UP Election 2027: अंबेडकर नगर की 5 सीटों पर सपा का दबदबा बरकरार रहेगा या लगेगा झटका?
साल 1995 में बना अंबेडकर नगर जिला अपने नाम में ही सामाजिक न्याय की राजनीति का प्रतीक है. मगर वक्त के साथ यहां की सियासत ने कई करवटें ली हैं. बता दें आने वाले 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले यहां की राजनीतिक गरमाई हुई है. आइए जानते हैं जिले की सभी पांच सीटों का पूरा गणित.
अंबेडकर नगर जिले की 90 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती
जनगणना 2011 के मुताबिक अंबेडकर नगर जिले की कुल आबादी करीब 24 लाख है, जिसमें पुरुषों की संख्या करीब 12 लाख 12 हजार और महिलाओं की संख्या करीब 11 लाख 85 हजार दर्ज हुई थी. यहां प्रति हजार पुरुषों पर 976 महिलाएं हैं, जो प्रदेश के औसत से काफी बेहतर माना जाता है. साक्षरता दर की बात करें तो वह करीब 74 प्रतिशत रही जिसमें पुरुष साक्षरता करीब 82 प्रतिशत और महिला साक्षरता करीब 63 प्रतिशत दर्ज हुई. बता दें जिले की करीब 90 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है.
हिंदू समुदाय की हिस्सेदारी करीब 80 प्रतिशत है
धार्मिक आबादी की बात करें तो यहां हिंदू समुदाय की हिस्सेदारी करीब 80 प्रतिशत और मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी करीब 19 प्रतिशत है. मुस्लिम आबादी खासतौर पर टांडा, जलालपुर और अकबरपुर जैसे कस्बाई इलाकों में ज्यादा केंद्रित है. अनुसूचित जाति की आबादी का हिस्सा भी यहां करीब 25 प्रतिशत है जो प्रदेश के औसत से कहीं ज्यादा है और दलित वोट बैंक को जिले की राजनीति में बेहद अहम बनाता है.
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अंबेडकर नगर जिले में 5 विधानसभा सीटें, जिसमें से 1 आरक्षित
अंबेडकर नगर जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें आती हैं, जिनके नाम हैं कटेहरी, टांडा, जलालपुर, अकबरपुर और अलापुर. बता दें इनमें से अलापुर सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है जबकि बाकी चारों सीटें सामान्य श्रेणी में आती हैं. 2022 के नतीजे पर गौर करें तो चुनाव आयोग के मुताबिक यहां सपा का पूरी तरह क्लीन स्वीप हुआ था. जिले की सभी पांच सीटों पर सपा ने जीत दर्ज की थी जबकि भाजपा और बसपा दोनों का यहां खाता तक नहीं खुल सकी थीं.
2022 में पांचों विधानसभा सीटों का ये रहो थे नतीजे
कटेहरी विधानसभा सीट की बात करें तो सपा के लाल जी वर्मा ने भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी के अवधेश द्विवेदी को हराया था.
टांडा सीट पर सपा के राम मूर्ति वर्मा ने भाजपा के कपिलदेव वर्मा को पराजित किया था. बता दें इस सीट पर जिले में सबसे ज्यादा मतदान हुआ था.
जलालपुर सीट पर सपा के राकेश पांडेय ने बसपा के डॉ. राजेश सिंह को करीब 13 हजार 630 वोटों से हराया था.
अकबरपुर सीट पर सपा के रामअचल राजभर ने भाजपा के धर्मराज निषाद को करीब 12 हजार 336 वोटों से मात दी थी. बता दें राजभर 2017 में बसपा के टिकट पर यही सीट जीत चुके थे.
अलापुर (सुरक्षित) सीट है यहां सपा के त्रिभुवन दत्त ने भाजपा के त्रिवेणी राम को करीब 9 हजार 383 वोटों से हराया था.
