पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी का 'गुल प्लाजा' जलकर खाक, व्यापारियों ने सरकारी अनदेखी को ठहराया जिम्मेदार
कराची, 19 जनवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कराची का एक नामी गिरामी मॉल शनिवार को अचानक सुर्खियों में आ गया। शनिवार रात गुल प्लाजा में भयानक आग लगी और इस पर काबू पाने में 24 घंटे से ज्यादा का समय लग गया। चपेट में आए 15 लोगों की जान चली गई जबकि 70 से ज्यादा लापता बताए जा रहे हैं। यहां के लोगों और व्यापारियों ने इसकी वजह विलंब से की गई कार्रवाई को बताया। स्थानीय मीडिया के मुताबिक सीमित संसाधनों के कारण आग घंटों तक धधकती रही।
फिलहाल और ज्यादा लोगों के हताहत होने की आशंका के बीच सर्च ऑपरेशन जारी है।
डॉन के अनुसार, व्यापारियों और इलाके के लोगों ने कहा कि सदर फायर स्टेशन, दूसरे सरकारी विभागों और स्थानीय अधिकारियों की समय पर कार्रवाई से जान और माल बचाया जा सकता था, लेकिन आग बुझाने का काम रविवार सुबह ही पूरी तेजी से शुरू हुआ।
मौके पर मौजूद दुकानदारों ने बताया कि अगर फायर ब्रिगेड की टीम कल रात पूरी ताकत और संसाधनों के साथ आती, तो शायद इतना नुकसान नहीं होता। सदर फायर स्टेशन सिर्फ कुछ ही मिनट की दूरी पर है, फिर भी समय पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
एक स्थानीय निवासी ने बताया कि शनिवार रात को उन्हें बार-बार बताया गया कि पानी की कमी है, जिससे ऑपरेशन में रुकावट आई।
जिओ न्यूज से मुखातिब स्थानीय लोगों ने सिंध सरकार और कराची के मेयर की आलोचना की। बताया कि एम.ए. जिन्ना रोड की हालत इतनी खराब है कि वहां दो पानी के टैंकर भी अगल-बगल खड़े करना बहुत मुश्किल है।
मौके पर मौजूद एक युवक ने बताया, पहले तो धुआं फैलता रहा, फिर आग ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गई। अगर टीमें समय पर पहुंच जातीं, तो शायद लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सकता था।
स्थानीय मीडिया ने रेस्क्यू प्रवक्ता हसानुल हसीब खान के हवाले से बताया कि वे आग पर 95 प्रतिशत तक काबू पाने में कामयाब रहे हैं, और कूलिंग फेज शुरू कर दिया गया है। उन्होंने कहा, आग लगने का कारण अभी पता नहीं चला है। अधिकारियों ने कहा है कि माना जा रहा है कि शॉर्ट-सर्किट से आग लगी थी।
--आईएएनएस
केआर/
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UP News: योगी सरकार देगी यूपी के शहरों को तोहफा, इन आयोजनों का उठाएगी खर्च
UP News: सीएम योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से विकास कर रहे है. सीएम योगी राज्य के युवाओं से लेकर किसान, महिलाओं, बुजुर्गों समेत हर वर्ग पर विशेष ध्यान दे रहे हैं. ऐसे में योगी सरकार धार्मिक आयोजन के लिए भी अपना खजाना खोल रही है. दरअसल, अब योगी सरकार राज्य के शहरों में होने वाले छोट और बड़े दोनों प्रकार के धार्मिक मेलों का भी खर्च उठाएगी.
बता दें कि योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रांतीय मेले के लिए 50 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया था. जिसे अप्रैल 2026 तक खर्च किया जाना है. अब योगी सरकर नगर विकास विभाग निकायों से मेले के संबंध में प्रस्ताव मांग रही है. जिसमें पूछा जाएगा कि उनके यहां कितने प्रकार के धार्मिक मेलों का आयोजन होता है और उन मेलों का क्या ऐतिहासिक महत्व है. इन प्रस्तावों के आधार पर योगी सरकार निकायों को मेला खर्च के खर्च के लिए पैसा उपलब्ध कराएगी.
जनता को ऐतिहासिक महत्व बताना है वजह
बता दें कि शहरी क्षेत्रों में लगने वाले मेले और धार्मिक आयोजन का पैसा खर्च करने के पीछे योगी सरकार का मकसद लोगों को इनका ऐतिहासिक महत्व बताना है. दरअसल, उत्तर प्रदेश में काफी संख्या में ऐसे मेलों को आयोजन होता है, लेकिन लोगों को उनके बारे में अधिक जानकारी नहीं होती. हालांकि, स्थानीय स्तर पर इन मेलों का काफी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व होता है. उदाहरण के तौर पर राज्य के बलरामपुर जिले के देवीपाटन मंदिर पर नवरात्र में लगने वाला मेला काफी महत्वपूर्ण होता है. लेकिन ज्यादातर लोग इस धार्मिक मेले के महत्व के बारे में नहीं जानते. इस मेले में यूपी ही नहीं बल्कि दूसरे राज्यों के भी हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं.
शासन ने सभी जिलों से मांगे प्रस्ताव
इसी तरह से राज्य के दूसरे शहरों में भी इसी प्रकार के तमाम मेले लगते हैं लेकिन उनके बारे में स्थानीय लोगों को छोड़कर ज्यादा जानकारी नहीं होती. ऐसे में सरकार ने उच्च स्तर पर फैसला लिया है कि स्थानीय धार्मिक मेलों का प्रांतीयकरण किया जाए. जिसका खर्च सरकार वहन करे. इसके लिए योगी सरकार ने राज्य के सभी जिलों से इसके लिए प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा है. अब शासन स्तर पर यह देखा जा रहा कि प्रदेश के कितने जिलों से धार्मिक मेलों के संबंध में प्रस्ताव आ चुके हैं और कितने नहीं आए हैं.
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