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बिहार में अपराधियों की नहीं चलेगी चालाकी! नीतीश सरकार खोल रही 6 नई फॉरेंसिक लैब

Bihar News: बिहार सरकार राज्य में अपराध पर लगाम लगाने और दोषियों को सजा दिलाने के लिए एक बड़ा और अहम कदम उठाने जा रही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर बिहार में फॉरेंसिक जांच की व्यवस्था को तेजी से मजबूत किया जा रहा है. इसी कड़ी में राज्य के छह नए जिलों में आधुनिक फॉरेंसिक साइंस लैब खोलने की तैयारी शुरू हो गई है.

यहां स्थापित होंगे फॉरेंसिक साइंस लैब 

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, गयाजी, बेतिया, छपरा, मुंगेर, पूर्णिया और सहरसा में जल्द ही फॉरेंसिक साइंस लैब की स्थापना की जाएगी. अभी बिहार में केवल पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर में ही ये लैब काम कर रही हैं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दरभंगा और रोहतास में भी मार्च 2026 तक फॉरेंसिक लैब शुरू हो सकती है. ऐसा होने पर पूरे राज्य में कुल 12 फॉरेंसिक लैब हो जाएंगी, जिससे केस की जांच रिपोर्ट जल्दी मिलेगी और कोर्ट में मामलों का निपटारा भी तेज होगा.

56 हजार से ज्यादा सैंपल की जांच पूरी हो चुकी है

1 जुलाई 2024 से देश में नए आपराधिक कानून लागू हुए हैं. इन कानूनों के तहत जिन अपराधों में 7 साल या उससे ज्यादा की सजा है, उनमें फॉरेंसिक और डिजिटल सबूत देना जरूरी कर दिया गया है. इसी वजह से फॉरेंसिक जांच का महत्व और बढ़ गया है. पुलिस के मुताबिक साल 2025 में अब तक करीब 11 हजार मामलों से जुड़े 56 हजार से ज्यादा सैंपल की जांच पूरी हो चुकी है.

साइबर अपराध से निपटने के लिए भी उठाया कदम

सरकार साइबर अपराध से निपटने के लिए भी कदम उठा रही है. पटना और राजगीर में मार्च तक विशेष साइबर फॉरेंसिक यूनिट शुरू की जाएगी, जिससे ऑनलाइन ठगी और साइबर क्राइम के मामलों को सुलझाने में मदद मिलेगी.

गृह विभाग को भेजा बजट

फॉरेंसिक सुविधाओं के विस्तार के लिए सरकार ने गृह विभाग को करीब 163 करोड़ रुपये का बजट भेजा है. पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर में नई डीएनए जांच यूनिट भी बनाई जाएंगी. इसके अलावा राज्य में अभी 51 मोबाइल फॉरेंसिक वाहन काम कर रहे हैं और 50 नए वाहन खरीदने की भी योजना है. कुल मिलाकर, बिहार में अब अपराध की जांच और ज्यादा वैज्ञानिक और मजबूत होने जा रही है.

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Jharkhand: झारखंड निकाय चुनाव पर सियासी घमासान तेज, बीजेपी ने दलीय आधार और ईवीएम से चुनाव कराने की मांग की

Jharkhand: झारखंड में होने वाले नगर निकाय चुनाव को लेकर सियासत तेज हो गई है. भारतीय जनता पार्टी का दावा है कि झारखंड में निकाय चुनावों का नतीजा महाराष्ट्र जैसा हो सकता है. इसी को लेकर प्रदेश बीजेपी नेताओं की बैठक हुई, जिसमें चुनावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई.

बीजेपी ने रखी ये मांगें

बीजेपी ने मांग की है कि नगर निकाय चुनाव दलीय आधार पर कराए जाएं और मतदान ईवीएम से हो. पार्टी का कहना है कि बैलेट पेपर से चुनाव कराने पर धांधली की आशंका रहती है. बीजेपी नेताओं का आरोप है कि राज्य सरकार हार के डर से दलीय आधार पर चुनाव नहीं करा रही है.

बीजेपी ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

बीजेपी ने यह भी आरोप लगाया है कि अगर बैलेट पेपर से चुनाव होते हैं, तो प्रशासन के जरिए मतगणना को प्रभावित किया जा सकता है. पार्टी का कहना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव के लिए ईवीएम ही सबसे सुरक्षित तरीका है. इसी मुद्दे को लेकर बीजेपी लगातार बैठकें कर रही है और सभी 48 नगर निकायों में कार्यकर्ताओं को दिशा-निर्देश दिए गए हैं.

राज्य निर्वाचन आयोग की तैयारी 

दूसरी ओर, राज्य निर्वाचन आयोग नगर निकाय चुनाव की तैयारियों में जुटा हुआ है. उम्मीद जताई जा रही है कि जनवरी के आखिरी सप्ताह तक चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया जाएगा. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि चुनाव दलीय आधार पर होंगे या निर्दलीय रूप से, और मतदान ईवीएम से होगा या बैलेट पेपर से.

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कुल मिलाकर, झारखंड के निकाय चुनाव को लेकर सियासी माहौल गर्म हो चुका है. एक तरफ बीजेपी के आरोप और मांगें हैं, तो दूसरी तरफ सरकार और चुनाव आयोग के फैसले का इंतजार किया जा रहा है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है.

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  Sports

रोहित शर्मा और विराट कोहली को कितने करोड़ का होगा नुकसान? A+ सेंट्रल कॉन्ट्रेक्ट से निकाले जाने के बाद कितनी सैलरी मिलेगी?

Virat Kohli-Rohit Sharma BCCI central contract: बीसीसीआई के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से A+ कैटेगरी को हटाया जा रहा है. अभी इस कैटेगरी में विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे दिग्गज शामिल थे. इस कैटेगरी में शामिल खिलाड़ी को बीसीसीआई की तरफ से सबसे ज्यादा सैलरी मिलती थी. ऐसे में अब विराट कोहली और रोहित शर्मा को इससे काफी नुकसान होने वाला है. Tue, 20 Jan 2026 16:51:18 +0530

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