Yamuna Expressway Bus Fire News: मुना एक्सप्रेस-वे पर 9 यात्रियों की जान लेने वाली बस का काला चिट्ठा
यमुना एक्सप्रेस-वे पर नई दिल्ली से महोबा जा रही बस में भीषण आग लगने से 9 यात्रियों की मौत हो गई. जांच में सामने आया कि बस बिना परमिट के चल रही थी और उस पर 64,400 रुपये के चालान बकाया थे. पुलिस ने लापरवाह चालक-परिचालक को हिरासत में ले लिया है. #yamunaexpressway #busfire #aajtakdigital #firenews Yamuna Expressway bus fire, Greater Noida bus accident, Sleeper bus fire, 9 dead, Dayanantpur village, Bus passengers injured, Uttar Pradesh accident, Road safety, Bus fire investigation, Kailash Hospital, Noida News, Noida Latest News, Noida News in Hindi, Noida Samachar आजतक के साथ देखिये देश-विदेश की सभी महत्वपूर्ण और बड़ी खबरें | Watch the latest Hindi news Live on the World's Most Subscribed News Channel on YouTube. #LatestNews #Aajtak #HindiNews Aaj Tak News Channel: आज तक भारत का सर्वश्रेष्ठ हिंदी न्यूज चैनल है । आज तक न्यूज चैनल राजनीति, मनोरंजन, बॉलीवुड, व्यापार और खेल में नवीनतम समाचारों को शामिल करता है। आज तक न्यूज चैनल की लाइव खबरें एवं ब्रेकिंग न्यूज के लिए बने रहें । #hindinews #newsinhindi #hindisamachar #breakingnews #aajtak #samachar #news अधिक समाचारों के लिए यहां क्लिक करें: https://www.youtube.com/@aajtak?sub_confirmation=1 About Channel: Aaj Tak is India's Best Hindi News Channel. Aaj Tak News Channel Covers The Latest News, Breaking News, Politics, Entertainment News, Business News and Sports News. Stay tuned for all the News in Hindi. Join Aaj Tak Whatsapp Channel: https://whatsapp.com/channel/0029Va7Rxc32ER6hBAuIL222 Watch Our Prime Shows on Aaj Tak: Vardaat — Real-life crime stories that shook the nation https://youtube.com/playlist?list=PLP-nGFpz3fa_WLJqwFuJlwfhAepqcOd3I&si=tJXqsrKVHOvxy4BJ Black & White with Anjana Om Kashyap - Big debates, sharp opinions, and political analysis https://youtube.com/playlist?list=PLP-nGFpz3fa_aLomcIgk-c_dRhuYOBphp&si=1wAaQfSUIfZ0OrIy Halla Bol — The nation’s most powerful debate on today’s top issues https://youtube.com/playlist?list=PLP-nGFpz3fa-ZT2YKfqzI-ayeZV0n8qAh&si=nnRN8_9u02p8QlG_ DasTak 2025: https://youtube.com/playlist?list=PLP-nGFpz3fa9q68r5rws67UxSUdhcHupG&si=QMiiUiKyXUP76DUk ताज़ा खबरों और LIVE अपडेट्स के लिए जुड़े रहें Aaj Tak के साथ - https://youtube.com/live/Nq2wYlWFucg?feature=share https://youtube.com/live/gH6ftEJDLGo?feature=share Download Aaj Tak APP, India’s No.1 Hindi News App: https://play.google.com/store/apps/details?id=in.AajTak.headlines&hl=hi Subscribe to Aaj Tak YouTube Channel: https://www.youtube.com/c/aajtak Visit Aaj Tak website: https://www.aajtak.in/ Follow us on Facebook: https://www.facebook.com/aajtak Follow us on Twitter: https://twitter.com/aajtak Follow us on Instagram: https://www.instagram.com/aajtak/ Subscribe our other Popular YouTube Channels: India Today: https://www.youtube.com/c/indiatoday SoSorry: https://www.youtube.com/c/sosorrypolitoons Good News Today: https://www.youtube.com/c/GoodNewsTodayOfficial AajTak AI: https://www.youtube.com/channel/UClZU5ouD9LkfgrelmL2auTg
हिटलर समर्थक पार्टी जर्मनी में चुनाव जीतकर भी क्यों नहीं बना पाई सरकार? वजह चौंकाने वाला!
जर्मनी की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जिस देश ने हिटलर के नाजी शासन का दौर देखा, जिस देश में 1945 के बाद यह कोशिश रही कि ऐसी हार्ड लाइन राइट विंग पॉलिटिक्स दोबारा मजबूत ना होने पाए। आज उसी जर्मनी में एएफडी यानी कि अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी नाम की एक फार राइट पार्टी लगातार बड़ी हो रही है। सितंबर में पहले एक राज्य में चुनाव हुआ। फिर अब मैक्लिनबर्ग और वेस्टर्न पोमेरनिया में चुनाव हुआ और वहां एएफडी सबसे बड़ी पार्टी बनकर जो है वह सामने आई। सनोग्जी में जो चुनाव हुआ था वहां 44% वोट जो है वो एएफडी को मिला लेकिन बहुमत से वो दूर रह गई। वहीं एएफडी जो है अब जर्मनी में राजनीति में ऐसी जगह पहुंच गई है जहां उसे नजरअंदाज करना मुश्किल है। लेकिन यहां दिलचस्प बात ये है कि इतने वोट मिल रहे हैं उसके बावजूद भी ये एएफडी सरकार नहीं बना पा रही है।
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एएफडी को इतने वोट क्यों मिल रहे हैं?
