स्टीव स्मिथ अब इस हकीकत को स्वीकार कर चुके हैं कि 2026 टी20 वर्ल्ड कप में उनकी जगह नहीं बन पाई, लेकिन उन्होंने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से पूरी तरह दूरी बनाने का मन नहीं बनाया है। बता दें कि ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी बल्लेबाज़ ने हाल ही में यह साफ किया है कि उनका अगला बड़ा लक्ष्य 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस ओलंपिक हैं, जहां क्रिकेट लंबे अंतराल के बाद वापसी करने जा रहा है।
गौरतलब है कि एक सदी से भी ज़्यादा समय बाद ओलंपिक मंच पर क्रिकेट को शामिल किया जा रहा है। बिग बैश लीग के दौरान बात करते हुए स्मिथ ने कहा कि वह बड़े टूर्नामेंटों में ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं और 2026 टी20 वर्ल्ड कप से बाहर होने के बाद भी खुद को टी20 फॉर्मेट के लिए तैयार रख रहे हैं। ब्रिस्बेन हीट के खिलाफ 56 रन की पारी खेलने के बाद उन्होंने माना कि मौजूदा टीम संयोजन को देखते हुए वर्ल्ड कप का मौका अब शायद नहीं आए, लेकिन ओलंपिक की संभावना उन्हें प्रेरित कर रही है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, स्मिथ ने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया के पास इस समय दो ऐसे ओपनर हैं जो लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, इसलिए वह इस फैसले को लेकर शांत हैं और बिग बैश में अपने खेल का आनंद ले रहे हैं। उनका मानना है कि लगातार अच्छा प्रदर्शन करते रहना और मौके का इंतज़ार करना ही उनके हाथ में है।
बता दें कि चैंपियंस ट्रॉफी 2025 से ऑस्ट्रेलिया के बाहर होने के बाद स्मिथ ने वनडे क्रिकेट को अलविदा कह दिया था। उन्होंने खुद स्वीकार किया कि इस फैसले के पीछे फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट पर ज़्यादा ध्यान देने की इच्छा भी एक वजह रही। इंडियन प्रीमियर लीग की टीमों से दूरी के बाद उन्होंने अमेरिका की मेजर लीग क्रिकेट और घरेलू बिग बैश लीग पर फोकस किया है, जहां उनका हालिया प्रदर्शन काफ़ी प्रभावशाली रहा है।
गौरतलब है कि बिग बैश के मौजूदा सत्र में स्मिथ ने तीन पारियों में एक शतक और एक अर्धशतक जड़ा है और उनका बल्लेबाज़ी अंदाज़ बाकी खिलाड़ियों से अलग नज़र आ रहा है। टी20 क्रिकेट में अपनी पावर-हिटिंग को लेकर अक्सर सवालों का सामना करने वाले स्मिथ ने बताया कि उन्होंने ऑफ-सीज़न में ताकत बढ़ाने पर खास काम किया है, ताकि गेंद को और दूर तक मार सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि पारी की शुरुआत करना उनके खेल को सूट करता है, क्योंकि शुरुआती ओवरों में फील्ड खुली होती है और वह अपनी खास शॉट रेंज का बेहतर इस्तेमाल कर पाते हैं। साथ ही उन्होंने माना कि लगातार टी20 मैच खेलने से लय बनाए रखना आसान होता है, जो अलग-अलग अंतराल में कुछ मैच खेलने से संभव नहीं हो पाता।
ऑस्ट्रेलिया पहले ही अपनी टी20 वर्ल्ड कप टीम घोषित कर चुका है, जिसमें मिचेल मार्श और ट्रैविस हेड को ओपनर के रूप में तरजीह दी गई। ऐसे में फिलहाल स्मिथ का फोकस टेस्ट क्रिकेट पर भी बना हुआ है। बिग बैश के बाद वह लंबा ब्रेक लेंगे और फिर साल के अंत में बांग्लादेश और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज़ की तैयारी में जुटेंगे।
Continue reading on the app
एशियाई शेयर बाजार मंगलवार को वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितता के बीच दबाव में रहे, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को लेकर टैरिफ धमकियों ने जोखिम भरे परिसंपत्ति वर्गों पर बेचैनी बढ़ा दी है और निवेशकों की सतर्कता बढ़ा दी।
मौजूदा कारोबार सत्र में S&P 500 फ्यूचर्स एशियाई ट्रेड में करीब 1 % गिरावट पर दिखे, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशक अमेरिकी बाजारों के प्रति भी बेहद सतर्क बने हुए।
जापान के बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई, जहाँ निक्केई 225 और TOPIX इंडेक्स लगभग 1 % नीचे आए। जाँच के बाद यह पता चला है कि जापान की प्रधानमंत्री सनाए टाइची ने 8 फरवरी को होने वाले तत्काल आम चुनाव की घोषणा की है, जिसके चलते निवेशक सरकारी खर्च, कर कटौती और रक्षा बजट बढ़ाने जैसी घोषणाओं को लेकर अनिश्चितता महसूस कर रहे हैं।
गौरतलब है कि टाइची के चुनाव घोषणा के बाद जापानी सरकारी बॉन्ड की यील्ड 27 साल के उच्च स्तर से ऊपर पहुँच गई, जिससे वहाँ की गृह वित्तीय स्थितियों के प्रति चिंता और बढ़ी है।
चीन के बाजारों पर थोड़ी समर्थन की लहर देखने को मिली, क्योंकि सरकारी आंकड़ों में यह दिखा कि 2025 में जीडीपी ने लगभग 5 % की वृद्धि दर को पूरा किया, लेकिन चौथे तिमाही के डेटा से पता चलता है कि आर्थिक वृद्धि गति कुछ धीमी हुई है।
इसके अलावा, दक्षिण कोरिया के KOSPI ने कुछ स्थिरता दिखाते हुए शुरुआती नुकसान को पलटकर लगभग सपाट कारोबार किया, जबकि ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 लगभग 0.6 % नीचे रहा।
मौजूदा वैश्विक ट्रेड तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजारों पर भी दबाव देखा गया, जहाँ विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) के बहिर्वाह और रुपये की कमजोरी से निफ्टी और सेंसेक्स में गिरावट आई है। औद्योगिक और आईटी शेयर कमजोर रहे हैं, जबकि सुरक्षित संपत्ति जैसे सोना और चांदी में निवेश बढ़ा है।
इस प्रकार, ट्रंप की ग्रीनलैंड रणनीति से उत्पन्न ट्रेड तनाव और जापान में राजनीतिक अस्थिरता एशियाई बाजारों में जोखिम की भावना को बढ़ा रहे हैं और निवेशकों को अधिक सतर्क बनाए हुए हैं, जिससे बाजारों में बेचैनी का माहौल बना हुआ है।
Continue reading on the app