Mumbai Road Accident: मुंबई कोस्टल रोड पर भीषण हादसा, BMW सवार 3 लोगों की मौत; एक की हालत गंभीर
मुंबई के कोस्टल रोड पर रविवार, 20 सितंबर की सुबह एक भीषण सड़क हादसा हो गया। लोटस जेट्टी के पास BMW कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में कार सवार तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल है।
हादसा सुबह करीब 5:20 बजे हुआ। बीएमसी के मुताबिक, BMW कार मरीन ड्राइव से हाजी अली की ओर जा रही थी। इसी दौरान कथित तौर पर तेज रफ्तार के कारण चालक ने कार पर नियंत्रण खो दिया और वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
हादसे में तीन लोगों की मौत, एक गंभीर
हादसे के बाद कार में सवार सभी चार लोगों को नायर अस्पताल ले जाया गया। वहां तीन लोगों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि एक व्यक्ति की हालत गंभीर बताई गई है।
लोटस जेट्टी के पास हुआ हादसा
पुलिस के अनुसार, दुर्घटना रविवार सुबह करीब 5:20 बजे मुंबई कोस्टल रोड पर लोटस जेट्टी के पास हुई। BMW कार मरीन ड्राइव से हाजी अली की ओर जा रही थी।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, चालक ने कथित तौर पर तेज रफ्तार के चलते कार पर नियंत्रण खो दिया। हादसे के कारणों की विस्तृत जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
Balram Jayanti 2026: आज है बलराम जयंती, क्यों कहलाते हैं ‘हलधर’? जानें जन्म से जुड़ा रहस्य
Balram Jayanti 2026: हिंदू धार्मिक परंपरा में भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में इस पर्व को हल षष्ठी, बलदेव छठ, ललही छठ और बलभद्र जयंती जैसे नामों से भी जाना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पर्व शक्ति, संयम और कृषि संस्कृति से जुड़ा हुआ है। बलराम जी का संबंध हल और कृषि से होने के कारण इस दिन की परंपराओं में खेती-किसानी का भी विशेष महत्व दिखाई देता है।
कब है बलराम जयंती 2026?
भगवान बलराम की जन्मतिथि को लेकर अलग-अलग धार्मिक मत मिलते हैं। एक मान्यता के अनुसार, उनका जन्म हल षष्ठी के दिन हुआ था। वहीं गर्ग संहिता में बलराम जी के जन्म को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि से जोड़ा गया है।
इस वर्ष षष्ठी तिथि 16 सितंबर को सुबह 8:59 बजे शुरू होकर 17 सितंबर को सुबह 10:47 बजे समाप्त होगी। इसी वजह से कई जगहों पर 16 सितंबर 2026 को बलराम जयंती मनाई जा रही है।
क्यों कहलाते हैं भगवान बलराम ‘हलधर’?
भगवान बलराम के कई नामों में हलधर प्रमुख है। हलधर का अर्थ होता है—हल धारण करने वाला। पौराणिक कथाओं में उन्हें हल और मूसल धारण करने वाले योद्धा के रूप में वर्णित किया गया है।
भगवान बलराम का हल केवल खेती से जुड़ा उपकरण नहीं, बल्कि उनके प्रमुख अस्त्र के रूप में भी बताया जाता है। इसी वजह से उन्हें हलधर और हलायुध जैसे नामों से भी जाना जाता है।
बलराम जी का संबंध धरती और कृषि से भी जोड़ा जाता है। यही कारण है कि उनसे जुड़ी धार्मिक परंपराओं में हल और खेती-किसानी का विशेष महत्व माना जाता है।
देवकी के गर्भ से रोहिणी तक कैसे पहुंचे बलराम?
भगवान बलराम के जन्म की पौराणिक कथा भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से भी जुड़ी हुई है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, बलराम जी पहले माता देवकी के गर्भ में थे।
उस समय मथुरा के राजा कंस को देवकी की संतानों से भय था। कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने योगमाया को आदेश दिया कि देवकी के गर्भ में पल रहे सातवें भ्रूण को माता रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया जाए।
पौराणिक कथा के मुताबिक, योगमाया ने ऐसा ही किया और बाद में बलराम जी का जन्म माता रोहिणी के गर्भ से हुआ। गर्भ को एक स्थान से दूसरे स्थान पर खींचकर ले जाने की इस कथा से ही उनका एक नाम ‘संकर्षण’ जुड़ा माना जाता है। इस तरह बलराम जी की जन्म कथा भगवान श्रीकृष्ण के अवतार की कथा से भी गहराई से जुड़ी हुई मानी जाती है।
बलराम जयंती पर कैसे करें पूजा?
बलराम जयंती के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान बलराम का ध्यान किया जाता है। पूजा स्थल पर भगवान बलराम की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करके उन्हें जल, पुष्प, फल और नैवेद्य अर्पित किया जा सकता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान बलराम के साथ भगवान श्रीकृष्ण का भी स्मरण किया जाता है। पूजा के दौरान श्रद्धालु अपनी परंपरा और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जन्म कथा, धार्मिक मान्यताएं और पूजा से जुड़े विवरण पौराणिक एवं धार्मिक परंपराओं पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और पंचांगों में तिथि या पूजा की परंपरा में अंतर हो सकता है।
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