इधर जिनपिंग ने अमेरिका में किया लैंड, उधर सैटेलाइट इमेज ने कर दिया चीन के परमाणु वारहेड पर बड़ा खुलासा!
चीन देश भर में कई जगहों पर अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार कर रहा है। परमाणु रिसर्च, हथियार बनाने और टेस्टिंग से जुड़ी सुविधाओं में नए निर्माण और अपग्रेड की खबरें हैं। द टेलीग्राफ ने सैटेलाइट तस्वीरों और परमाणु विशेषज्ञों के विश्लेषण के आधार पर रिपोर्ट दी है कि सात जगहों पर गतिविधियां देखी गई हैं: पिंगटोंग, ज़िटोंग, लोप नूर, जिउक्वान, मियानयांग, जिंटा और गुआंगयुआन। यह निर्माण कार्य चीन के परमाणु हथियार इंफ्रास्ट्रक्चर के अलग-अलग हिस्सों में हो रहा है। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सरकारी दौरे पर वाशिंगटन में हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत करने वाले हैं। अमेरिका पहुंचने के बाद शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और अमेरिका को "प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार" होना चाहिए। उन्होंने सहयोग, संतुलित प्रतिस्पर्धा और मतभेदों को संभालने लायक रखने पर आधारित स्थिर रिश्ते की वकालत की।
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सैटेलाइट तस्वीरों से क्या पता चलता है?
रिपोर्ट के अनुसार, सैटेलाइट तस्वीरों में चीन के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े सात अलग-अलग जगहों पर निर्माण और अपग्रेड का काम दिखाई दे रहा है। मध्य चीन के पिंगटोंग में अखबार द्वारा बताए गए विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्माण प्लूटोनियम पिट्स (परमाणु हथियारों के मुख्य हिस्से) बनाने वाली सुविधाओं से जुड़ा है। सिचुआन प्रांत के ही ज़िटोंग में भी नए बंकर और दूसरी संरचनाएं बनाए जाने की खबर है। लोप नूर और जिउक्वान की साइटें चीन के न्यूक्लियर टेस्टिंग और मिलिट्री प्रोग्राम से जुड़ी हैं, जबकि मियानयांग में न्यूक्लियर रिसर्च की बड़ी सुविधाएं मौजूद हैं। खबरों के मुताबिक जिंटा और गुआंगयुआन में भी निर्माण कार्य देखा गया है। सैटेलाइट तस्वीरों पर आधारित पिछली रिसर्च में सिचुआन में चीन की न्यूक्लियर सुविधाओं के काफी विस्तार का भी पता चला है। फरवरी में छपी न्यूयॉर्क टाइम्स की एक जांच रिपोर्ट में ज़िटोंग और पिंगटोंग में नए निर्माण और मियानयांग में एक बड़ी लेज़र सुविधा के विस्तार के बारे में बताया गया था।
चीन का न्यूक्लियर जखीरा कितना बड़ा है?
फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स (FAS) का अनुमान है कि चीन के पास अभी लगभग 620 न्यूक्लियर वॉरहेड हैं, जिससे उसका जखीरा न्यूक्लियर हथियार रखने वाले नौ देशों में तीसरा सबसे बड़ा बन गया है। FAS ने कहा कि भविष्य के डिलीवरी सिस्टम के लिए और वॉरहेड बनाए जा रहे हैं। इस अनुमान का मतलब यह नहीं है कि सभी 620 वॉरहेड तैनात हैं और तुरंत इस्तेमाल के लिए तैयार हैं। FAS का कहना है कि माना जाता है कि चीन के लगभग सभी न्यूक्लियर वॉरहेड उनके डिलीवरी सिस्टम से अलग रखे गए हैं, जो अमेरिका और रूस की ऑपरेशनल रूप से तैनात सेनाओं के सिस्टम से अलग है।
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क्या चीन और ज़्यादा परमाणु मिसाइलें बना रहा है?
