प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान पर कि नितिन नबीन अब पार्टी मामलों में उनके "बॉस" हैं को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने तंज कसा है। पवन खेड़ा ने कहा कि भाजपा और आरएसएस आपस में खेल खेलते रह सकते हैं। कभी (आरएसएस प्रमुख) मोहन भगवत किसी के बॉस बनते हैं, कभी मोदी किसी के बॉस बनते हैं। उन्होंने लोकप्रिय रियलिटी शो "बिग बॉस" का जिक्र करते हुए आगे कहा, "क्या यहां बिग बॉस का खेल खेला जा रहा है?"
दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खेड़ा से इस घटनाक्रम के बारे में पूछा गया, जहां उन्होंने कहा, "चुनाव कहां है? इसे चुनाव क्यों कहते हैं? पहले राष्ट्रपति की घोषणा करते हैं, फिर कहते हैं कि चुनाव होगा, और फिर कोई चुनाव होता ही नहीं।" पार्टी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने कटाक्ष करते हुए यह भी कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार अब इस्तीफा देना चाहते हैं क्योंकि भाजपा अध्यक्ष के चुनाव में उनकी कोई भूमिका नहीं रही और चुनाव को ‘‘प्रभावित करने का’’ का मौका भी नहीं मिला। नितिन नवीन को मंगलवार को औपचारिक रूप से भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया गया। उन्होंने जेपी नड्डा का स्थान लिया है।
इस बारे में पूछे जाने पर खेड़ा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘चुनाव कहां हुआ है, इसे चुनाव क्यों कहा जाए? आपने अध्यक्ष पहले घोषित कर दिया और फिर कहा कि चुनाव होगा, लेकिन चुनाव नहीं हुआ। ज्ञानेश कुमार गुप्ता इसके विरोध में इस्तीफा देना चाहते हैं क्योंकि उनकी कोई भूमिका नहीं है, वह कुछ प्रभावित नहीं कर सके, कुछ हेरफेर नहीं कर सके।’’ उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि स्वामी अविमुक्तवेश्वरानंद की आंखों से आंसू निकल रहे हैं और प्रधानमंत्री एवं भाजपा के लोग ‘बिग बॉस’ का गेम खेल रहे हैं। दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने नवीन को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई दी और कहा कि पार्टी से संबंधित मामलों में यह युवा नेता उनका ‘बॉस’ होगा।
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सरकार द्वारा जन्म दर बढ़ाने के लिए कई प्रोत्साहन योजनाओं के बावजूद, चीन की जनसंख्या में लगातार चौथे वर्ष गिरावट दर्ज की गई और 2025 में जन्म दर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश की जन्म दर गिरकर 5.63 प्रति 1,000 व्यक्ति हो गई – जो 1949 में कम्युनिस्ट पार्टी के सत्ता में आने के बाद से अब तक का सबसे निचला स्तर है, जबकि मृत्यु दर बढ़कर 8.04 प्रति 1,000 व्यक्ति हो गई, जो 1968 के बाद से उच्चतम स्तर है।
2025 के अंत तक इसकी जनसंख्या 3.39 मिलियन घटकर 1.4 बिलियन हो गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक तेजी से घटी है। वृद्धावस्था से जूझ रही जनसंख्या और सुस्त अर्थव्यवस्था के कारण, बीजिंग युवाओं को विवाह करने और बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए अथक प्रयास कर रहा है। चीन की आबादी लगातार चौथे साल घटी है। साल 2025 में यह 33.9 लाख घटकर 1.4 अरब रह गई। पीढ़ियों तक 'एक बच्चा नीति' के जरिये आबादी सीमित रखने के बाद अब चीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए राजी करना है। कभी दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश रहा चीन अब भारत के बाद दूसरी बड़ी आबादी वाला देश है। फिर भी उसकी कुल जनसंख्या लगातार घट रही है।
76 साल में सबसे कम जन्म दर
2025 में 79.2 लाख बच्चों का जन्म हुआ, 2024 में 95.4 लाख जन्मे थे, जन्मदर 1000 पर 5.63 रही, जो 1949 में चीन की स्थापना के बाद सबसे कम है।
2100 तक आधी आबादी बूढ़ी होगी
2025 के अंत में 60+ आबादी 32.3 करोड़ थी, जो कुल आबादी का 23% हैं। ये 2035 तक 40 करोड़, 2100 तक आधी आबादी इस दायरे में होगी।
20% घटीं शादियां
पिछले साल चीन में शादियों में करीब 20% की गिरावट आई। कम शादियां होने का सीधा असर जन्म दर पर पड़ता है। दरअसल ज्यादातर युवा शादी और परिवार शुरू करने से बच रहे है। हालांकि सरकार ने जन्म दर बढ़ाने के लिए बच्चों को देशभक्ति से जोड़ा है। कॉन्डम और गर्भनिरोधक दवाओं पर टैक्स लगाया है।
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