आज की आधुनिक कारों में आरामदायक ड्राइविंग के लिए कई स्मार्ट फीचर्स दिए जाते हैं। इनमें ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल भी शामिल है। खास बात यह है कि अब यह सुविधा केवल महंगी कारों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई बजट और एंट्री-लेवल मॉडल में भी देखने को मिलती है। हालांकि, बहुत से चालक इसके Auto और Recirculation मोड का सही इस्तेमाल नहीं कर पाते। इन दोनों फीचर्स को समझने से सफर ज्यादा आरामदायक बनाया जा सकता है।
Auto Mode खुद संभालता है AC की सेटिंग
ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल में Auto बटन दबाने के बाद ड्राइवर को बार-बार फैन या एयरफ्लो की सेटिंग बदलने की जरूरत नहीं पड़ती। आपको केवल मनपसंद तापमान निर्धारित करना होता है। इसके बाद कार का क्लाइमेट कंट्रोल सिस्टम केबिन के तापमान के अनुसार फैन की गति, हवा के प्रवाह और कूलिंग या हीटिंग को अपने आप नियंत्रित करता है।
गर्म केबिन में तेज कूलिंग का फायदा
अगर कार लंबे समय तक धूप में खड़ी रही है, तो अंदर का तापमान काफी बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में Auto Mode शुरुआत में ज्यादा तेज एयरफ्लो के जरिए केबिन को जल्दी आरामदायक बनाने की कोशिश करता है। जैसे-जैसे तापमान आपके निर्धारित स्तर के करीब पहुंचता है, सिस्टम फैन की गति को कम कर सकता है। इससे आपको लगातार मैनुअल सेटिंग करने की परेशानी नहीं होती।
Recirculation Mode का असली काम क्या है?
Recirculation Mode कार के अंदर मौजूद हवा को दोबारा AC सिस्टम के जरिए सर्कुलेट करता है। इसे सक्रिय करने पर सिस्टम मुख्य रूप से बाहर की हवा लेने के बजाय केबिन की हवा को फिर से ठंडा या गर्म करता है। वहीं, इसे बंद रखने पर बाहरी हवा केबिन में प्रवेश करती रहती है।
गर्मियों में कब दबाएं Recirculation बटन?
गर्म मौसम में यह मोड खास तौर पर उपयोगी हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि कार तेज धूप में खड़ी रही है और अंदर काफी गर्मी है, तो AC के साथ Recirculation Mode इस्तेमाल करने से पहले से ठंडी हो रही केबिन हवा को दोबारा सर्कुलेट करने में मदद मिल सकती है। इससे केबिन को आरामदायक तापमान तक पहुंचाने में मदद मिलती है।
हालांकि, इसे बहुत लंबे समय तक लगातार चालू रखना उचित नहीं है। लंबे समय तक बाहरी हवा का प्रवेश कम रहने पर केबिन की हवा बासी या भारी महसूस हो सकती है। इसलिए जरूरत के अनुसार समय-समय पर बाहर की ताजी हवा को अंदर आने देना बेहतर है।
सर्दियों में भी उपयोगी है यह फीचर
Recirculation Mode का इस्तेमाल केवल गर्मियों तक सीमित नहीं है। सर्दियों में जब कार का केबिन बाहर की तुलना में गर्म हो जाता है, तब अंदर की गर्म हवा को दोबारा सर्कुलेट करने से केबिन का तापमान बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, लंबे समय तक इसे चालू रखने के बजाय जरूरत के अनुसार बाहरी हवा का प्रवाह भी बनाए रखना चाहिए।
Mileage पर कितना पड़ता है असर?