2026 FAS न्यूक्लियर नोटबुक के अनुसार, चीन अपनी ज़मीन-आधारित परमाणु ताक़त को लगातार बढ़ा रहा है। देश सॉलिड-फ्यूल वाली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) के लिए साइलो (मिसाइल रखने के भूमिगत ठिकाने) के तीन बड़े नए क्षेत्रों पर काम कर रहा है, साथ ही अपनी लिक्विड-फ्यूल वाली DF-5 ICBMs के लिए भी अतिरिक्त साइलो बना रहा है। FAS का कहना है कि चीन नए ICBM वेरिएंट और अन्य एडवांस्ड स्ट्रैटेजिक डिलीवरी सिस्टम विकसित कर रहा है, और साथ ही अपनी दोहरी क्षमता वाली DF-26 इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल फ़ोर्स का भी विस्तार कर रहा है। इसलिए, चीन के परमाणु इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार में सिर्फ़ मिसाइलों की संख्या बढ़ाना ही शामिल नहीं है। इसमें एक व्यापक और अधिक विविध परमाणु ताक़त को सपोर्ट करने के लिए ज़रूरी सुविधाएं, रिसर्च और प्रोडक्शन क्षमताएं भी शामिल हैं।
US Court का आदेश: Trump प्रशासन CNN और Politico की White House एंट्री तुरंत बहाल करे
अमेरिका के एक फ़ेडरल जज ने डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को CNN, MS NOW और Politico के लिए व्हाइट हाउस में एंट्री बहाल करने का आदेश दिया। जज ने कहा कि इन तीनों न्यूज़ ऑर्गनाइज़ेशन पर लगाया गया बैन शायद संविधान के ख़िलाफ़ था। अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज टिम केली ने यह आदेश तब दिया जब इन तीनों आउटलेट्स ने अपने रिपोर्टरों को व्हाइट हाउस में जाने से रोके जाने के बाद केस दायर किया था। यह फ़ैसला ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका है, जो मीडिया ऑर्गनाइज़ेशन की कवरेज की आलोचना करते रहे हैं और उनके साथ उनका टकराव चलता रहता है। ट्रंप ने 18 सितंबर को बैन का ऐलान किया था और सोशल मीडिया पर कहा था कि इन तीनों आउटलेट्स को "लगातार मनगढ़ंत बातें और झूठ नहीं लिखना या रिपोर्ट नहीं करना चाहिए।
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जस्टिस डिपार्टमेंट ने नेशनल सिक्योरिटी के आधार पर प्रशासन के इस कदम का बचाव करने की कोशिश की थी। इन तीनों संगठनों ने सोमवार को ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा किया था; यह कदम उनके रिपोर्टरों को व्हाइट हाउस परिसर में घुसने से रोके जाने के कुछ दिनों बाद उठाया गया था। अपने संयुक्त मुकदमे में CNN, MS NOW और Politico ने तर्क दिया कि उनकी रिपोर्टिंग के कंटेंट के आधार पर उन्हें चुनिंदा तरीके से बाहर रखना 'फर्स्ट अमेंडमेंट' (संविधान के पहले संशोधन) का उल्लंघन है। मुकदमे में प्रशासन के कदम को फर्स्ट अमेंडमेंट (संविधान के पहले संशोधन) का 'खुला उल्लंघन' बताया गया और कहा गया कि सरकार पत्रकारों को उनकी रिपोर्टिंग की वजह से कवरेज करने से नहीं रोक सकती। मीडिया संस्थानों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि उन्होंने सरकार को अपने मुकदमे के बारे में इसलिए बताया ताकि हम अपने फर्स्ट अमेंडमेंट अधिकारों की रक्षा कर सकें और इस सिद्धांत का बचाव कर सकें कि प्रेस क्या रिपोर्ट या प्रकाशित करेगा, यह सरकार तय नहीं करती।
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उन्होंने कहा अगर इसे चुनौती नहीं दी गई, तो इससे प्रेस की आज़ादी और सरकारी दखल से मुक्त स्वतंत्र पत्रकारिता के जनता के अधिकार को खतरा पैदा होगा। हालांकि, व्हाइट हाउस का कहना था कि राष्ट्रपति परिसर में जाने की सुविधा की कोई गारंटी नहीं है। एक्स पर पोस्ट किए गए एक बयान में प्रशासन ने कहा कि पहला संशोधन उन्हें प्रकाशित करने का अधिकार देता है; लेकिन यह उन्हें हार्ड पास, ब्रीफिंग रूम में सीट या प्रेस पूल में जगह पाने का हकदार नहीं बनाता है। इसी तरह, ट्रंप ने इस बात को भी खारिज कर दिया कि उनका प्रशासन प्रेस की आज़ादी पर हमला कर रहा है। ट्रुथ सोशल पर उन्होंने कहा कि वह आज़ाद प्रेस को महत्वपूर्ण मानते हैं, लेकिन उन्होंने बैन किए गए आउटलेट्स पर फ़ेक न्यूज़ फैलाने का आरोप लगाया।
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