir में आतंक के खिलाफ चौतरफा कसा शिकंजा

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा और प्रशासनिक मोर्चे पर एक साथ कई स्तरों पर कार्रवाई तेज होती दिखाई दे रही है। पुंछ में नियंत्रण रेखा के पास सेना ने तीन बारूदी सुरंगों का पता लगाकर उन्हें सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय किया, वहीं उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने लद्दाख का दौरा कर सुरक्षा स्थिति और सैनिकों की परिचालन तैयारियों की समीक्षा की। दूसरी ओर बारामूला में आतंकवाद से जुड़े मामले में एक आवासीय संपत्ति को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत कुर्क किया गया है। इसी बीच जम्मू-कश्मीर सरकार ने कॉलेजों में करीब 22 लाख पुस्तकों और प्रकाशनों की जांच के बाद 4,700 से अधिक ऐसी किताबों को प्रचलन से हटा दिया है, जिन्हें आपत्तिजनक या प्रतिबंधित सामग्री वाला पाया गया।

पुंछ में नियंत्रण रेखा से सटे अग्रिम इलाकों में सेना की सतर्कता ने एक बार फिर संभावित बड़े खतरे को टाल दिया। बुधवार को मेंढर क्षेत्र के फागवाड़ा गली में गश्त कर रहे सैनिकों ने दो जंग लगी बारूदी सुरंगें देखीं। इसके बाद इलाके को तत्काल घेर लिया गया और बम निरोधक दस्ते को बुलाकर दोनों सुरंगों को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर दिया गया। इसी दौरान हवेली तहसील के कस्बा गांव में भी सेना की गश्ती टुकड़ी को एक व्यक्ति-विरोधी बारूदी सुरंग मिली, जिसे भी बिना किसी नुकसान के निष्क्रिय कर दिया गया।

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यह खतरा इसलिए भी गंभीर है क्योंकि नियंत्रण रेखा के आसपास पुराने बारूदी सुरंग क्षेत्रों का जोखिम अभी समाप्त नहीं हुआ है। मंगलवार को भी मेंढर के धारणा बसोनी गांव में तीन बारूदी सुरंगों को सेना के बम निरोधक दस्ते ने नष्ट किया था। जुलाई 2025 में पुंछ के कृष्णा घाटी क्षेत्र में क्षेत्र वर्चस्व गश्त के दौरान बारूदी सुरंग विस्फोट में सेना का एक जवान मारा गया था, जबकि दो अन्य घायल हुए थे। ऐसे में हाल की बरामदगी सुरक्षा बलों की सतर्कता और अग्रिम इलाकों में लगातार निगरानी की गंभीरता को रेखांकित करती है।

इसी व्यापक सुरक्षा तस्वीर के बीच उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने लद्दाख का दो दिवसीय दौरा किया। उन्होंने वहां तैनात सैनिकों की सुरक्षा स्थिति और परिचालन तैयारियों की समीक्षा की। उत्तरी कमान के अनुसार, उन्होंने कठिन मौसम और चुनौतीपूर्ण भूभाग में सैनिकों के पेशेवर रवैये और कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की। नियंत्रण रेखा से लेकर ऊंचाई वाले सीमावर्ती क्षेत्रों तक सेना का संदेश साफ है—सतर्कता में किसी तरह की ढील की गुंजाइश नहीं है।

इसके अलावा, जमीन पर सुरक्षा कार्रवाई के साथ आतंकवाद के सहयोगी तंत्र पर भी प्रहार जारी है। बारामूला पुलिस ने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम की धारा 25 के तहत शीरी के नंबलन गांव स्थित एजाज अहमद गनी के दो मंजिला मकान को कुर्क किया। पुलिस के मुताबिक जांच में प्रथम दृष्टया सामने आया कि इस संपत्ति का इस्तेमाल आतंकवादियों को पनाह देने, जरूरी सहायता उपलब्ध कराने और आतंकवादी गतिविधियों में मदद करने के लिए किया गया था। संपत्ति पर बिक्री, हस्तांतरण, पट्टे या गिरवी रखने सहित किसी तीसरे पक्ष का अधिकार बनाने पर भी रोक लगा दी गई है।

