वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक में हिस्सा लेने दावोस पहुंचे दिग्गज भारतीय नेता
नई दिल्ली, 18 जनवरी (आईएएनएस)। स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) की सालाना बैठक में हिस्सा लेने के लिए रविवार को दिग्गज भारतीय नेता पहुंच गए हैं। इनमें केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू, केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस शामिल हैं।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) की 56वीं वार्षिक बैठक 19 से 23 जनवरी के बीच होगी। इसमें 130 देशों से करीब 3,000 लीडर्स के शामिल होने की उम्मीद है।
यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब अमेरिकी टैरिफ और विभिन्न देश के बीच युद्ध के कारण दुनिया अस्थिरता का सामना कर रही है।
इस बैठक की थीम ए स्प्रिट ऑफ डायलॉग रखा गया है, जो कि दिखाता है कि इस बैठक का फोकस बंटे हुए विश्व के बीच दोबारा से कॉरपोरेशन बढ़ाने पर है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के अध्यक्ष और सीईओ बोर्गे ब्रेंडे ने कहा कि संवाद अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन गया है। उन्होंने कहा कि भू-आर्थिक प्रतिस्पर्धा के गहराने और तकनीकी बदलाव की गति तेज होने के साथ, अंतरराष्ट्रीय सहयोग एक निर्णायक दौर में प्रवेश कर रहा है, जिससे इस वर्ष के दावोस सम्मेलन का विशेष महत्व बढ़ गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस वर्ष की बैठक में रिकॉर्ड स्तर की राजनीतिक भागीदारी देखने को मिलेगी। लगभग 400 शीर्ष राजनीतिक हस्तियां, जिनमें लगभग 65 राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख एवं जी7 के छह नेता शामिल हैं, भाग लेने के लिए तैयार हैं।
इनके अलावा, प्रमुख वैश्विक कंपनियों के लगभग 850 मुख्य कार्यकारी अधिकारी और अध्यक्ष भी उपस्थित रहेंगे। शीर्ष यूनिकॉर्न फर्मों और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के अग्रणी 100 अन्य लीडर्स भी इसमें शामिल होंगे, जो वैश्विक एजेंडा पर राजनीति, व्यापार और नवाचार के बढ़ते संगम को दिखाता है।
डब्ल्यूईएफ के अनुसार, इस बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन सहित कई बड़े लीडर्स शामिल होंगे।
इस वर्ष कॉरपोरेट जगत की व्यापक भागीदारी की उम्मीद है, जिसमें लगभग 1,700 बिजनेस लीडर्स के शामिल होने की संभावना है। इनमें एनवीडिया के सीईओ जेन्सेन हुआंग, माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला, एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई, गूगल डीपमाइंड के सीईओ डेमिस हसाबिस, पलान्टिर के सीईओ एलेक्स कार्प और ओपनएआई की मुख्य वित्तीय अधिकारी सारा फ्रायर शामिल हैं।
डब्ल्यूईएफ 2026 में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और शिवराज सिंह चौहान के भी शामिल होने की उम्मीद है। इसके अलावा छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की उम्मीद है। इसके अलावा देश के 100 बड़े उद्योगपति और सीईओ इस बैठक में शामिल हो सकते हैं।
--आईएएनएस
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Pakistan News: कराची मौल में लगी भीषण आग, 6 लोगों की मौत
Pakistan News: पाकिस्तान के कराची शहर में शनिवार देर रात दर्दनाक हादसा हो गया. यहां गुल प्लाजा शॉपिंग मॉल में भीषण आग लग गई. रिपोर्ट्स के अनुसार आग इतनी भीषण थी कि मॉल की बिल्डिंग का एक बड़ा हिस्सा ढह गया. इतना ही नहीं 6 लोगों की मौत भी हो गई और 15 से ज्यादा लोग घायल हो गए. घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां कुछ लोगों का इलाज चल रहा है और कई को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई.
पिछले 13 घंटों से दहक रही है आग
अधिकारियों के मुताबिक आग पिछले 13 घंटों से लगातार जल रही है और अब तक पूरी तरह काबू में नहीं आई है. आग लगने के कुछ ही घंटों में हालात बेकाबू हो गए. भीषण गर्मी और तेज लपटों की वजह से मॉल के अंदर मौजूद लोग फंस गए. आग की चपेट में आने से इमारत के कई हिस्से गिर गए, जिससे राहत और बचाव कार्य में काफी मुश्किलें आ रही हैं.
मौके पर दमकल विभाग मौजूद
आग बुझाने के लिए सिंध इमरजेंसी सर्विस रेस्क्यू 1122 और फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर तैनात की गई हैं. अधिकारियों का कहना है कि मॉल के अंदर तापमान बेहद ज्यादा है, जिससे फायरफाइटर्स के लिए अंदर जाना खतरनाक बना हुआ है. इसके अलावा मॉल चारों तरफ से बंद है और वेंटिलेशन की कमी के कारण धुआं बाहर नहीं निकल पा रहा है. इसी वजह से आग बुझाने में ज्यादा समय लग रहा है. आशंका जताई जा रही है कि अब भी कुछ लोग मॉल के अंदर फंसे हो सकते हैं.
क्या बोले फायर अधिकारी
मुख्य फायर अधिकारी के अनुसार गुल प्लाजा करीब दो एकड़ में फैला हुआ है और आग के बाद इसकी हालत काफी खराब हो चुकी है. इमारत को फिलहाल जर्जर घोषित कर दिया गया है. अब सिंध बिल्डिंग कंट्रोल अथॉरिटी (SBCA) मॉल की संरचनात्मक स्थिति की जांच करेगी. साथ ही यह भी देखा जाएगा कि क्या मॉल में फायर सेफ्टी के नियमों का पालन किया गया था या नहीं.
सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
इस हादसे ने कराची में पुरानी और व्यावसायिक इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं. बढ़ती आबादी, पुराने ढांचे और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पहले भी कई बड़े हादसों की वजह बन चुकी है.
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