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Congress का CEC Gyanesh Kumar पर बड़ा हमला, Goa में ECINet सिस्टम से वोटर्स के नाम हटाने का आरोप

विपक्ष ने चुनाव आयोग पर फिर से हमले शुरू कर दिए। यह हमला एक रिपोर्ट के बाद हुआ जिसमें दावा किया गया था कि गोवा में ज़मीनी स्तर के अधिकारियों द्वारा योग्य पाए गए 97 मतदाताओं को 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) के बाद भी अंतिम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं किया गया। इस रिपोर्ट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला करते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार ने प्रधानमंत्री के कहने पर पूरे सिस्टम पर कब्ज़ा कर लिया है और वे राष्ट्र-विरोधी काम कर रहे हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि इससे साबित होता है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह से कमज़ोर और दूषित हो गई है और उन्होंने कुमार के इस्तीफ़े की पार्टी की मांग को फिर से दोहराया। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि गोवा के 97 वोटर, जिन्हें स्थानीय इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारियों (EROs) ने 2026 की फाइनल वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए योग्य पाया था, उन्हें लिस्ट में शामिल नहीं किया गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि चुनाव आयोग के सेंट्रलाइज़्ड ECINet सिस्टम (जिसे दिल्ली में उसका IT डिवीज़न कंट्रोल करता है) ने EROs को पहले लिए गए नाम हटाने के फैसलों को पलटने की इजाज़त नहीं दी।

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गोवा के मुख्य चुनाव अधिकारी संजय गोयल ने सात दिनों में आठ ईमेल भेजकर इस फैसले को पलटने की सुविधा मांगी थी और आयोग के डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर ने IT डिवीज़न को सुधार करने का निर्देश भी दिया था, लेकिन आरोप है कि फाइनल लिस्ट पब्लिश होने से पहले यह सुविधा नहीं दी गई। हालांकि, CEO गोयल ने हटाए गए वोटरों के बारे में इंडिया टुडे टीवी के सवालों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा मुझे इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। मैं अपनी रिपोर्ट देखूंगा और फिर बताऊंगा। यह घटनाक्रम एक और रिपोर्ट को लेकर मचे भारी विवाद के बीच सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने CEO ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर लगातार आपत्तियां जताई थीं, जिनमें SIR से जुड़े फैसले भी शामिल थे।

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इस मामले पर प्रधानमंत्री पर सीधा हमला करते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी के चहेते ज्ञानेश कुमार लोकतंत्र का गला घोंट रहे हैं। पार्टी ने एक्स पर लिखा वोट देने के अधिकार के बारे में बड़ी-बड़ी बातें करने वाले ज्ञानेश कुमार ही वोटर्स के अधिकार छीन रहे हैं। नरेंद्र मोदी के कहने पर, ज्ञानेश कुमार ने पूरे सिस्टम पर कब्ज़ा कर लिया है और 'वोट चोरी' जैसे देश-विरोधी काम कर रहे हैं।

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बैंक हड़ताल से पहले केंद्र का बड़ा फैसला: कर्मचारियों-पेंशनर्स को 25 सितंबर को मिलेगा वेतन-पेंशन

नई दिल्ली। देशभर में 28 से 30 सितंबर 2026 तक प्रस्तावित तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल को देखते हुए केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के भुगतान को लेकर अहम व्यवस्था की है। जानें किन कर्मचारियों को मिलेगा लाभ।

वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के अंतर्गत नियंत्रक महालेखा विभाग (CGA) की ओर से जारी कार्यालय ज्ञापन के मुताबिक, सितंबर 2026 का वेतन, मजदूरी और पेंशन 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को अग्रिम रूप से जारी की जा सकती है।

सरकार ने यह कदम बैंक हड़ताल के दौरान बैंकिंग लेनदेन प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए उठाया है, ताकि केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को भुगतान में किसी तरह की परेशानी या देरी का सामना न करना पड़े।

केंद्रीय कर्मचारियों को 25 सितंबर को वेतन

  • सरकारी आदेश के अनुसार केंद्र सरकार के सभी कर्मचारियों का सितंबर महीने का वेतन 25 सितंबर को अग्रिम रूप से जारी किया जा सकता है।
  • इसमें रक्षा, डाक और दूरसंचार विभाग के कर्मचारी भी शामिल हैं।
  • आमतौर पर महीने के निर्धारित भुगतान चक्र के अनुसार मिलने वाला वेतन बैंक हड़ताल की संभावित अवधि से पहले उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
  • इससे हड़ताल के दौरान बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होने की स्थिति में वेतन भुगतान पर असर पड़ने की संभावना कम होगी।

औद्योगिक कर्मचारियों की मजदूरी भी पहले मिलेगी

ज्ञापन में केंद्र सरकार के औद्योगिक कर्मचारियों की सितंबर 2026 की मजदूरी के संबंध में भी निर्देश दिए गए हैं।

इन कर्मचारियों को भी 25 सितंबर को अग्रिम भुगतान किया जा सकता है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य बैंक हड़ताल के कारण मजदूरी भुगतान में होने वाली संभावित देरी से बचाव करना है।

पेंशनर्स के लिए भी राहत

  • केंद्र सरकार के पेंशनर्स के लिए भी सितंबर महीने की पेंशन 25 सितंबर को जारी करने की व्यवस्था की गई है।
  • यह भुगतान संबंधित बैंक अथवा भुगतान एवं लेखा कार्यालय (PAO) के माध्यम से किया जा सकता है।
  • इसमें केंद्र सरकार के संबंधित विभागों से जुड़े पेंशनभोगी शामिल होंगे।

अक्टूबर के भुगतान में हो सकता है समायोजन

सरकार ने स्पष्ट किया है कि 25 सितंबर को किया जाने वाला वेतन, मजदूरी या पेंशन भुगतान अग्रिम भुगतान माना जाएगा।

बाद में कर्मचारी या पेंशनर की पूरे महीने की वास्तविक देय राशि निर्धारित होने पर आवश्यक समायोजन किया जाएगा।

यदि अग्रिम भुगतान और वास्तविक देय राशि में कोई अंतर सामने आता है तो उसका समायोजन अक्टूबर 2026 के वेतन या मजदूरी में किया जा सकता है।

अन्य जरूरी भुगतान भी पहले निपटाने के निर्देश

सरकार ने वेतन और पेंशन के अलावा सितंबर के अंतिम दिनों में होने वाले अन्य जरूरी भुगतान और बैंकिंग लेनदेन को भी जहां संभव हो, पहले पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

बैंक हड़ताल की प्रस्तावित तारीखें सितंबर तिमाही के अंतिम दिनों के साथ पड़ रही हैं।

ऐसे में सरकारी भुगतान और दूसरे जरूरी बैंकिंग कार्यों में संभावित देरी को देखते हुए विभागों को अग्रिम व्यवस्था करने को कहा गया है।

किन कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलेगा लाभ?

इस व्यवस्था के दायरे में मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • केंद्र सरकार के कर्मचारी
  • रक्षा विभाग के कर्मचारी
  • डाक विभाग के कर्मचारी
  • दूरसंचार विभाग के कर्मचारी
  • केंद्र सरकार के औद्योगिक कर्मचारी
  • संबंधित केंद्र सरकार के पेंशनर्स
  • सभी मंत्रालयों और विभागों को निर्देश

कार्यालय ज्ञापन में सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को इन निर्देशों को अपने अधीनस्थ कार्यालयों तक तत्काल पहुंचाने को कहा गया है।

भारतीय रिजर्व बैंक से भी सभी बैंकों की संबंधित भुगतान शाखाओं को आवश्यक कार्रवाई के लिए इन निर्देशों से अवगत कराने को कहा गया है।

इस व्यवस्था के तहत 28 से 30 सितंबर की प्रस्तावित बैंक हड़ताल से पहले 25 सितंबर को वेतन, मजदूरी और पेंशन का अग्रिम भुगतान किया जा सकता है।

इससे बैंकिंग सेवाओं में संभावित व्यवधान के बावजूद केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के भुगतान को समय पर उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है।

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