दूसरी ओर, शिक्षा के मोर्चे पर सरकार ने कॉलेजों में उपलब्ध पुस्तकों की व्यापक जांच शुरू की है। अब तक 21,81,582 पुस्तकों और प्रकाशनों की जांच की जा चुकी है। इनमें 9,32,941 पुस्तकें जम्मू संभाग और 12,48,641 कश्मीर संभाग की हैं। सरकार के अनुसार 518 प्रतिबंधित प्रकाशनों समेत कुल 4,767 किताबों को प्रचलन से हटाया गया है। इनमें जम्मू की 293 और कश्मीर घाटी की 4,474 किताबें शामिल हैं। इसके अलावा 1,752 किताबों को विशेषज्ञ जांच के लिए भेजा गया है। सरकार का कहना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में संवैधानिक मूल्यों, अकादमिक स्वतंत्रता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिम्मेदार नागरिकता तथा देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता के प्रति सम्मान बनाए रखना जरूरी है। किताबों की यह जांच जुलाई में जारी निर्देशों के बाद शुरू हुई थी।

बहरहाल, देखा जाये तो जम्मू-कश्मीर में मौजूदा कार्रवाई केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है। नियंत्रण रेखा पर बारूदी सुरंगों से निपटने से लेकर लद्दाख में सैन्य तैयारियों की समीक्षा, आतंकवाद को सहयोग देने वाली संपत्तियों पर कार्रवाई और शिक्षण संस्थानों में पुस्तकों की छंटाई तक, प्रशासन और सुरक्षा तंत्र एक साथ कई मोर्चों पर सक्रिय है।

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Xi Jinping US Visit: अभी तो सिर्फ ट्रेलर सामने आया है, पूरी पिक्चर दिसम्बर में सामने आयेगी, तब दुनिया का हैरान होना तय है

वॉशिंगटन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के स्वागत के लिए जिस स्तर का राजकीय सम्मान दिखाया गया, उसे देखकर पूरी दुनिया हतप्रभ है। लेकिन सितम्बर में अमेरिका में दिखी यह कूटनीति सिर्फ ट्रेलर है क्योंकि पिक्चर अभी बाकी है जोकि दिसम्बर में दिखाई जायेगी। वैसे वॉशिंगटन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के स्वागत का दृश्य मई में बीजिंग में हुए ट्रंप-शी शिखर संवाद की याद दिला रहा है। जिस तरह चीन यात्रा के दौरान शी जिनपिंग ने ट्रंप का भव्य स्वागत किया था और बाद में झोंगनानहाई में स्वयं उनकी अगवानी की थी, उसी तरह अब अमेरिका पहुंचने पर ट्रंप ने प्रोटोकॉल से हटकर ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर स्वयं शी जिनपिंग का स्वागत किया। सैन्य बैंड, लाल कालीन, सम्मान गार्ड और लड़ाकू विमान के फ्लाईपास्ट के बीच हुआ यह स्वागत केवल राजकीय औपचारिकता नहीं, बल्कि अमेरिका-चीन संबंधों में चल रही कूटनीतिक गर्माहट का बड़ा संकेत माना जा रहा है। साथ ही करीब छह दशक में किसी विदेशी नेता के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से बेस पर इस तरह की व्यक्तिगत अगवानी असाधारण मानी जा रही है।

देखा जाये तो शी की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका और चीन के रिश्ते प्रतिस्पर्धा और सहयोग के बीच एक नए संतुलन की तलाश में हैं। व्यापार शुल्क, दुर्लभ खनिज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ताइवान और ईरान जैसे मुद्दे दोनों देशों के बीच गंभीर मतभेदों का कारण बने हुए हैं, लेकिन दोनों पक्ष अब टकराव को नियंत्रित रखने और बातचीत जारी रखने पर जोर दे रहे हैं। व्यापार युद्ध के बाद बनी अस्थायी व्यापार-समझ को आगे बढ़ाने की कोशिश भी इसी दिशा का संकेत है।

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शी जिनपिंग ने भी साफ संकेत दिया है कि चीन और अमेरिका को प्रतिद्वंद्वी की बजाय साझेदार के रूप में संबंधों को आगे बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा समाप्त हो गई है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अत्याधुनिक तकनीक में दोनों के बीच होड़ जारी है, ताइवान का प्रश्न बेहद संवेदनशील बना हुआ है और व्यापार तथा आपूर्ति श्रृंखला को लेकर भी मतभेद कायम हैं। इसलिए वॉशिंगटन में हो रही बातचीत को पूर्ण समझौते की बजाय तनाव कम करने और संबंधों को स्थिर रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