अंबेडकर नगर जिले ने तय किया बसपा-भाजपा से होते हुए सपा तक का सफर
एक रिपोर्ट के मुताबिक 2017 के विधानसभा चुनाव में अंबेडकर नगर जिले की तस्वीर पूरी तरह अलग थी. उस चुनाव में भाजपा ने टांडा और अलापुर सीटें जीती थीं. बसपा ने कटेहरी और अकबरपुर पर कब्जा जमाया था. इसके अलावा जलालपुर सीट सपा के खाते में गई थी. बता दें जिन नेताओं ने 2017 में बसपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी वही लाल जी वर्मा और रामअचल राजभर 2022 में सपा में शामिल होकर फिर विधायक बने थे. दिलचस्प बात ये है कि इस दल-बदल ने साफ दिखाया कि जिले में उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ अक्सर पार्टी के झंडे से ज्यादा असर डालती है.
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री @NitinNabin ने विभिन्न राज्यों के निम्नलिखित प्रदेश प्रभारियों और सह प्रभारियों की नियुक्तियां की है। pic.twitter.com/isYWxWBRIi
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अंबेडकर नगर जिले में अब मौजूदा हालात क्या हैं?
2027 से पहले जिले की राजनीति में सबसे बड़ा झटका कटेहरी सीट पर लगा है. दरअसल, 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के लाल जी वर्मा अंबेडकर नगर संसदीय सीट से सांसद चुने गए जिसके बाद कटेहरी विधानसभा सीट खाली हो गई. नवंबर 2024 में हुए उपचुनाव में सपा ने लाल जी वर्मा की पत्नी शोभावती वर्मा को मैदान में उतारा मगर भाजपा के धर्मराज निषाद ने बड़े अंतर से जीत दर्ज कर यह सीट सपा से छीन ली. राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह हार सपा के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है क्योंकि कटेहरी में कुर्मी, निषाद और ब्राह्मण मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं और भाजपा ने निषाद बिरादरी को साधकर यहां बढ़त बनाई.
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PDA समीकरण को फिर से मजबूत करने की चुनौती
ऐसा माना जा रहा है कि इस उपचुनाव के नतीजे ने 2027 से पहले साफ संकेत दे दिया है कि भाजपा जिले में वापसी की जमीन तैयार करने में जुटी है जबकि सपा को अपने परंपरागत पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) समीकरण को फिर से मजबूत करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. दूसरी ओर बसपा भी अपने पुराने आधार वाले इस जिले में संगठन को फिर खड़ा करने की कोशिश में जुटी है ताकि दलित वोट बैंक पर दोबारा पकड़ बनाई जा सके.
आज देश में फिरकापरस्त ताकतों से राहुल गांधी जी और प्रियंका गांधी जी लड़ रहे हैं।
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हमारे साथ जो नेता आज पार्टी में शामिल हुए हैं, मैं उन सभी को बधाई देता हूं।
कांग्रेस पार्टी में आने के लिए हमें प्रभारी श्री @AdvRajendraPal जी, प्रदेश अध्यक्ष श्री @kashikirai जी और सांसद श्री… pic.twitter.com/2QyRoK7Svd
अंबेडकर नगर जिले की पांचों सीट पर क्या है जातीय समीकरण
- कटेहरी सीट पर कुर्मी, निषाद और ब्राह्मण मतदाता सबसे ज्यादा निर्णायक वोट बैंक हैं. यही वजह है कि इस सीट पर प्रमुख दल अक्सर पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवार को ही चुनाव मैदान में उतारते हैं.
- टांडा सीट की बात करें तो इस सीट पर मुस्लिम मतदाता बड़ी संख्या में हैं. इसके अलावा यहां यादव और अन्य पिछड़ी जातियां भी अहम भूमिका में रहती हैं.
- जलालपुर सीट पर मुस्लिम और ब्राह्मण मतदाताओं के बीच संतुलन नतीजा तय करता रहा है.
