Responsive Scrollable Menu

कांग्रेस को लगा बड़ा झटका, जानें क्यों इस दिग्गज ने दिया इस्तीफा

कर्नाटक में सूखे की स्थिति को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर असंतोष एक बार फिर सामने आया है. विजयपुरा जिले के इंडी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौडा पाटिल ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने यह कदम इंडी और चडचन तालुक को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किए जाने के विरोध में उठाया है. पाटिल ने अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष यूटी खादर को सौंपने के साथ मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को भी इसकी जानकारी दी है.

इस घटनाक्रम को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यशवंतरायगौडा पाटिल सत्तारूढ़ दल के विधायक हैं और उनका इस्तीफा किसी विपक्षी राजनीतिक दल के दबाव के बजाय अपने ही क्षेत्र के किसानों और सूखे की स्थिति को लेकर सरकार के सामने असहमति के रूप में सामने आया है.

आखिर क्यों नाराज हैं यशवंतरायगौडा पाटिल?

पाटिल की मुख्य शिकायत यह है कि विजयपुरा जिले के 13 तालुकों में से बड़ी संख्या को सूखा प्रभावित क्षेत्र की सूची में शामिल किया गया, लेकिन इंडी और चडचन को इससे बाहर रखा गया.

विधायक का कहना है कि इन दोनों इलाकों में बारिश की कमी और फसल प्रभावित होने के कारण किसानों के सामने गंभीर परिस्थितियां पैदा हुई हैं. किसानों ने बीज और खाद के लिए कर्ज लिया, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण फसलों को नुकसान पहुंचा. इसके अलावा पेयजल और पशुओं के लिए चारे की समस्या का भी उन्होंने उल्लेख किया है.

पाटिल ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को सरकार के सामने कई बार उठाया. रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने 28 अगस्त को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और संबंधित मंत्रियों को पत्र लिखकर इंडी और चडचन को सूखा प्रभावित घोषित करने की मांग की थी. इसके बावजूद जब दोनों तालुकों को सूची में शामिल नहीं किया गया तो उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा देने का फैसला किया.

इस्तीफा देने की क्या वजह बताई?

अपने इस्तीफे में पाटिल ने कहा कि वह सत्तारूढ़ दल के विधायक होने के नाते सरकार को असहज स्थिति में डाले बिना अपनी मांग रखते रहे. उनका आरोप है कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद उनके क्षेत्र की समस्या को अपेक्षित महत्व नहीं मिला.

पाटिल ने यह भी कहा कि जब वह अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों की समस्याओं का समाधान कराने में सक्षम नहीं हैं, तो विधायक के तौर पर अपनी जिम्मेदारी के साथ न्याय नहीं कर पा रहे हैं. इसी आधार पर उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने का निर्णय लिया.

हालांकि, इस्तीफा सौंपना और उसका औपचारिक रूप से स्वीकार होना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं. इसलिए आगे विधानसभा अध्यक्ष के स्तर पर इस्तीफे पर निर्णय महत्वपूर्ण होगा.

क्या यह पहली बार है जब पाटिल ने इस्तीफा दिया?

नहीं. यशवंतरायगौडा पाटिल इससे पहले भी विधायक पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर चुके हैं. अगस्त 2026 में कर्नाटक में मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान कुछ कांग्रेस विधायकों में असंतोष सामने आया था.

 उस समय पाटिल भी उन विधायकों में शामिल थे, जिन्हें मंत्री पद नहीं मिला था. उन्होंने उस दौरान इस्तीफा दिया था, लेकिन मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और पार्टी नेताओं की बातचीत के बाद अपना इस्तीफा वापस ले लिया था.

इस बार उनकी नाराजगी का मुद्दा अलग है. मौजूदा इस्तीफे का केंद्र इंडी और चडचन को सूखा प्रभावित तालुकों की सूची में शामिल करने की मांग है.

कर्नाटक में सूखे की स्थिति क्यों महत्वपूर्ण है?