लेकिन इस पूरी तस्वीर का एक और महत्वपूर्ण पहलू है भारत और रूस। दिसंबर में ट्रंप की मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से होने की संभावनाएं भी सामने आ रही हैं। मोदी के दिसंबर में अमेरिका जाने की संभावना है, जहां चौदह और पंद्रह दिसंबर को फ्लोरिडा में होने वाली जी-20 बैठक के दौरान उनकी ट्रंप से द्विपक्षीय बातचीत हो सकती है।

वहीं रूस ने अभी पुतिन-ट्रंप दिसंबर शिखर बैठक की पुष्टि नहीं की है। लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के अनुसार पुतिन को दिसंबर में मियामी में होने वाली जी-20 बैठक के लिए आमंत्रित किया गया है और वहां ट्रंप के साथ मुलाकात की संभावना है। हालांकि क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा है कि अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और बैठक के एजेंडे पर चर्चा करना भी जल्दबाजी होगी।

देखा जाये तो इन संभावित मुलाकातों को हाल में नई दिल्ली में संपन्न हुए अठारहवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के संदर्भ में देखना खासा महत्वपूर्ण है। भारत की मेजबानी में हुए इस सम्मेलन में नरेंद्र मोदी, शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन के बीच जिस स्तर का संवाद और सार्वजनिक गर्मजोशी दिखाई दी, उसने वैश्विक कूटनीति में खासा ध्यान खींचा। मोदी और शी ने द्विपक्षीय संबंधों, सीमा शांति, व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की, जबकि मोदी और पुतिन ने रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, अंतरिक्ष और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की।

ब्रिक्स सम्मेलन की तस्वीरें भी अपने आप में एक बड़ा कूटनीतिक संदेश थीं। एक ओर भारत और रूस के बीच मजबूत रणनीतिक संबंध, दूसरी ओर भारत और चीन के बीच लंबे तनाव के बाद संवाद की वापसी। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषण में मोदी, पुतिन और शी की साथ दिखाई देने वाली तस्वीरों को बदलती वैश्विक शक्ति समीकरणों के प्रतीक के रूप में देखा गया।

यही वह पृष्ठभूमि है जिसमें ट्रंप की रणनीति को समझा जा सकता है। अमेरिका के सामने अब ऐसी दुनिया है जहां चीन, रूस और भारत तीनों के साथ उसके अलग-अलग स्तर के हित, मतभेद और संभावित सहयोग मौजूद हैं। चीन के साथ व्यापार और तकनीक, रूस के साथ यूक्रेन युद्ध और ऊर्जा, जबकि भारत के साथ व्यापार, रक्षा, तकनीक और रणनीतिक सहयोग, तीनों रिश्ते एक-दूसरे से पूरी तरह अलग नहीं हैं।

भारत के मामले में रूस से उसके ऊर्जा संबंध और अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता एक साथ चल रही हैं। रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिकी दबाव ने दोनों देशों के बीच आर्थिक बातचीत को जटिल बनाया है। ऐसे में मोदी-ट्रंप वार्ता में व्यापार, ऊर्जा और रणनीतिक संबंध महत्वपूर्ण विषय हो सकते हैं।

इसलिए दिसंबर का संभावित कूटनीतिक दौर केवल अलग-अलग द्विपक्षीय मुलाकातों की श्रृंखला नहीं होगा। सितंबर के नई दिल्ली ब्रिक्स सम्मेलन में मोदी, पुतिन और शी की जुगलबंदी के बाद अब ट्रंप के सामने इन तीनों शक्तियों के साथ अपने संबंधों को अलग-अलग मोर्चों पर संभालने की चुनौती है। वॉशिंगटन में शी का भव्य स्वागत इसी व्यापक कूटनीतिक गणित की शुरुआत माना जा सकता है, जहां अमेरिका टकराव के साथ-साथ संवाद और समझौते के रास्ते भी खुले रखना चाहता है।

-नीरज कुमार दुबे

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  Sports

CWI का बड़ा फैसला, खिलाड़ियों के Contract में 25% कटौती और Super50 टूर्नामेंट पर लगाई रोक

