आईएमएफ ने भारत की 2025 तक की विकास दर को बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत किया
वॉशिंगटन, 19 जनवरी (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने सोमवार को साल 2025 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। यह अनुमान पहले की तुलना में 0.7 प्रतिशत ज्यादा है। आईएमएफ ने इसके पीछे की वजह साल के दूसरे हिस्से में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन को बताया है।
आईएमएफ की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक अपडेट रिपोर्ट के अनुसार, तीसरी तिमाही में बेहतर नतीजे और चौथी तिमाही में मजबूत रफ्तार के चलते भारत की विकास दर का अनुमान बढ़ाया गया है। इससे यह भी साफ होता है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
हालांकि, आईएमएफ का कहना है कि आने वाले वर्षों में भारत की विकास दर में थोड़ी कमी आ सकती है। अनुमान के मुताबिक, साल 2026 और 2027 में भारत की आर्थिक विकास दर घटकर 6.4 प्रतिशत रह सकती है।
इसके बावजूद, आईएमएफ ने कहा है कि भारत उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए विकास का एक प्रमुख इंजन बना रहेगा। आईएमएफ के अनुसार, इन देशों की औसत विकास दर 2026 और 2027 में सिर्फ 4 प्रतिशत से थोड़ी अधिक रहने का अनुमान है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि उभरते और विकासशील एशियाई देशों को तकनीक से जुड़े निवेश और व्यापार का फायदा मिल रहा है, भले ही दुनिया की आर्थिक गति हर जगह एक जैसी न हो।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार, वैश्विक आर्थिक विकास दर 2026 में 3.3 प्रतिशत पर स्थिर रहने का अनुमान है। इसमें व्यापार तनाव कम होना, वित्तीय हालात का अनुकूल होना और खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी तकनीकों से जुड़े निवेश में तेजी अहम भूमिका निभाएगी।
महंगाई को लेकर भी भारत के लिए अच्छी खबर सामने आई है। आईएमएफ का कहना है कि 2025 में महंगाई में बड़ी गिरावट के बाद भारत में महंगाई दर फिर से तय लक्ष्य के करीब आ सकती है। इसका कारण खाद्य पदार्थों की कीमतों का नियंत्रण में रहना है, जिससे घरेलू मांग को सपोर्ट मिलेगा।
हालांकि, आईएमएफ ने यह भी चेतावनी दी है कि भविष्य को लेकर कुछ जोखिम अभी बने हुए हैं। अगर एआई से मिलने वाले फायदे उम्मीद से कम रहे, तो निवेश घट सकता है और वैश्विक वित्तीय हालात सख्त हो सकते हैं, जिसका असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ेगा।
वहीं, आईएमएफ का कहना है कि अगर एआई को तेजी से अपनाया गया और उससे उत्पादकता में बढ़ोतरी हुई, तो वैश्विक आर्थिक विकास को गति मिल सकती है, बशर्ते वित्तीय जोखिम नियंत्रण में रहें।
--आईएएनएस
डीबीपी/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
मासिक धर्म और गर्भाशय से जुड़ी बीमारियों के लिए दवा है मेथी के लड्डू, संतुलित रहेंगे हार्मोन
नई दिल्ली, 19 जनवरी (आईएएनएस)। सर्दियों में शरीर को ऊर्जावान बनाए रखने के लिए आहार में कई तरह की चीजें शामिल की जाती हैं, जैसे तिल की बर्फ और गर्म तासीर वाले लड्डू।
सर्दियों में तिल और गुड़ के लड्डू, आटे और गोंद के लड्डू, मेथी के लड्डू और अलसी के लड्डू बनाए जाते हैं। हर तरह के लड्डू के अपने गुण हैं, लेकिन आज हम मेथी के लड्डू के बारे में बात करेंगे, जो गर्भवती महिलाओं से लेकर बच्चों तक के लिए लाभकारी होते हैं।
मेथी के लड्डू सर्दियों में खाए जाने वाले पौष्टिक और ऊर्जावान आहार हैं, जिन्हें बनाने में घी, मेथी, गुड़, आटा और गोंद का इस्तेमाल किया जाता है। स्वाद में थोड़े कड़वे और कसैले ये लड्डू इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करते हैं, जोड़ों के दर्द में आराम देते हैं, और शरीर को अंदर से भी गर्म रखने का काम करते हैं। अगर लड्डूओं में सूखे मेवे और मिला दिए जाएं तो ये स्वाद में और बेहतरीन हो जाते हैं। मेथी के लड्डू को आयुर्वेद में एक शक्तिशाली औषधि माना गया है। ये वात रोग, जोड़ों के दर्द, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज और महिलाओं के गर्भाशय स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी हैं।
नियमित और सही तरीके से सेवन करने पर हार्मोनल बैलेंस बना रहता है और शरीर को अंदर से ताकत मिलती है। मेथी के लड्डू कोलेस्ट्रॉल और शुगर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। मेथी के लड्डूओं में भरपूर फाइबर होता है, जो कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को धीमा कर देता है जिससे रक्त में शुगर तेजी से स्पाइक नहीं करता।
इसके अलावा, मेथी के लड्डू खाने से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों को बराबर पोषण मिलता है और हार्मोन भी संतुलित रहते हैं, जो नॉर्मल डिलीवरी की संभावना को बढ़ाते हैं।
सर्दियों में प्राकृतिक रूप से वात दोष बढ़ने लगता है और जोड़ों व मांसपेशियों में दर्द की परेशानी बढ़ने लगती है। मेथी के लड्डू वात दोष को नियंत्रित कर जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द से राहत देते हैं। यह लड्डू हड्डियों को मजबूती देने में भी सहायक हैं। मेथी के लड्डू हार्मोन को संतुलित करने में मदद करते हैं।
गर्भाशय और मासिक धर्म से जुड़ी परेशानियों में मेथी औषधि की तरह काम करती है। मेथी के लड्डूओं का सेवन दूध के साथ किया जा सकता है। सुबह की शुरुआत ही मेथी के लड्डू और दूध के साथ करनी चाहिए। अगर लड्डू नहीं खा पा रहे हैं, तो एक चम्मच मेथी को पानी में भिगोकर सुबह पानी का सेवन भी कर सकते हैं।
--आईएएनएस
पीएस/एएस
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