कर्नाटक के कई हिस्सों में इस साल कम बारिश और फसल नुकसान को लेकर सरकार और जनप्रतिनिधियों के बीच लगातार चर्चा चल रही है. राज्य सरकार ने अलग-अलग चरणों में तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है.

22 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में सूखा प्रभावित तालुकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई थी और सरकार ने कहा था कि जमीनी आकलन जारी रहने के कारण यह संख्या आगे भी बढ़ सकती है. उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने विधानसभा में कहा कि सूखे का आकलन चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है और तालुकों को निर्धारित मानकों के आधार पर सूखाग्रस्त घोषित किया जा रहा है.

यानी सरकार की तरफ से यह तर्क दिया गया है कि केवल राजनीतिक या स्थानीय मांग के आधार पर किसी क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया जा सकता. इसके लिए निर्धारित मानकों और जमीनी रिपोर्ट के आधार पर प्रक्रिया पूरी करनी होती है.

सरकार सूखा घोषित करने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाती है?

कर्नाटक सरकार के अनुसार, सूखा घोषित करने की प्रक्रिया केंद्र सरकार की ओर से तय दिशा-निर्देशों के आधार पर की जाती है. इसमें बारिश की कमी, फसल की स्थिति और अन्य जमीनी परिस्थितियों का आकलन किया जाता है.

राज्य सरकार का कहना है कि अलग-अलग क्षेत्रों में स्थिति का मूल्यांकन पूरा होने के बाद चरणों में तालुकों को सूखा प्रभावित सूची में शामिल किया जा रहा है.

इसलिए किसी क्षेत्र का शुरुआती सूची से बाहर रहना अंतिम स्थिति नहीं माना जाता, यदि बाद के आकलन में वह निर्धारित मानकों पर खरा उतरता है. यही प्रक्रिया अब इंडी और चडचन के मामले में भी महत्वपूर्ण है.

क्या सिर्फ इंडी में ही नाराजगी है?

नहीं. कर्नाटक में सूखा प्रभावित क्षेत्रों को लेकर कांग्रेस के भीतर दूसरे विधायकों की ओर से भी सवाल उठाए गए हैं. गडग से कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री एचके पाटिल ने भी अपने क्षेत्र को सूखा प्रभावित घोषित करने की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बनाया था. उन्होंने कहा था कि यदि गडग तालुक को 10 अक्टूबर तक सूखा प्रभावित घोषित नहीं किया गया तो वह विधायक पद से इस्तीफा देने पर विचार करेंगे.

इससे संकेत मिलता है कि सूखे का मुद्दा कर्नाटक में केवल विपक्ष और सरकार के बीच का राजनीतिक विषय नहीं है, बल्कि सत्तारूढ़ दल के भीतर से भी स्थानीय स्तर पर दबाव सामने आ रहा है.

कांग्रेस के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम?

यशवंतरायगौडा पाटिल का इस्तीफा कांग्रेस सरकार के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह सत्तारूढ़ दल के विधायक हैं. किसी विधायक का अपने ही क्षेत्र से जुड़े मुद्दे पर इस्तीफा देना सरकार के सामने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अपेक्षाओं को दर्शाता है.

हालांकि, इसे सरकार या पार्टी के भविष्य पर किसी बड़े निष्कर्ष के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी. सबसे पहले यह देखना होगा कि विधानसभा अध्यक्ष इस्तीफे पर क्या निर्णय लेते हैं और सरकार इंडी तथा चडचन को लेकर आगे क्या कदम उठाती है.

तीन महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर नजर

अब पूरे मामले में तीन घटनाक्रम महत्वपूर्ण होंगे. पहला, विधानसभा अध्यक्ष इस्तीफे को स्वीकार करते हैं या नहीं. दूसरा, क्या सरकार इंडी और चडचन के लिए दोबारा जमीनी आकलन कराती है. तीसरा, क्या इन दोनों तालुकों को बाद की सूखा प्रभावित सूची में शामिल किया जाता है.

