ECI Internal Dissent Controversy: SIR पर मतभेद के दावों के बीच चुनाव आयोग की सफाई: ECI बोला- 'सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए'
भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली और उसकी निष्पक्षता को लेकर देश में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में आई मीडिया रिपोर्टों के बाद यह दावा किया जा रहा है कि आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सर्वसम्मत नहीं है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने दो अन्य चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए कई महत्वपूर्ण आदेश जारी किए।
मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण (SIR), फॉर्म-6 में बदलाव और डिजिटल वोटर डेटा की सुरक्षा से जुड़े इन दावों ने देश के राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। एक तरफ जहां चुनाव आयोग ने इन आरोपों का खंडन करते हुए सभी फैसले सर्वसम्मति से होने की बात कही है, वहीं पूरे विपक्षी गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
चुनाव आयोग का ढांचा और आयोग की आधिकारिक सफाई
भारतीय निर्वाचन आयोग में मुख्य रूप से तीन अधिकारी होते हैं, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो अन्य चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी शामिल हैं। नियमानुसार आयोग का कोई भी बड़ा फैसला तीनों अधिकारियों के हस्ताक्षर या फिर कम से कम दो अधिकारियों की सहमति से ही पास होता है।
अंदरूनी मतभेद की खबरें सामने आने के बाद आयोग ने स्पष्टीकरण दिया कि किसी भी संस्था में अलग-अलग राय होना स्वाभाविक है, लेकिन अंतिम फैसला हमेशा सबकी सहमति से ही होता है। आयोग से जुड़े सूत्रों का यह भी कहना है कि किसी भी चुनाव आयुक्त ने कोई आधिकारिक आपत्ति या विरोध दर्ज नहीं कराया था, बल्कि उन्होंने सिर्फ अपनी सलाह और टिप्पणियां दी थीं, जिन्हें अंतिम फैसला लेते समय ध्यान में रखा गया था।
मीडिया रिपोर्ट में किन मुद्दों पर मतभेद का दावा किया गया
अंग्रेजी अखबार 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक खोजी रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि पिछले 10 महीनों के दौरान दोनों चुनाव आयुक्तों ने आयोग के कई फैसलों पर अपनी चिंता जाहिर की थी। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों अधिकारियों की शिकायत थी कि कई महत्वपूर्ण फैसले उनकी गैरमौजूदगी या बिना उनकी मंजूरी के लिए गए।
जिन मुख्य विषयों पर सवाल उठाए गए, उनमें देश भर में मतदाता सूची सुधार का विशेष अभियान, नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 में किए गए बदलाव, वोटर डेटा की डिजिटल सुरक्षा और मतदाता सूची से नाम हटाने या जोड़ने की कानूनी प्रक्रिया शामिल थी।
फॉर्म-6 में बदलाव और डिजिटल डेटा की सुरक्षा पर उठे सवाल
रिपोर्ट में बताया गया है कि नए वोटर बनने के लिए भरे जाने वाले फॉर्म-6 में एक नया सवाल जोड़ा गया था, जिसमें आवेदक से उसके या उसके परिवार के पिछले वोटर होने का सबूत मांगा जा रहा था। इस पर चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने कड़ा ऐतराज जताया और कहा कि नियमों में बिना औपचारिक संशोधन किए ऐसा बदलाव करना सही नहीं है।
इसके अलावा, दोनों अधिकारियों ने डिजिटल वोटर डेटा के सुरक्षा ऑडिट की भी मांग की, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई अनधिकृत व्यक्ति मतदाता सूची में फेरबदल न कर सके। दोनों आयुक्तों ने राज्य स्तर के अधिकारियों को पोर्टल तक पूरी पहुंच न मिलने का मुद्दा भी उठाया और इस संबंध में कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा।
पश्चिम बंगाल और गोवा में सामने आईं प्रशासनिक कमियां
आयोग की बैठकों में कुछ राज्यों से जुड़े मामलों पर भी गंभीर चर्चा हुई। पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट सुधार के दौरान जिन लोगों के नाम अदालत के आदेश से दोबारा जोड़े गए थे, उनके खिलाफ आयोग द्वारा अपील दाखिल की गई। इस पर चुनाव आयुक्त संधू ने सवाल उठाया कि जब उन्होंने या राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इसकी मंजूरी नहीं दी थी, तो यह कदम किसकी अनुमति से उठाया गया।
इसी तरह गोवा का एक मामला सामने आया, जहां अधिकारियों की जांच में सही पाए जाने के बावजूद सॉफ्टवेयर में तकनीकी विकल्प न होने के कारण 97 योग्य नागरिकों के नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल होने से छूट गए।
विपक्षी दलों का तीखा हमला और कड़ी कार्रवाई की मांग
इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होते ही विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर निष्पक्षता से काम न करने और मनमाने फैसले लेने का आरोप लगाया। शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने मुख्य चुनाव आयुक्त को तुरंत निलंबित करने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।
वहीं, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि अगर संवैधानिक संस्था के अधिकारियों की ही बात नहीं सुनी जा रही है, तो यह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है और इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट को तुरंत खुद संज्ञान लेना चाहिए।
फैट, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट खाने का सही तरीका क्या है? अंबानी फैमिली के फिटनेस ट्रेनर ने बताया
हेल्दी रहना है और वेट लॉस करना चाहते हैं तो जान लें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और फैट जैसे न्यूट्रिशन को कैसे खाएं? इस सवाल का जवाब दिया अंबानी फैमिली के फिटनेस ट्रेनर विनोद चन्ना ने इस बारे में गाइड किया है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi
Hindustan









