जम्मू-कश्मीर में गणतंत्र दिवस समारोह से ठीक पहले आतंकियों की एक बड़ी और खौफनाक साजिश को सुरक्षाबलों ने नाकाम कर दिया है। मंगलवार को श्रीनगर-बारामूला राजमार्ग पर एक शक्तिशाली परिष्कृत विस्फोटक उपकरण (IED) बरामद किया गया, जिसे समय रहते निष्क्रिय कर एक भीषण रक्तपात को रोक लिया गया।
जम्मू कश्मीर: सुरक्षा बलों ने बारामूला में एक आईईडी बरामद किया
अधिकारियों ने बताया कि संदिग्ध आतंकवादियों ने बारामूला जिले के पट्टानी क्षेत्र के तकिया टैपर में सड़क किनारे आईईडी लगाया था। उन्होंने बताया कि सुरक्षा बलों की गश्त टीम ने आईईडी का पता लगाया और उसे निष्क्रिय करने के लिए बम निरोधक दस्ते को तुरंत मौके पर भेजा गया। यह घटना गणतंत्र दिवस समारोह से एक सप्ताह से भी कम समय पहले हुई है। इस बीच, आतंकवादियों के किसी आतंकी गतिविधि को अंजाम देने कीआशंकाओं के मद्देनजर कश्मीर घाटी में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
गणतंत्र दिवस से पहले घाटी में हाई अलर्ट
यह घटना 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) समारोह से एक सप्ताह से भी कम समय पहले हुई है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। गणतंत्र दिवस को देखते हुए आतंकियों द्वारा किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की आशंका जताई जा रही है। इसके मद्देनजर:
-पूरी कश्मीर घाटी में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद कर दिया गया है।
-राजमार्गों पर गश्त बढ़ा दी गई है और आने-जाने वाले वाहनों की सघन तलाशी ली जा रही है।
-संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त नाके लगाए गए हैं।
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देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने अहम भूमिका निभाने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल 20 जनवरी को अपना 81वां जन्मदिन मना रहे हैं। सर्जिकल स्ट्राइक हो या फिर बालाकोट एयर स्ट्राइक हो, देश की हर सुरक्षा से संबंधित हर घटना में अजीत डोभाल का नाम सुनने को जरूर मिलता है। बता दें कि उनको भारत का 'जेम्स बॉन्ड' भी कहा जाता है। वहीं अजीत डोभाल पाकिस्तान में अंडरकवर एजेंट भी रह चुके हैं। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर अजीत डोभाल के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
जन्म और परिवार
उत्तराखंड की पौड़ी गढ़वाल में 20 जनवरी 1945 को अजीत डोभाल का जन्म हुआ था। उनके पिता सेना में अधिकारी थे। वहीं साल 1969 में केरल बैच के आईपीएस अधिकारी रहे अजीत डोभाल साल 1972 में इंटेलिजेंस ब्यूरो से जुड़ गए थे। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान के लाहौर में भारतीय दूतावास में 6 साल सेवाएं दी थीं।
भारत का जेम्स बॉन्ड
बता दें कि पाकिस्तान के लाहौर में भारतीय दूतावास में अजीत डोभाल ने 6 साल सेवाएं दी थीं। पाकिस्तान में रहकर जानकारियां हासिल करने के लिए डोभाल लाहौर की गलियों में मुस्लिम होने का ताना-बाना रचकर घूमते थे। इसके साथ ही वह पाकिस्तान की आतंकी गतिविधियों के खिलाफ उसको युद्ध की खुली चुनौती भी दे चुके हैं। पाकिस्तान को उसके घर में घुसकर उसको मात देकर लौटने वाले डोभाल को उनकी खूबियों के कारण 'भारत का जेम्स बॉन्ड' कहा जाता है।
लगभग पकड़ लिए गए थे डोभाल
अजीत डोभाल सालों तक पाकिस्तान में बतौर अंडरकवर एजेंट की भूमिका में तैनात रहे। डोभाल ने इंटेलिजेंस से रिटायरमेंट के बाद एक कार्यक्रम का किस्सा बताया था। अजीत डोभाल ने बताया था कि एक बार जासूसी के दौरान उनको करीब-करीब पहचान लिया गया था। एक व्यक्ति के कान छिदे होने के कारण उनको पहचान लिया गया था कि वह हिंदू हैं। वह व्यक्ति सवाल करने के लिए उनको एक कमरे से दूसरे कमरे में ले गया, जिसके बाद उसने बताया कि वह भी एक हिंदू ही हैं।
मिला कीर्ति चक्र
बता दें कि अजीत डोभाल देश के एकमात्र ऐसे पुलिस अधिकारी रहे, जिनको कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है। आमतौर पर यह सम्मान सिर्फ सेना के अधिकारियों को दिया जाता है। माना जाता है कि सर्जिकल स्ट्राइक के पीछे अजीत डोभाल का दिमाग था। उनकी देखरेख में इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया गया है। वहीं साल 1989 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से चरमपंथियों को निकालने के लिए अजीत डोभाल ने ऑपरेशन ब्लैक थंडर का भी नेतृत्व किया था।
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