- अकबरपुर सीट पर राजभर और अन्य पिछड़ी जातियों का प्रभाव हैं. साथ ही यहां मुस्लिम मतदाता भी बड़ी भूमिका में रहते हैं.
- अलापुर (सुरक्षित) सीट पर दलित मतदाता सबसे बड़ा समूह है. इसके अलावा यादव और मुस्लिम मतदाता भी यहां काफी प्रभावशाली हैं.
"आने वाले समय में जनता अपने मतदान से इस सरकार को हमेशा हमेशा के लिए बुलडोज कर देगी।"
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• माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी pic.twitter.com/zbryl4GEcC
FAQ
सवाल: अंबेडकर नगर जिले में कुल कितनी विधानसभा सीटें हैं?
जवाब: अंबेडकर नगर जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं, कटेहरी, टांडा, जलालपुर, अकबरपुर और अलापुर.
सवाल: इनमें से कौन-सी सीट आरक्षित है?
जवाब: अलापुर सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है, बाकी चारों सीटें सामान्य श्रेणी की हैं.
सवाल: 2022 चुनाव में अंबेडकर नगर जिले में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?
जवाब: सपा ने सभी पांच सीटों पर जीत दर्ज की, भाजपा और बसपा दोनों का जिले में खाता तक नहीं खुल सका.
सवाल: कटेहरी सीट पर अभी किसका कब्जा है?
जवाब: 2022 में सपा के लाल जी वर्मा यहां से जीते थे, मगर सांसद बनने के बाद खाली हुई इस सीट पर नवंबर 2024 के उपचुनाव में भाजपा के धर्मराज निषाद ने बड़ी जीत दर्ज की.
सवाल: अंबेडकर नगर जिले की आबादी में हिंदू और मुस्लिम समुदाय का हिस्सा कितना है?
जवाब: जनगणना 2011 के अनुसार जिले में हिंदू आबादी करीब 80 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी करीब 19 प्रतिशत है.
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Karwa Chauth 2026 Date: कब है करवा चौथ 2026? नोट करें सही तिथि, समय और पूजन विधि
Karwa Chauth 2026 Date: हिंदू धर्म में पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखा जाता है. ऐसे कई उपवास है, जैसे तीज और वट-सावित्री का व्रत. इसी प्रकार करवा चौथ भी सुहागिनों के बीच एक प्रमुख पर्व माना जाता है. सुहागिन महिलाएं इस व्रत को रखती है ताकि अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन में सुख की कामना करती हैं. इस व्रत के दिन महिलाएं सूर्योदय के साथ व्रत रखा जाता है और चंद्रमा निकलने तक व्रत रखा जाता है. इस दिन शाम को पूजा करने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है. करवा चौथ पर पति का तिलक करने के बाद वे पत्नी को पानी पिलाते हैं. इसके साथ उनका व्रत भी तोड़ा जाता है. चलिए जानते हैं साल 2026 में करवा चौथ का व्रत किस दिन रखा जाएगा, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है और चंद्रमा कब दिखने वाला है, सब कुछ विस्तार से पढ़ें.
करवा चौथ 2026 कब है?
द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा. हर साल यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है. पंचांग के अनुसार, इस वर्ष चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर की रात 1 बजकर 6 मिनट पर प्रारंभ हो रही है और 29 अक्टूबर 2026 को रात 10:09 पर समाप्त होगी. इसी कारण से करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर को रखा जाएगा. इस दिन महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले ही सरगी खाकर व्रत रखती है. इसके बाद पूरे दिन बिना अन्न और जल के व्रत किया जाता है. रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद पूरा किया जाता है.
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करवा चौथ 2026 का पूजा मुहूर्त
करवा चौथ की पूजा शाम के समय होती है. साल 2026 में करवा चौथ की पूजा के लिए शुभ समय शाम 5 बजकर 38 मिनट से लेकर 6 बजकर 56 मिनट तक रहेगा. इस समय संध्या पूजन और कथा का पाठ किया जा सकता है.