पाटिल की मांग मूल रूप से किसानों को राहत और उनके क्षेत्र को सूखा प्रभावित घोषित करने से जुड़ी है. सरकार की ओर से सूखा घोषित करने के लिए निर्धारित मानकों और चरणबद्ध आकलन की बात कही जा रही है.

इसलिए मौजूदा विवाद का अगला चरण इस बात पर निर्भर करेगा कि इंडी और चडचन के लिए जमीनी रिपोर्ट क्या कहती है और राज्य सरकार उस रिपोर्ट के आधार पर क्या फैसला लेती है. फिलहाल विधायक का इस्तीफा इस मुद्दे को कर्नाटक की राजनीति और विधानसभा के केंद्र में ले आया है.

यह भी पढ़ें - Explainer: मेघालय में सियासी भूचाल! एक झटके में टूट गई क्षेत्रीय पार्टी, दो-तिहाई विधायक भाजपा के पाले में...

Continue reading on the app

IND vs WI : किस भारतीय बल्लेबाज ने वेस्टइंडीज के खिलाफ ODI में लगाए हैं सबसे ज्यादा छक्के, देखें टॉप-10 बैटर्स की लिस्ट

IND vs WI : क्रिकेट के इतिहास की शुरुआत में अगर आप आएंगे तो सबसे मजबूत टीमों में वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम का नाम शुमार होगा. लेकिन आज के समय में वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम दुनिया की सबसे कमजोर टीमों में गिनी जाने लगी है. अब वेस्टइंडीज क्रिकेट भारत का दौरा करने वाली है, जहां उसे व्हाइट बॉल सीरीज खेलनी है, जिसमें 3 वनडे और 5 टी20 मैच शामिल होंगे. ये सभी मुकाबले भारत में खेले जाएंगे. 

भारत और वेस्टइंडीज की बीच सबसे पहला वनडे सीरीज खेली जाएगी. इस सीरीज की शुरुआत 27 सितंबर से होगी, जबकि इसका अंतिम मैच 3 अक्टूबर को खेला जाएगा. इस सीरीज में इंडियन क्रिकेट टीम को रोहित शर्मा, विराट कोहली और केएल राहुल जैसे अनुभवी खिलाड़ी खेलते हुए देखने के लिए मिलने वाले हैं. ऐसे में इस सीरीज की शुरुआत से पहले आज हम आपको वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले टॉप-10 भारतीय बल्लेबाजों के बारे में बताने वाले हैं.

वेस्टइंडीज के खिलाफ ODI में सबसे ज्यादा छक्के लगाने भारतीय बल्लेबाज

वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम के खिलाफ वनडे क्रिकेट के अब तक के इतिहास में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड इंडियन क्रिकेट टीम के 39 वर्षीय दाएं हाथ के बल्लेबाज रोहित शर्मा ने नाम है. रोहित के अलावा किन अन्य 9 बल्लेबाजों ने वेस्टइंडीज के खिलाफ सबसे ज्यादा छक्के वनडे क्रिकेट में लगाए हैं और कौन टॉप 10 की लिस्ट में शामिल हैं. आइए जानते हैं.

1 - रोहित शर्मा 

भारत के पूर्व कप्तान और स्टार बल्लेबाज रोहित शर्मा वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाज हैं. रोहित ने वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे में 2009 से लेकर 2023 तक 37 मैचों की 35 पारियों में कुल 35 छक्के लगाए हैं. हिटमैन ने 175 चौकों की मदद से इस टीम के खिलाफ 1613 रन भी स्कोर किए हैं.

2 - एमएस धोनी 

इंडियन क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और कैप्टन कूल ने नाम से पहचाने जाने वाले महेंद्र सिंह धोनी वेस्टइंडीज के खिलाफ खिलाड़ी वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले भारतीय बल्लेबाजों की लिस्ट में दूसरे स्थान पर हैं. धोनी ने 2005 से लेकर 2019 तक 39 मुकाबलों की 33 पारियों में कुल 28 छक्के लगाए हैं. उनके वेस्टइंडीज के खिलाफ 1005 रन भी बनाए हैं.