वेस्टइंडीज क्रिकेट इस समय आर्थिक और खेल से जुड़ी कई चुनौतियों से गुजर रहा है। इन्हीं परेशानियों से निपटने के लिए क्रिकेट वेस्टइंडीज ने कई बड़े फैसले लिए हैं। बोर्ड ने अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की सालाना अनुबंध फीस में 25% कटौती करने का फैसला किया है। इसके साथ ही इस साल पुरुषों की सुपर50 और महिलाओं की टी20 ब्लेज घरेलू प्रतियोगिताओं को भी रोक दिया गया है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को आगे भी 12 महीने का अनुबंध मिलता रहेगा, लेकिन उनकी तय फीस पहले के मुकाबले 25% कम होगी। वहीं घरेलू खिलाड़ियों के अनुबंध को 7 महीने तक सीमित किया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वेस्टइंडीज के कई खिलाड़ी राष्ट्रीय अनुबंध की जगह अलग-अलग देशों की घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट प्रतियोगिताओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। फीस में कटौती से यह चुनौती और बढ़ सकती है।

क्रिकेट वेस्टइंडीज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस डियरिंग ने कहा कि खिलाड़ियों और वेस्टइंडीज प्लेयर्स एसोसिएशन ने मौजूदा परिस्थितियों को समझते हुए सहयोग किया है। उन्होंने माना कि फीस में कटौती आदर्श स्थिति नहीं है, लेकिन आर्थिक स्थिरता के लिए इसे जरूरी कदम माना गया है।

बोर्ड ने पुरुषों की सुपर50 और महिलाओं की टी20 ब्लेज प्रतियोगिताओं को भी इस साल आयोजित नहीं करने का फैसला किया है। इसके पीछे घरेलू प्रतियोगिताओं के आयोजन पर आने वाला भारी खर्च बताया गया है। बता दें कि सुपर50 वेस्टइंडीज की पुरुष एकदिवसीय टीम तक पहुंचने वाले खिलाड़ियों के लिए अहम मंच रहा है। ऐसे में इसका रुकना विकास और चयन प्रक्रिया पर भी असर डाल सकता है।

गौरतलब है कि वेस्टइंडीज को फरवरी-मार्च 2027 में एकदिवसीय विश्व कप क्वालीफायर खेलना है। टीम 2023 के एकदिवसीय विश्व कप में जगह नहीं बना सकी थी। अब क्रिकेट वेस्टइंडीज का कहना है कि उसका ध्यान पुरुष टीम को इस क्वालीफायर के लिए तैयार करने पर रहेगा। नवंबर में इंग्लैंड ए टीम के खिलाफ सीमित ओवरों की कुछ मुकाबलों की श्रृंखला के बाद एकदिवसीय टीम का विशेष शिविर लगाया जाएगा।

क्रिस डियरिंग के मुताबिक, घरेलू क्रिकेट व्यवस्था पर यात्रा, होटल, मैच और आयोजन से जुड़ा खर्च लगातार बढ़ता गया है। उन्होंने कहा कि पिछले 15 वर्षों में केवल घरेलू विमान सेवाओं पर 80 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक खर्च किए गए हैं। बोर्ड का कहना है कि मौजूदा आर्थिक दबाव में इस तरह का खर्च उठाना मुश्किल हो गया है।

इस बदलाव का असर 2027 पैन अमेरिकी खेलों और 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक की तैयारी पर भी पड़ सकता है। 2025-26 सुपर50 और टी20 ब्लेज में शीर्ष 4 स्थान हासिल करने वाली टीमों को पैन अमेरिकी खेलों के लिए पहले ही तय किया जा चुका है। वहीं ओलंपिक के लिए अलग आमंत्रण प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, जिनका खर्च संबंधित देशों के क्रिकेट बोर्ड और अन्य संस्थाएं उठाएंगी।

महिलाओं की अगले साल की सुपर50 की जगह सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों वाली विकास प्रतियोगिता होगी। हालांकि वेस्टइंडीज चैंपियनशिप अपने 2025-26 प्रारूप में जारी रहेगी। क्रिस डियरिंग ने मौजूदा स्थिति की तुलना 2016 टी20 विश्व कप फाइनल में कार्लोस ब्रेथवेट के लगातार 4 छक्कों से करते हुए कहा कि अब वेस्टइंडीज क्रिकेट को भी साहस के साथ बड़े फैसले लेने होंगे और नई शुरुआत करनी होगी।

Fri, 25 Sep 2026 22:00:00 +0530

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