AC का इस्तेमाल इंजन या वाहन की ऊर्जा पर अतिरिक्त मांग डाल सकता है, लेकिन केवल Auto या Recirculation बटन को माइलेज बढ़ाने या घटाने का सीधा कारण मानना सही नहीं होगा। सही मोड का इस्तेमाल मुख्य रूप से केबिन को जल्दी आरामदायक बनाने और AC की कार्यक्षमता से जुड़ा है। इसलिए मौसम और ड्राइविंग परिस्थितियों के अनुसार इन फीचर्स का इस्तेमाल करना सबसे बेहतर तरीका है।
- डॉ. अनिमेष शर्मा
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इलेक्ट्रिक स्कूटर अब केवल शहर के छोटे सफर तक सीमित नहीं रह गए हैं। बेहतर बैटरी क्षमता और लंबी रेंज के साथ बाजार में ऐसे कई मॉडल मौजूद हैं, जिन्हें लंबी दूरी की यात्रा के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यही वजह है कि अब EV यूजर्स के बीच रोड ट्रिप को लेकर भी दिलचस्पी बढ़ रही है।
दिल्ली से ऋषिकेश की दूरी करीब 260 किलोमीटर है। ऐसे में अगर आपके पास लंबी रेंज वाला इलेक्ट्रिक स्कूटर है, तो फुल चार्ज बैटरी के साथ यह सफर पूरा करना संभव हो सकता है। हालांकि वास्तविक रेंज सड़क, ट्रैफिक, स्पीड, वजन और मौसम जैसी परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
260KM का सफर, अब EV से भी मुमकिन
कुछ साल पहले इलेक्ट्रिक स्कूटर मुख्य रूप से शहर के भीतर आने-जाने के लिए पसंद किए जाते थे। कम बैटरी क्षमता और सीमित रेंज के कारण लंबी दूरी की यात्रा चुनौतीपूर्ण होती थी। अब 300 किलोमीटर से ज्यादा दावा की गई रेंज वाले स्कूटर बाजार में मौजूद हैं, जिससे लंबी दूरी के सफर का विकल्प खुल गया है।
Komaki SE Ultra: 418KM की जबरदस्त रेंज
लंबी रेंज वाले इलेक्ट्रिक स्कूटरों की सूची में Komaki SE Ultra प्रमुख नाम है। इसमें 7.2 kWh की बैटरी दी गई है और कंपनी के अनुसार यह सिंगल चार्ज में 418 किलोमीटर तक की रेंज देता है। इस दावे के आधार पर दिल्ली से ऋषिकेश का सफर एक चार्ज में पूरा किया जा सकता है और बैटरी में कुछ रेंज शेष भी रह सकती है। स्कूटर में LED फ्रंट लाइट्स, LED DRLs, एंटी-स्किड टेक्नोलॉजी, पार्किंग असिस्ट और रिवर्स असिस्ट जैसे फीचर्स मिलते हैं।
Simple Ultra: स्पीड के साथ लंबी रेंज
Simple Ultra भी लंबी दूरी के लिए आकर्षक विकल्प है। इसमें 6.5 kWh बैटरी दी गई है और यह 400 किलोमीटर तक की रेंज का दावा करता है। इसकी टॉप स्पीड 115 km/h है। कंपनी के अनुसार यह 0-40 km/h की रफ्तार 2.77 सेकंड में पकड़ सकता है। 0 से 80 प्रतिशत चार्ज होने में करीब 2 घंटे 15 मिनट लगते हैं।
Komaki XR7: 322KM रेंज और बड़ा बूट
Komaki XR7 करीब 322 किलोमीटर की दावा की गई रेंज के साथ आता है। इसकी टॉप स्पीड 55 km/h है। इसमें 35 लीटर का बूट स्पेस मिलता है, जो रोड ट्रिप के दौरान सामान रखने के लिए उपयोगी हो सकता है। स्कूटर में 12-इंच के व्हील्स और डिस्क ब्रेक्स भी दिए गए हैं।
Ola S1 X+: 125 km/h की टॉप स्पीड
Ola S1 X+ का 5.2 kWh बैटरी वाला वेरिएंट 320 किलोमीटर तक की रेंज का दावा करता है। इसकी टॉप स्पीड 125 km/h है। इस रेंज के आधार पर यह भी दिल्ली से ऋषिकेश की दूरी एक बार फुल चार्ज करने पर तय करने में सक्षम हो सकता है।
सफर से पहले रेंज जरूर जांचें
हालांकि कंपनियों द्वारा बताई गई रेंज आदर्श परिस्थितियों में प्राप्त हो सकती है। हाईवे पर लगातार तेज रफ्तार, चढ़ाई, अतिरिक्त वजन और मौसम वास्तविक रेंज को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए दिल्ली से ऋषिकेश जैसी यात्रा पर निकलने से पहले बैटरी प्रतिशत, चार्जिंग विकल्प और रूट की स्थिति जरूर जांचना बेहतर रहेगा।
- डॉ. अनिमेष शर्मा
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