3 - विराट कोहली 

टीम इंडिया के पूर्व कप्तान विराट कोहली वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे में सबसे ज्यादा छक्के लागने वाले इंडियन क्रिकेट टीम के तीसरे नंबर के बल्लेबाज हैं. विरटा ने 2009 से लेकर 2023 तक 43 मैचों की 41 पारियों में 25 छक्के लगाए हैं. किंग कोहली के नाम वेस्टइंडीज के खिलाफ 2261 रन भी दर्ज हैं. 

4 - श्रेयस अय्यर

वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा छक्के लागने वाले भारतीय बल्लेबाजों की लिस्ट में श्रेयस अय्यर चौथे स्थान पर बने हुए हैं. अय्यर ने अब तक वेस्टइंडीज के खिलाफ 2019 से लेकर 2022 तक 10 मचों की 9 पारियों में कुल 15 छक्के लगाए हैं. उनके नाम कुल 507 रन भी दर्ज हैं.

5 - वीरेंद्र सहवाग

भारत के पूर्व क्रिकेटर और विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले भारत के नंबर-5 बल्लेबाज हैं. सहवाग ने कैरिबियाई टीम के खिलाफ 2001 से लेकर 2011 तक 27 मैचों की 27 पारियों में कुल मिलाकर 15 छक्के लगाए हैं. उन्होंने इस टीम के खिलाफ 836 रन भी बनाए हैं.

6 - युवराज सिंह 

भारत के बाएं हाथ के पूर्व विस्फोटक बल्लेबाज युवराज सिंह भी इस लिस्ट में शामलि हैं. युवराज सिंह भारत की ओर से वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट में छठवें स्थान पर हैं. उन्होंने 2002 से लकर 2017 तक कुल 15 छक्के लगाए हैं. युवराज ने इस टीम के साथ 95 चौकों की मदद से 987 रन भी बनाए हैं.

7 - शिखर धवन

इंडियन क्रिकेट टीम के पूर्व बाएं हाथ के बल्लेबाज शिखर धवन जो गब्बर के नाम से जाने जाते हैं. वो भी इस लिस्ट में शामिल हैं. धवन वेस्टइंडीज के खिलाफ सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले भारतीय प्लेयर्स की लिस्ट में सातवें नंबर पर हैं. उनहोंने 2011 से लेकर 2022 तक 31 मैचों की 30 पारियों में 14 छक्के लगाए हैं. 

8 - सौरव गांगुली 

भारतीय क्रिकेट टीम को आगे भढ़ाने वाले और भविष्य संवारे वाले पूर्व कप्तान और स्टार बल्लेबाज सौरव गांगुली भी वेस्टइंडडीज के खिलाफ सबसे ज्यादा वनडे क्रिकेट में छक्के लगाने वाले आठवें खिलाड़ी हैं, गांगुल ने 1992 से लेकर 2007 तक 27 मैचों की 27 पारियों में अपने बल्ले से कुल 13 छक्के लगाए हैं.

9 - कृष्णमाचारी श्रीकांत

10 - कपिल देव 

रैंक भारतीय बल्लेबाज छक्के
1 रोहित शर्मा 35
2 एमएस धोनी 28
3 विराट कोहली 25
4 श्रेयस अय्यर 15
5 वीरेंद्र सहवाग 15
6 युवराज सिंह 15
7 शिखर धवन 14
8 सौरव गांगुली 13
9 कृष्णमाचारी श्रीकांत 13
10 कपिल देव 11

ये भी पढ़ें : 'स्कूल में सजा दी, मुर्गा बनाया...' वैभव सूर्यवंशी पर खुलकर बोले सुरेश रैना, कहा- 'रोहित-विराट खेले तो वर्ल्ड कप जीतना 90% पक्का'

Continue reading on the app

  Sports

Ashley Noffke: पाकिस्तान के गेंदबाजी कोच ने बीच में छोड़ा कॉन्ट्रैक्ट, एशियन गेम्स के बाद संभालेंगे नई टीम