करवा चौथ की कथा का पाठ कब करना चाहिए?
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, करवा चौथ की कथा का पाठ शाम के समय यानी प्रदोष काल में किया जाता है. यह दोपहर के बाद का पूजा का समय होता है. इस समय सभी व्रत रखने वाली महिलाएं और शाम को इक्ट्ठा होकर करवा माता का पूजन करती है. सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें. इसके बाद कथा का पाठ करें. अगर आप दिन में कथा सुनती हैं, तो कथा के बाद लोटे का जल सूर्यदेव को अर्पित करना चाहिए. वहीं, शाम को पूजा के वक्त कथा सुनने के बाद चंद्रमा निकलने पर चंद्रमा को अर्घ्य दें.
करवा चौथ 2026 का चंद्रोदय का समय?
करवा चौथ के उपवास में चंद्रमा का खास महत्व होता है. व्रत रखने वाली महिलाएं चंद्रमा दर्शन और अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलती हैं. 29 अक्टूबर 2026 को चंद्रमा रात करीब 8 बजकर 17 मिनट पर दिखाई देगा. वैसे तो चंद्रमा उदय होने का समय सभी शहरों का अलग-अलग हो सकता है. इसलिए, व्रत रखने वाली महिलाओं को अपने शहर के अनुसार, चंद्रोदय का समय देखकर व्रत खोलना चाहिए. चंद्रमा निकलने के बाद महिलाएं छलनी में चंद्र देव के दर्शन करती हैं. फिर चंद्रमा को जल अर्पित करती है.
करवा चौथ की पूजन विधि
करवा चौथ के दिन पर सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करना है. इसके बाद पूजा करके व्रत का संकल्प लेना चाहिए. इस दिन सूर्योदय से पहले सरगी खाएं और फिर व्रत रखना शुरू करें. इसके बाद दिनभर भगवान का ध्यान करते रहे. शाम के समय पूजा स्थल की साफ-सफाई करें और पूजा की तैयारियां करें. भगवान गणेश और कार्तिकेय की भी पूजा करें. करवा पूजन के बाद दीपक जलाएं. फिर कथा का श्रवण करें. कई महिलाएं करवा चौथ पर करवा घुमाने वाली रस्म भी करती हैं. पूजा समाप्त होने के बाद चंद्रमा निकलने का इंतजार करना चाहिए. चंद्रमा निकलने के बाद परंपरागत करवा चौथ की रस्में निभाएं. छलनी में चंद्रमा दर्शन करें और पति के भी छलनी से दर्शन करें. इसके बाद पति अपनी पत्नी को पानी पिलाते हैं. इस तरह करवा चौथ का व्रत पूरा होता है.
जानें करवा चौथ का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ का व्रत पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास को बढ़ाता है. इस दिन महिलाएं माता पार्वती की भी पूजा करते हैं और अपने पति की लंबी आयु की प्रार्थना करते हैं. माता पार्वती अखंड सौभाग्य की देवी मानी जाती है. इसलिए, करवा चौथ के दिन माता पार्वती की पूजा करें. वे आपको सुहाग और सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद देती है.
करवा चौथ की पूजन सामग्रियां
- करवा और ढक्कन
- मीठा करवा
- छलनी
- पूजा थाली
- दीपक
- बाती
- अक्षत
- रोली
- करवा माता का चित्र
- अनाज
- धूप
- कपूर
- कलावा
- सींक
- जल का लोटा
- फल- 5 प्रकार के
- मिठाइयां
- व्रत कथा की पुस्तक
- दक्षिणा
सोलह श्रृंगार की सामग्रियां
सिंदूर, महावर, मेहंदी, चूड़ियां, बिंदी, कांच व लाख के कंगन. इसके साथ लाल चुनरी. हरे या लाल रंग के नए वस्त्र. बिछिया, मंगलसूत्र, मांग टीका, और नथ. कंघा, शीशा और इत्र.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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