जिस देश का नाजी अतीत आज भी उसकी राजनीति को प्रभावित करता है, वहां एएफडी को बार-बार हिटलर नाजी विचारधारा के संदर्भ में क्यों देखा जाता है? सबसे बड़ा सवाल ये कि क्या यह सिर्फ एक पार्टी की जीत है या फिर जर्मनी की राजनीति सच में बदल रही है? सैग्जोनी में एएफडी को करीब 44% वोट मिले। 83 सीटों वाली विधानसभा में उसे 39 सीटें मिली। यानी कि सरकार बनाने के लिए जितनी सीटें चाहिए थी उससे पार्टी सिर्फ तीन सीट पीछे रही। यही वजह है कि यह जीत इतनी बड़ी मानी जा रही है क्योंकि जर्मनी में 1945 के बाद किसी फॉर राइट पार्टी के लिए किसी राज्य में सरकार बनाने के इतना करीब पहुंचना एक बहुत बड़ा राजनीतिक बदलाव माना जा रहा है। इसके बाद अगर हम बात करें तो मैक्लिनर्ग और वेस्टर्न पोरेनिया में भी एएफडी करीब 38% वोट लेकर सबसे बड़ी पार्टी बन गई। वहीं चांसलर फेड्रिक मर्ज की सीडीयू को करीब 5% वोट मिले। यानी कि मामला सिर्फ एएफडी के मजबूत होने का नहीं है। जर्मनी की पुरानी और बड़ी पार्टियों के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। जो सेंट्रल पॉलिटिक्स करते हैं, सेकुलर पॉलिटिक्स करते हैं, उनके सामने चुनौती है। अब एक और बात समझना जरूरी है। सबसे ज्यादा वोट मिलना और सरकार बन जाना एक ही बात नहीं है। क्योंकि एएफडी को जहां 39 सीटें मिली थी, वहां वो अकेले सरकार बनाने के लिए उसे और सीटों की जरूरत थी। महज तीन सीटें दूर। इसके लिए उसे दूसरी पार्टी के साथ जाना चाहिए था। लेकिन जर्मनी की जो बड़ी पार्टी फिलहाल एएफडी के साथ सरकार बनाने को तैयार नहीं है। इसे वहां फायर वाल कहा जाता है। बाकी पार्टियां एएफडी से राजनीतिक दूरी बनाए रखना चाहती हैं। यानी कि जनता के बीच एएफडी का जो समर्थन बढ़ रहा है। लेकिन बाकी पार्टियों के बीच उसे सरकार में शामिल ना करने या उसके साथ सरकार बनाने को लेकर कोई सहमति नहीं है।
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जर्मनी की जो मुख्यधारा की पार्टियां हैं उसने एएफडी के साथ गठबंधन या राजनीतिक सहयोग नहीं करने की नीति बनाई हुई है। यानी कि चुनाव में एएफडी कितनी भी सीटें जीत ले अगर उसके पास अकेले बहुमती है यानी कि 51% नहीं है तो सरकार बनाने के लिए दूसरी पार्टियों के साथ उसको जाना होगा। लेकिन यहां यही खेल हो जाता है कि दूसरी पार्टियां एएफडी के साथ जाने से इंकार कर देती हैं। इसी राजनीतिक दीवार को फायर वॉल कहा जाता है। जैसे किसी इमारत में आग लगने को एक हिस्से से दूसरे हिस्से में फैलने से रोकने के लिए दीवार बनाई जाती है। वैसे ही जर्मनी में यहां राजनीतिक फायर वॉल एएफडी को चुना की चुनावी ताकत को सीधे सत्ता की साझेदारी तक पहुंचने से रोकने के लिए काम करती है। इसके पीछे जो जर्मनी का नाजी अतीत है वो भी एक बड़ी वजह है। द्वितीय विश्व युद्ध और अडॉल्फ हिटलर के नाजी शासन के भयावह इतिहास के बाद जर्मनी में यह स्पष्ट राजनीतिक सहमति रही है कि देश में फिर कभी अति राष्ट्रवाद या फांसीवाद का फिर सिर ना उठाने दिया जाए क्योंकि एएफडी की विचारधारा नीतियां अत्याधिक राष्ट्रवादी है। अप्रवासी विरोधी है। कई बार नस्लवादी उसे माना तक जाता है। इसलिए मुख्यधारा के दल इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा मानते हैं। यानी कि वह चुनाव में देखिए हिस्सा ले रहा है। लेकिन उसके साथ नहीं जाना चाहते। एएफडी को नाजी पार्टी कहना सही नहीं होगा लेकिन दोनों अलग संगठन है और अलग दौर की पार्टियां हैं। लेकिन एएफडी की जो दक्षिणपंथी राजनीति है और उसके कुछ नेताओं के जो बयान है उसको लेकर जर्मनी में लंबे समय से विवाद रहा है। इसलिए मुख्यधारा की पार्टियां उससे दूरी बनाए रखती हैं।
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