Ashley Noffke: पाकिस्तान क्रिकेट टीम के सपोर्ट स्टाफ में एक और बड़ा बदलाव होने जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व ऑलराउंडर एश्ले नॉफ्के एशियन गेम्स 2026 के बाद पाकिस्तान के गेंदबाजी कोच का पद छोड़ देंगे। इसके बाद वह नीदरलैंड्स की पुरुष क्रिकेट टीम के मुख्य कोच की जिम्मेदारी संभालेंगे। नॉफ्के का नया कार्यकाल 2028 के अंत तक रहेगा।

नॉफ्के का पाकिस्तान के साथ मूल अनुबंध जून 2027 तक था। हालांकि वह 18 महीने से भी कम समय में टीम से अलग हो जाएंगे। उन्होंने मई 2025 में बांग्लादेश के खिलाफ टी20 सीरीज से पहले पाकिस्तान के गेंदबाजी कोच का पद संभाला था।

पाकिस्तान के कई कोच पहले ही छोड़ चुके हैं टीम
एश्ले नॉफ्के पाकिस्तान के सपोर्ट स्टाफ से अलग होने वाले हालिया सदस्य हैं। इससे पहले जुलाई 2026 में फील्डिंग कोच शेन मैकडरमॉट ने पाकिस्तान का साथ छोड़कर अफगानिस्तान के कोचिंग सेटअप से जुड़ने का फैसला किया था।

वहीं, मई में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज के बाद पाकिस्तान के सफेद गेंद बल्लेबाजी कोच हनीफ मलिक और लंबे समय से टीम के साथ जुड़े फिजियोथेरेपिस्ट क्लिफ डीकिन भी अपना पद छोड़ चुके हैं।

नीदरलैंड्स को विश्व कप क्वालिफिकेशन की चुनौती
नॉफ्के अब नीदरलैंड्स क्रिकेट टीम को नई दिशा देने की कोशिश करेंगे। उनके कार्यकाल में टीम के सामने 2027 वनडे विश्व कप और 2028 टी20 विश्व कप के लिए क्वालिफाई करने की बड़ी चुनौती होगी।

नीदरलैंड्स क्रिकेट बोर्ड की ओर से जारी बयान में नॉफ्के ने कहा कि वह डच पुरुष टीम के साथ काम करने को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि यह एक प्रतिभाशाली और प्रेरित खिलाड़ियों का समूह है। उनका लक्ष्य टीम के विकास को आगे बढ़ाना और कार्यक्रम को मजबूत बनाना है।

नॉफ्के ने अपनी कोचिंग शैली को लेकर कहा कि उनकी शुरुआत रणनीति या योजना से पहले खिलाड़ियों के साथ जुड़ाव बनाने से होती है।

कई टीमों के साथ काम करने का अनुभव
एश्ले नॉफ्के अपने साथ काफी अनुभव लेकर नीदरलैंड्स पहुंचेंगे। वह महिला बिग बैश लीग में ब्रिस्बेन हीट, द हंड्रेड में लंदन स्पिरिट और ऑस्ट्रेलिया की डब्ल्यूएनसीएल में क्वींसलैंड फायर के साथ खिताब जीत चुके हैं।

इसके अलावा, वह न्यूजीलैंड में ओटागो पुरुष टीम के कार्यक्रम का नेतृत्व कर चुके हैं। नॉफ्के महिला प्रीमियर लीग (WPL) में यूपी वॉरियर्ज के साथ भी काम कर चुके हैं। अब नीदरलैंड्स की टीम में उनकी नई भूमिका पर क्रिकेट प्रशंसकों की नजर रहेगी।

Wed, 23 Sep 2026 14:40:27 +0530

  Videos
See all

Mayawati का बड़ा सियासी दांव, भतीजे Ishan Anand को बनाया BSP का राष्ट्रीय संयोजक | UP Politics News #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-23T09:35:24+00:00

Trump Tariff on India : रूस से तेल खरीदना छोड़ेगा भारत? ! | Top News | Trump Tariff | #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-23T09:45:17+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers