देशभर में गणेश विसर्जन कल- हैदराबाद में 30000 पुलिसकर्मी तैनात:24 ड्रोन और 10 हजार CCTV कैमरों से निगरानी होगी
गणेश उत्सव का आखिरी दिन 25 सितंबर को है। इस दौरान देशभर में लाखों गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन नदियों, तालाबों, कृत्रिम विसजर्न कुंडों और झीलों में किया जाएगा। तेलंगाना के हैदराबाद में विसर्जन के दौरान इलाकों में सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और ट्रैफिक व्यवस्था के लिए 25 से 30 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। हैदराबाद पुलिस ने निगरानी के लिए 24 ड्रोन और 10 हजार CCTV कैमरे लगाए हैं। हुसैन सागर के आसपास ऊंची इमारतों पर करीब 100 कैमरे भी लगाए गए हैं। जुलूसों के लिए ट्रैफिक डायवर्जन और पाबंदियां लागू रहेंगी। झील के किनारे क्रेन, इमरजेंसी बोट, विशेषज्ञ गोताखोर और मेडिकल पोस्ट तैनात किए गए हैं। देशभर में स्थापित गणेश प्रतिमाएं… ट्रैफिक पुलिस और इमरजेंसी सर्विस भी तैनात 25 सितंबर को बड़े जुलूसों को देखते हुए ट्रैफिक डायवर्जन और पाबंदियां लागू होंगी। झील के किनारे क्रेन, इमरजेंसी रिस्पॉन्स बोट, विशेषज्ञ गोताखोर और मेडिकल पोस्ट तैनात किए गए हैं। नागरिकों, आयोजन समितियों और श्रद्धालुओं से ट्रैफिक नियमों का पालन करने की अपील की गई है। उनसे तय विसर्जन मार्गों का इस्तेमाल करने और शोभायात्रा के दौरान शांति बनाए रखने को कहा गया है। 25 सितंबर को सरकारी छुट्टी तेलंगाना सरकार ने शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को हैदराबाद-सिकंदराबाद, रंगारेड्डी और मेडचल-मलकाजगिरी जिलों में छुट्टी घोषित की है। इस दिन इन जिलों के सरकारी कार्यालय, स्कूल और कॉलेज बंद रहेंगे।
EPFO Rule: ईपीएफओ की लिमिट 25 हजार होने पर घटेगी टेक-होम सैलरी? जानें कितना पड़ेगा असर
नौकरीपेशा लोगों की हर महीने मिलने वाली सैलरी और PF की बचत का हिसाब बदल सकता है। केंद्र सरकार ने EPFO के दायरे में आने के लिए सैलरी लिमिट 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपए महीना करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इससे लाखों नए कर्मचारी PF के दायरे में आ सकते हैं। वहीं, जिन कर्मचारियों का PF अभी 15 हजार रुपए की लिमिट के हिसाब से कटता है, उनका हर महीने का योगदान बढ़ सकता है। यानी रिटायरमेंट के लिए ज्यादा पैसा जमा होगा, लेकिन हाथ में आने वाली सैलरी कुछ कम हो सकती है।
अभी कितना कटता है PF?
मौजूदा व्यवस्था में PF के लिए 15 हजार रुपए की वेतन सीमा लागू है। यह लिमिट सितंबर 2014 में तय की गई थी। इस लिमिट के हिसाब से कर्मचारी की तरफ से 12% यानी 1,800 रुपए महीने का योगदान होता है। नियोक्ता की तरफ से भी 12% यानी 1,800 रुपए का योगदान किया जाता है।
अब वेतन सीमा 25 हजार रुपए होने पर इसी हिसाब से कर्मचारी का योगदान बढ़कर 3 हजार रुपए महीने हो सकता है। नियोक्ता का योगदान भी 3 हजार रुपए तक पहुंच जाएगा। यानी मौजूदा लिमिट के मुकाबले कर्मचारी और नियोक्ता दोनों की तरफ से हर महीने 1,200-1,200 रुपए ज्यादा योगदान होगा।
हाथ में आने वाली सैलरी पर कितना असर?
इस बदलाव का सीधा असर खास तौर पर 15 हजार से 25 हजार रुपए महीने की सैलरी वाले कर्मचारियों पर पड़ सकता है। अगर किसी कर्मचारी का PF अभी 1,800 रुपए महीने कट रहा है और नई लिमिट के बाद यह बढ़कर 3 हजार रुपए हो जाता है तो हर महीने 1,200 रुपए ज्यादा PF में जाएंगे।इस हिसाब से कर्मचारी के PF में एक साल में 14,400 रुपए अतिरिक्त जमा होंगे। हालांकि इसका दूसरा पहलू यह है कि कर्मचारी के हाथ में हर महीने आने वाली रकम 1,200 रुपए तक कम हो सकती है। यह पैसा खत्म नहीं होगा, बल्कि कर्मचारी की रिटायरमेंट सेविंग में जुड़ेगा।
उदाहरण से समझें पूरा हिसाब
मान लीजिए किसी कर्मचारी पर अभी 15 हजार रुपए की PF लिमिट लागू है। उसका 12% यानी 1,800 रुपए हर महीने PF में जाता है। 25 हजार रुपए की नई लिमिट लागू होने के बाद 12% के हिसाब से यह रकम 3 हजार रुपए हो जाएगी। इस तरह कर्मचारी की तरफ से सालाना PF योगदान 21,600 रुपए से बढ़कर 36 हजार रुपए हो सकता है। यानी सालभर में 14,400 रुपए ज्यादा जमा होंगे। नियोक्ता की तरफ से होने वाला योगदान भी इसी अनुपात में बढ़ेगा।
51 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को मिल सकता है फायदा
प्रस्तावित बदलाव का बड़ा मकसद ज्यादा कर्मचारियों को EPFO के दायरे में लाना है। सरकार के अनुमान के मुताबिक वेतन सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपए करने से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी PF और इससे जुड़े सोशल सिक्योरिटी सिस्टम के दायरे में आ सकते हैं। इससे ऐसे कर्मचारियों की रिटायरमेंट सेविंग शुरू हो सकेगी, जो मौजूदा वेतन सीमा के कारण अनिवार्य EPFO कवरेज से बाहर रह जाते हैं।
कंपनियों का खर्च भी बढ़ सकता है
नई लिमिट का असर केवल कर्मचारियों पर नहीं पड़ेगा। कंपनियों की तरफ से किया जाने वाला PF योगदान भी बढ़ेगा। अभी 15 हजार रुपए की लिमिट पर अधिकतम 1,800 रुपए महीने के हिसाब से योगदान का उदाहरण लिया जाए तो 25 हजार रुपए पर यह बढ़कर 3 हजार रुपए हो जाएगा। यानी कंपनी पर भी प्रति कर्मचारी 1,200 रुपए महीने का अतिरिक्त खर्च आ सकता है।
ऐसी कंपनियां जहां सैलरी CTC के आधार पर तय होती है, वहां सैलरी स्ट्रक्चर के दूसरे हिस्सों में बदलाव देखने को मिल सकता है। कंपनियां स्पेशल अलाउंस या दूसरे कंपोनेंट का हिसाब नए सिरे से तय कर सकती हैं।
PF का खर्च कर्मचारी की सैलरी से नहीं निकाल सकती कंपनी
हालांकि कंपनियों के लिए भी इसकी सीमा तय है। सोशल सिक्योरिटी कोड की धारा 124 के मुताबिक नियोक्ता अपने वैधानिक योगदान की भरपाई करने के लिए कर्मचारी की मजदूरी में कटौती नहीं कर सकता।
इसका मतलब है कि सिर्फ इसलिए कर्मचारी की तय मजदूरी कम नहीं की जा सकती कि कंपनी को अब PF में ज्यादा योगदान करना पड़ रहा है। ऐसे में कुछ कंपनियों के लिए कर्मचारियों का कुल CTC बढ़ाने की जरूरत भी पड़ सकती है।
फायदा भी, लेकिन हर महीने कैश कम
कर्मचारी के नजरिए से देखें तो इस बदलाव के दो पहलू हैं। पहला, हर महीने PF में ज्यादा पैसा जाएगा और लंबे समय में रिटायरमेंट के लिए बड़ी रकम जमा हो सकती है। दूसरा, कर्मचारी के हाथ में आने वाली मासिक सैलरी कम हो सकती है। 15 हजार से 25 हजार रुपए की सीमा पर जाने के उदाहरण में यह अंतर 1,200 रुपए महीने तक हो सकता है।
इसलिए नई लिमिट लागू होने पर कर्मचारियों के लिए PF में ज्यादा बचत और मौजूदा खर्च के लिए कम कैश के बीच सीधा फर्क दिखाई दे सकता है।
(प्रियंका कुमारी)
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